भारतीय समुद्रों में डबल लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय, दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून ने फिर बढ़ाई बारिश

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Nov 24, 2025, 3:00 PM
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समुद्र में जुड़वां मौसम सिस्टम

मुख्य मौसम बिंदु

  • दक्षिण भारत के पास दो निम्न दबाव सिस्टम सक्रिय हैं।
  • उत्तर–पूर्व मानसून 36–48 घंटे तक मजबूत बना रहेगा।
  • तमिलनाडु और केरल में कई जगह भारी बारिश दर्ज हुई है।
  • अगले 2 दिनों में तटीय तमिलनाडु और केरल में भारी बारिश का खतरा बरकरार है।

भूमध्य रेखीय क्षेत्र के पास, भारतीय समुद्रों के दोनों ओर दो निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हैं। एक निम्न दाब क्षेत्र कोमोरिन क्षेत्र और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के पास स्थित है, जो मध्य क्षोभमंडल (mid-troposphere) तक फैले चक्रवाती परिसंचरण से समर्थित है। दूसरा चक्रवाती परिसंचरण दक्षिण-पूर्व अरब सागर के पास बना है, जो जल्द ही निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की स्थिति में है। अगले 48 घंटों तक उत्तर-पूर्व मानसून की गतिविधि जारी रहेगी, जिसके बाद यह कमजोर पड़ जाएगी।

डबल लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय

डबल लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय, सैटेलाइट इमेज

दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्व मानसून की वापसी

नवंबर महीने में दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्व मानसून लगभग शांत रहा, जिससे पाँचों उप-विभागों में बारिश की भारी कमी देखी गई। अब इन दोनों मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से मानसून फिर से सक्रिय हुआ है और अगले 36 घंटों तक बारिश अच्छी रहने की संभावना है। कल दक्षिण तटीय तमिलनाडु और आंतरिक भागों में भारी वर्षा दर्ज की गई। जिसमें पारांगिपेट्टई में 141 मिमी, कराईकल में 65 मिमी, टोंडी में93 मिमी, पुडुचेरी में 29 मिमी, तंजावुर में 70 मिमी, मदुरै में 78 मिमी बारिश रिकॉर्ड हुई है। वहीं, इरोड और कोडाइकनाल में भी क्रमशः 38 मिमी और 39 मिमी वर्षा दर्ज हुई। इसके अलावा तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, तटीय कर्नाटक और केरल के अन्य क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई।

दो दबाव क्षेत्र एक साथ सक्रिय

दो दबाव क्षेत्र एक साथ सक्रिय, Skymet Live Image

दोनों सिस्टम पश्चिम की ओर बढ़ेंगे, बड़ा सिस्टम बनने की संभावना

दोनों मौसम प्रणालियाँ धीरे-धीरे पश्चिम की ओर बढ़ेंगी, और भारतीय तट से कुछ दूरी बनाए रखेंगी। कोमोरिन वाले निम्न दबाव क्षेत्र के दक्षिण-पूर्व अरब सागर वाले सिस्टम में मिलने की संभावना है। इनके मिलन से अरब सागर में एक ज्यादा मजबूत सिस्टम बन सकता है, जो 26 से 29 नवंबर के बीच दक्षिण-मध्य अरब सागर में सक्रिय रह सकता है। यह सिस्टम 25 से 29 नवंबर के बीच उसी क्षेत्र में घूमता रहेगा और बाद में केरल तट के थोड़ा करीब भी आ सकता है। क्योंकि चार दिनों के बाद मॉडल की भविष्यवाणी कमजोर हो जाती है, इसलिए सिस्टम को लगातार निगरानी में रखा जाएगा।

तमिलनाडु और केरल में भारी बारिश का खतरा

तमिलनाडु और केरल के कुछ भागों में अलग–अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।जिसमें कराईकल, रामनाथपुरम, नागपट्टिनम, तूतीकोरिन, टोंडी, पंबन, टूटीकोरिन, नागरकोइल, कन्याकुमारी, कोडाइकनाल, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, कोच्चि, अलप्पुझा और पुनालुर खतरे वाले क्षेत्रों में शामिल हैं।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

दक्षिण भारत के दोनों ओर दो निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हैं—एक कोमोरिन क्षेत्र और दक्षिण–पश्चिम बंगाल की खाड़ी में, जो चक्रवाती परिसंचरण से समर्थित है। दूसरा दक्षिण–पूर्व अरब सागर में बना चक्रवाती परिसंचरण है, जो जल्द ही निम्न दबाव क्षेत्र में बदल सकता है।

दोनों निम्न दबाव क्षेत्रों के संयुक्त प्रभाव से उत्तर–पूर्व मानसून फिर सक्रिय हुआ है। इसी कारण तमिलनाडु, केरल और दक्षिणी तटीय हिस्सों में 36–48 घंटों तक बारिश जारी रहेगी।

तमिलनाडु और केरल के कुछ जिलों में भारी बारिश की आशंका है। इनमें कराईकल, नागपट्टिनम, रामनाथपुरम, तूतीकोरिन, टोंडी, पंबन, नागरकोइल, कन्याकुमारी, कोडाइकनाल, तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, कोच्चि, अलप्पुझा और पुनालुर शामिल हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है