पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी की संभावना, ऊँचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन का खतरा बढ़ा
मुख्य मौसम बिंदु
- पहाड़ों में भारी बर्फबारी से बारिश की कमी काफी घटी
- उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा
- सोनमर्ग में भीषण हिमस्खलन, इमारतों को नुकसान
- 30 जनवरी के बाद हिमस्खलन का खतरा और बढ़ने की आशंका
पिछले एक हफ्ते के दौरान पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है, जिससे बारिश की कमी काफी हद तक कम हो गई है। उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से अधिक हो गया है। पंजाब के पटियाला में इस महीने 97 मिमी और लुधियाना में 75 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से लगभग चार गुना अधिक है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के बड़े हिस्सों में भी बारिश हो चुकी है। हालांकि, पहाड़ों में बढ़ी मौसम गतिविधियों के कारण हिमस्खलन (एवलांच) का खतरा काफी बढ़ गया है, जो कई बार बेहद विनाशकारी साबित होता है।
सोनमर्ग में भीषण हिमस्खलन, घरों और होटलों को नुकसान
कश्मीर के सोनमर्ग में कल एक बड़ा हिमस्खलन हुआ, जिससे कई घरों और होटलों को नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि, इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है और बड़ी संख्या में पर्यटक जल्द से जल्द सोनमर्ग छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
हिमस्खलन क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों होता है?
हिमस्खलन पहाड़ों की ढलानों से बर्फ, बर्फीले टुकड़ों और चट्टानों का तेज़ी से नीचे की ओर खिसकना होता है। यह आमतौर पर ऊँची चोटियों पर भारी बर्फबारी के बाद होता है। जब बर्फ की परतें एक के ऊपर एक जमा हो जाती हैं, तो अपने ही भार से ढह जाती हैं। इसके बाद भारी मात्रा में बर्फ, जिसमें हवा फँसी होती है, तेज़ रफ्तार से नीचे की ओर लुढ़कती है और रास्ते में आने वाली हर चीज़ को दबा देती है या बहा ले जाती है। हिमस्खलन अचानक होता है, बिना किसी चेतावनी के आता है और इसमें भारी तबाही की क्षमता होती है।
30 जनवरी के बाद खतरा और बढ़ेगा, सतर्कता जरूरी
30 जनवरी 2026 को एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के पहुंचने की संभावना है। इससे पहले ही मध्यम और ऊँचाई वाले इलाकों में बर्फबारी जारी रह सकती है। नए सिस्टम के आने के बाद पूरे पर्वतीय क्षेत्र में फिर से भारी बर्फबारी होने की आशंका है। 8,000 फीट से अधिक ऊँचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन का खतरा और बढ़ जाएगा।
कम तापमान के कारण बर्फ पिघलती नहीं है और लगातार जमा होती रहती है, जिससे बर्फ के बड़े-बड़े ढेर बन जाते हैं। अचानक ये ढेर तेज़ गति और गड़गड़ाहट की आवाज़ के साथ ढलानों से नीचे खिसकते हैं और रास्ते में आने वाले पेड़, चट्टानें और अन्य चीज़ों को तबाह कर देते हैं। खास बात यह है कि हिमस्खलन का खतरा बर्फबारी रुकने के बाद भी बना रहता है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊँचे इलाकों में अगले कुछ हफ्तों तक विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है।








