जलवायु परिवर्तन की मार: क्यों हिमालय में बढ़ रहे हैं बादल फटने के साथ फ्लैश फ्लड और भूस्खलन?
अगस्त में लगातार मूसलाधार बारिश से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। पश्चिमी हिमालयी राज्यों में ये घटनाएँ लगातार बढ़ते अत्यधिक मौसम (Extreme Weather) की ओर इशारा करती हैं। जम्मू-कश्मीर में मूसलाधार बारिश से अचानक बाढ़ आई और भूस्खलन हुआ। वहीं, उत्तराखंड के धराली क्षेत्र में इसी महीने ग्लेशियर टूटने से फ्लैश फ्लड आई थी। हिमाचल के कुल्लू, शिमला, लाहौल और स्पीति में भी भारी बारिश से हालात बिगड़े हुए हैं।
बढ़ रहे हैं जानलेवा मौसमी हादसे
2010 के बाद से पश्चिमी हिमालयी राज्यों में बादल फटने और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि बढ़ते वैश्विक तापमान की वजह से हवा में नमी अधिक हो रही है, जिससे अचानक और भारी बारिश की संभावना बढ़ जाती है। 2025 के एक अध्ययन में 1970 से 2024 तक की बादल फटने की घटनाओं का विश्लेषण किया गया। जिसमें उत्तराखंड को सबसे अधिक प्रभावित राज्य बताया गया, जबकि हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भी लगातार ऐसी घटनाएँ दर्ज हुईं हैं। मानसून और सर्दियों के मौसम में ऐसी जानलेवा मौसमी आपदाओं से नुकसान तेजी से बढ़ रहा है।
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उत्तरकाशी हादसा,पिघलते ग्लेशियर और नया खतरा
2019 में उत्तरकाशी के अराकोट क्षेत्र में बादल फटने से 19 लोगों की मौत हुई और 70 वर्ग किलोमीटर में गाँव तबाह हो गए। ग्लेशियरों के लगातार पिघलने और टूटने से ऐसी घटनाएँ और बढ़ रही हैं। खीर गंगा जैसी ग्लेशियर-फेड नदियाँ हाल ही में आई बाढ़ से जुड़ी पाई गईं। अलकनंदा और भागीरथी नदी घाटियों में 200 से अधिक 'हैंगिंग ग्लेशियर' की पहचान की गई है। तेज पिघलने की वजह से ये अस्थिर हो गए हैं और भारी बारिश या भूकंप के दौरान अचानक टूटकर भीषण बाढ़ ला सकते हैं।
अव्यवस्थित निर्माण से बढ़ रही तबाही
नदियों के किनारे बिना योजना के बसी बस्तियाँ और कमजोर मकान बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को और बढ़ा रहे हैं। घनी आबादी और असुरक्षित इलाकों में निर्माण के चलते हर आपदा में जनहानि और संपत्ति का नुकसान ज़्यादा होता है। अध्ययन बताते हैं कि बादलों की मोटाई, नमी का स्तर और वायुमंडलीय प्रदूषण (एरोसोल घनत्व) भी बाढ़ के खतरे को बढ़ाते हैं। खासकर नैनीताल जैसे जिलों में इन कारणों से खतरा और ज्यादा है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि आपदा से बचाव के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। इसके लिए खतरे वाले क्षेत्रों का मैपिंग, लोगों का सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास, बाढ़ चेतावनी सिस्टम और बेहतर योजना जरूरी है।
नेपाल में अलग तस्वीर
जहाँ भारत के पश्चिमी हिमालय में चरम वर्षा की घटनाएँ बढ़ रही हैं, वहीं पड़ोसी नेपाल में ऐसी घटनाएँ घट रही हैं। हालांकि नेपाल के पश्चिमी हिस्सों में बारिश पहले से ज़्यादा मौसमी आपदाएं घट रही हैं। भारत का हिमालयी क्षेत्र अब एक नाजुक मोड़ पर है। जलवायु परिवर्तन और अव्यवस्थित विकास की वजह से मौसमी बारिश जानलेवा आपदाओं में बदल रही है।
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