India Weather: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में प्री-मानसून तूफानों का खतरा बढ़ा

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
May 5, 2026, 2:45 PM
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मौसम अपडेट, फोटो: AI Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • प्री-मानसून में अप्रैल-मई के दौरान तूफानों की संख्या बढ़ती है
  • बंगाल की खाड़ी में अरब सागर की तुलना में अधिक तूफान बनते हैं
  • 2015-2025 के बीच कई बड़े चक्रवाती तूफान दर्ज हुए
  • मई 2026 में अरब सागर में नए तूफान बनने के संकेत

भारतीय समुद्री क्षेत्रों में आमतौर पर दो प्रमुख तूफानी सीजन होते हैं। पहला प्री-मानसून (मार्च से मई) और दूसरा पोस्ट-मानसून (अक्टूबर से दिसंबर) होता हैं। हालांकि, साल के किसी भी महीने में चक्रवाती तूफान बन सकते हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम रहती है। मानसून (जून से सितंबर) के दौरान भी तूफान बनते हैं, खासकर जून की शुरुआत और सितंबर के अंत में इनकी संभावना अधिक होती है।

मार्च में तूफानों की स्थिति

मार्च महीने में अरब सागर में लगभग कोई तूफान नहीं बनता, जबकि बंगाल की खाड़ी में भी बहुत कम बनते हैं। यहां बनने वाले तूफान आमतौर पर 5° से 8° उत्तरी अक्षांश के बीच उत्पन्न होते हैं। ये पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए उत्तर तमिलनाडु या श्रीलंका के पूर्वी तट की ओर जाते हैं। हालांकि, ये अक्सर समुद्र में ही कमजोर होकर समाप्त हो जाते हैं।

अप्रैल में तूफानों का पैटर्न

अप्रैल में बंगाल की खाड़ी के अधिकांश तूफान 8° से 13° उत्तरी अक्षांश और 85° पूर्व देशांतर के पूर्व में बनते हैं। शुरुआत में ये उत्तर-पश्चिम या उत्तर दिशा में बढ़ते हैं, लेकिन बाद में मुड़कर उत्तर-पूर्व की ओर चले जाते हैं और म्यांमार के अराकान तट से टकराते हैं। कुछ तूफान ओडिशा या पश्चिम बंगाल तक भी पहुंच जाते हैं। अरब सागर में तूफानों की संख्या बंगाल की खाड़ी की तुलना में काफी कम होती है। यहां के तूफान भी लगभग उसी तरह चलते हैं और कभी-कभी मुड़कर गुजरात-सिंध मकरान तट की ओर बढ़ जाते हैं।

मई में तूफानों की बढ़ती संख्या

अप्रैल से मई के बीच तूफानों की संख्या में साफ बढ़ोतरी होती है। बंगाल की खाड़ी में ये तूफान 10° से 15° उत्तरी अक्षांश के बीच बनते हैं। ये पहले उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हैं और फिर उत्तर-पूर्व की ओर मुड़ जाते हैं। इनका असर भारत के पूरे पूर्वी तट, बांग्लादेश के तटीय क्षेत्र और म्यांमार के अराकान तट पर पड़ सकता है। अरब सागर में बनने वाले तूफान आमतौर पर उत्तर-पश्चिम दिशा में अरब देशों की ओर बढ़ते हैं, जबकि कुछ महाराष्ट्र-गुजरात तट की ओर भी मुड़ सकते हैं।

2015 से 2025 के बीच तूफानों का रिकॉर्ड

2015 से 2025 के बीच प्री-मानसून सीजन में कुल 10 चक्रवाती तूफान बने। 2015, 2018 और 2025 में एक भी तूफान नहीं बना। इस दौरान अप्रैल में अरब सागर में कोई तूफान नहीं बना, जबकि बंगाल की खाड़ी में अप्रैल 2017 और अप्रैल 2019 में एक-एक तूफान बना। 2019 का चक्रवात फानी (Cyclone Fani) बेहद शक्तिशाली था, जिसने 3 मई 2019 को पुरी (ओडिशा) के पास तट पर टक्कर मारी।

मई महीने में 8 तूफान बंगाल की खाड़ी में और केवल 1 अरब सागर में बना था। वहीं, 2020 में आया चक्रवात अम्फान (Cyclone Amphan) प्री-मानसून का एकमात्र सुपर साइक्लोन था, जिसने 20 मई 2020 को पश्चिम बंगाल के बक्खाली के पास लैंडफॉल किया।

अरब सागर में चक्रवात ताउकटे (Cyclone Tauktae) एक अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान था, जिसने 17 मई 2021 को दीव और ऊना (गुजरात) के बीच तट से टक्कर मारी।

2026 में संभावित नया तूफान

इस साल मार्च और अप्रैल में भारतीय समुद्रों में कोई भी तूफान नहीं बना। लेकिन अब शुरुआती संकेत मिल रहे हैं कि अरब सागर में एक नया सिस्टम विकसित हो सकता है। संभावना है कि 10 मई के आसपास दक्षिण-पूर्व अरब सागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में एक चक्रवाती भंवर (vortex) बन सकता है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए अभी 48 से 72 घंटे का समय लगेगा। आमतौर पर इस तरह के तूफान अफ्रीका के हॉर्न (सोमालिया तट) की ओर बढ़ते हैं, जो इस बार भी संभावित दिशा हो सकती है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

इस दौरान समुद्र का तापमान ज्यादा होता है, जो तूफान बनने के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है।

यहां की परिस्थितियां बंगाल की खाड़ी जितनी अनुकूल नहीं होतीं, इसलिए तूफान कम बनते हैं।

शुरुआती संकेत हैं, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए अभी 48-72 घंटे का इंतजार जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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