समुद्र में उठा तूफान, श्रीलंका के करीब चक्रवात ‘दितवाह’, तमिलनाडु की ओर तेज़ी से बढ़ रहा खतरा
मुख्य मौसम बिंदु
- चक्रवात दितवाह (Ditwah) श्रीलंका और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों के बेहद करीब।
- 28–30 नवंबर के बीच भारी बारिश और तेज़ हवाओं की चेतावनी
- कई जिलों में बाढ़, पेड़ उखड़ने और बिजली बाधित होने की आशंका
- दो बार लैंडफॉल की संभावना—श्रीलंका और तमिलनाडु में।
मजबूत चक्रवाती परिसंचरण और गहरे दबाव (Deep Depression) के प्रभाव से भूमध्यरेखीय क्षेत्र (Equatorial Region) में एक और चक्रवाती तूफ़ान बन गया है। यह तूफ़ान श्रीलंका के अत्यंत दक्षिण-पूर्वी समुद्री तट से बेहद पास स्थित है। तूफ़ान के सबसे निकट जो तटीय क्षेत्र हैं, उनमें गॉल (Galle), वेलीगामा (Weligama), मातारा (Matara), तंगल्ला (Tangalla), हंबनटोटा (Hambantota) शामिल हैं।

श्रीलंका के करीब चक्रवात ‘दितवाह’, फोटो: इनसेट/Skymet
चक्रवात का केंद्र 6.3°N और 82°E के आसपास स्थित है। पर्ल हार्बर स्थित संयुक्त टाइफून चेतावनी केंद्र (JTWC) ने 27 नवंबर 2025 की सुबह चक्रवाती तूफान के बनने की घोषणा की है। यमन (Yemen) देश के सुझाव पर इस तूफ़ान का नाम ‘DITWAH’ (दितवाह) रखा जाएगा।पिछले तूफ़ान ‘Senyar (सेनयार)’ ने भारत के तटीय राज्यों में नुकसान नहीं किया था। वहीं, तूफान दितवाह (DITWAH) तमिलनाडु के तट को प्रभावित करेगा, विशेषकर 28 से 30 नवंबर 2025 के बीच (वीकेंड के दौरान)।

श्रीलंका के अत्यंत दक्षिण-पूर्वी समुद्री तट के पास बना तूफान दितवाह
कम अक्षांश पर स्थिति, फिर भी अनुकूल समुद्री तापमान से बनेगा तूफ़ान
यह चक्रवात बहुत निचले अक्षांश (Low Latitude) पर स्थित है, जहाँ कोरिओलिस बल कम होता है और इसलिए इसके अत्यधिक तीव्र चक्रवाती तूफ़ान बनने की संभावना कम है। हालांकि तूफ़ान सीमांत (Marginal) पर्यावरणीय परिस्थितियों में मौजूद है, जहाँ ऊर्ध्वाधर पवन कतरन (Vertical Wind Shear) कम से मध्यम है, फिर भी समुद्र की गर्म सतह (Warm Sea Surface Temperatures) इसके कुछ हद तक मजबूत होने में सहायक हैं। इसके विपरीत तूफ़ान के बिल्कुल पास भूमि होने से घर्षण पैदा होगा और सूखी हवाएं उसमें समा जाएंगी, जो इसकी तीव्रता को सीमित करेगा। कुल मिलाकर तूफ़ान कम से कम अगले 48 घंटों तक बना रहेगा। यह चक्रवात उत्तर-उत्तरपश्चिम (North-Northwest) और फिर उत्तर दिशा की ओर बढ़ेगा, और अपनी यात्रा के दौरान श्रीलंका, मन्नार की खाड़ी, पाक जलडमरूमध्य और तमिलनाडु के बहुत नज़दीक रहेगा।
तूफान दितवाह
पहले ही तमिलनाडु के तट पर पहुँच गए हैं तूफ़ान के बाहरी बादल
तूफ़ान के परिधीय बादल (Peripheral Clouds) तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तटीय क्षेत्रों तक पहुँच चुके हैं और सिस्टम के आगे बढ़ने के साथ ये और उत्तर की ओर फैलेंगे। जानकारी के लिए बता दें, परिधीय बादल (Peripheral Clouds) चक्रवात या किसी बड़े मौसम सिस्टम के बाहरी हिस्से में बनने वाले बादल होते हैं। ये तूफ़ान के केंद्र (Eye/ Core) से दूर होते हैं, लेकिन उसके प्रभाव क्षेत्र में शामिल रहते हैं। वहीं, इस तूफान से बहुत भारी बारिश का ख़तरा जिन जगहों पर अधिक रहेगा, उनमें नागरकोइल, कन्याकुमारी, तूतीकोरिन, पंबन, टोंडी और थूथुकुडी शामिल हैं।
बारिश बेल्ट धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ते हुए नगपट्टिनम से चेन्नई तक तटीय क्षेत्रों को प्रभावित करेगी, जिसमें पुडुचेरी, कराईकल, कुड्डालोर भी शामिल हैं। तमिलनाडु का भीतरी भाग मदुरै, त्रिची, तंजावुर, ईरोड, करूर, सलेम, कोयंबटूर, तिरुपुर, ऊटी में भी तेज बारिश के साथ बहुत तेज हवाएं चलेंगी। इसके साथ ही भारी बारिश तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और केरल के आंतरिक भागों में भी पहुँचेगी।
चक्रवात दो बार जमीन से टकरा सकता है: श्रीलंका और तमिलनाडु
चक्रवात Ditwah विशेष स्थिति रखते हुए दो बार लैंडफॉल (Landfall) कर सकता है,पहला श्रीलंका में और दूसरा तमिलनाडु में। क्योंकि मौसम मॉडल की भविष्यवाणियाँ 4 दिनों के बाद कम भरोसेमंद हो जाती हैं, इसलिए इस सिस्टम को लगातार ट्रैक किया जाएगा और समय-समय पर अपडेट जारी किए जाएँगे। इसके बावजूद तमिलनाडु को चाहिए कि वह अपनी सभी उपलब्ध संसाधनों के साथ तैयारी रखे ताकि तूफान से निपटने में कोई कमी न रह जाए। इस दौरान अचानक बाढ़, भूस्खलन, पेड़ गिरना, बिजली लाइनों में खराबी, और सड़क-रेल-हवाई यातायात में व्यवधान जैसे हालात बन सकते हैं। इन अवरोधों के कारण सामान्य जीवन प्रभावित होगा।
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