पहाड़ों पर ताजा बर्फबारी की संभावना, ऊँचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन का खतरा बढ़ा

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jan 28, 2026, 6:00 PM
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पहाड़ों पर हिमस्खलन का खतरा

मुख्य मौसम बिंदु

  • पहाड़ों में भारी बर्फबारी से बारिश की कमी काफी घटी
  • उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा
  • सोनमर्ग में भीषण हिमस्खलन, इमारतों को नुकसान
  • 30 जनवरी के बाद हिमस्खलन का खतरा और बढ़ने की आशंका

पिछले एक हफ्ते के दौरान पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है, जिससे बारिश की कमी काफी हद तक कम हो गई है। उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से अधिक हो गया है। पंजाब के पटियाला में इस महीने 97 मिमी और लुधियाना में 75 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से लगभग चार गुना अधिक है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के बड़े हिस्सों में भी बारिश हो चुकी है। हालांकि, पहाड़ों में बढ़ी मौसम गतिविधियों के कारण हिमस्खलन (एवलांच) का खतरा काफी बढ़ गया है, जो कई बार बेहद विनाशकारी साबित होता है।

सोनमर्ग में भीषण हिमस्खलन, घरों और होटलों को नुकसान

कश्मीर के सोनमर्ग में कल एक बड़ा हिमस्खलन हुआ, जिससे कई घरों और होटलों को नुकसान पहुंचा है। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि, इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है और बड़ी संख्या में पर्यटक जल्द से जल्द सोनमर्ग छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

हिमस्खलन क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों होता है?

हिमस्खलन पहाड़ों की ढलानों से बर्फ, बर्फीले टुकड़ों और चट्टानों का तेज़ी से नीचे की ओर खिसकना होता है। यह आमतौर पर ऊँची चोटियों पर भारी बर्फबारी के बाद होता है। जब बर्फ की परतें एक के ऊपर एक जमा हो जाती हैं, तो अपने ही भार से ढह जाती हैं। इसके बाद भारी मात्रा में बर्फ, जिसमें हवा फँसी होती है, तेज़ रफ्तार से नीचे की ओर लुढ़कती है और रास्ते में आने वाली हर चीज़ को दबा देती है या बहा ले जाती है। हिमस्खलन अचानक होता है, बिना किसी चेतावनी के आता है और इसमें भारी तबाही की क्षमता होती है।

30 जनवरी के बाद खतरा और बढ़ेगा, सतर्कता जरूरी

30 जनवरी 2026 को एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के पहुंचने की संभावना है। इससे पहले ही मध्यम और ऊँचाई वाले इलाकों में बर्फबारी जारी रह सकती है। नए सिस्टम के आने के बाद पूरे पर्वतीय क्षेत्र में फिर से भारी बर्फबारी होने की आशंका है। 8,000 फीट से अधिक ऊँचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन का खतरा और बढ़ जाएगा।

कम तापमान के कारण बर्फ पिघलती नहीं है और लगातार जमा होती रहती है, जिससे बर्फ के बड़े-बड़े ढेर बन जाते हैं। अचानक ये ढेर तेज़ गति और गड़गड़ाहट की आवाज़ के साथ ढलानों से नीचे खिसकते हैं और रास्ते में आने वाले पेड़, चट्टानें और अन्य चीज़ों को तबाह कर देते हैं। खास बात यह है कि हिमस्खलन का खतरा बर्फबारी रुकने के बाद भी बना रहता है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के ऊँचे इलाकों में अगले कुछ हफ्तों तक विशेष सावधानी बरतने की ज़रूरत है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

भारी बर्फबारी के बाद जब बर्फ की परतें एक-दूसरे पर जम जाती हैं और अपने वजन से फिसलती हैं, तब हिमस्खलन होता है।

8,000 फीट से अधिक ऊँचाई वाले जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में खतरा अधिक है।

हाँ, बर्फ जमा रहने से हिमस्खलन का खतरा बर्फबारी बंद होने के बाद भी बना रहता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है