दिल्ली में 2013 के बाद सबसे पहले दस्तक दे सकता है मानसून, लेकिन नहीं होगी तेज बारिश

By: skymet team | Edited By: skymet team
Jun 24, 2025, 12:30 PM
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दिल्ली में बारिश, फोटो: PTI

दक्षिण-पश्चिम मानसून पिछले तीन दिनों से दिल्ली में अपने निर्धारित आगमन की तारीख से चूक रहा है। हालांकि बारिश नहीं हो रही, पर मानसून से जुड़ी बाकी जरूरी स्थितियाँ जैसे हवाओं की दिशा में बदलाव, हवा में नमी का बढ़ना, तापमान में गिरावट और चिपचिपी उमस सभी संकेत दे रही हैं कि मानसून आने ही वाला है। बीते दो दिनों से कुछ इलाकों में हल्की छिटपुट बारिश हुई है, लेकिन इतनी नहीं कि इसे आधिकारिक मानसून की शुरुआत माना जा सके।

दिल्ली में कुछ इलाकों में बौछारें, कुछ जगह सूखा

दिल्ली के बेस स्टेशन सफदरजंग और लोदी रोड में बीते 24 घंटों में लगभग 4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। हालांकि, पालम एयरपोर्ट वेधशाला में बारिश नहीं हुई। यानी बारिश कुछ हिस्सों तक सीमित रही, और इस कारण मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।

दिल्ली में मानसून आगमन की तिथियाँ: 2013 से 2024 तक का रिकॉर्ड

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2019 में देशभर के लिए मानसून की आधिकारिक तिथियों को संशोधित किया गया था। इससे पहले दिल्ली में मानसून के आगमन की तारीख 29 जून मानी जाती थी, जिसे बदलकर 27 जून कर दिया गया। 2013 से लेकर अब तक, 6 बार मानसून निर्धारित तिथि से पहले आ चुका है। सबसे जल्दी मानसून 16 जून 2013 को आया था। यही वो तारीख थी जब उत्तराखंड में भीषण त्रासदी हुई थी और मानसून ने एक ही दिन में देश के बड़े हिस्से को ढक लिया था। 2008 में दिल्ली में मानसून 15 जून को भी आ चुका है, जो सबसे पहले की रिकॉर्ड तिथि मानी जाती है।

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दिल्ली में मानसून लाने वाली मुख्य प्रणाली पूर्वी-पश्चिमी ट्रफ

दिल्ली में मानसून लाने के पीछे प्रमुख कारण होता है, पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाला ट्रफ जो इंडो-गंगेटिक मैदानों (Indo-Gangetic Plains) में बनता है। यह ट्रफ आमतौर पर बंगाल की खाड़ी से उठी मानसूनी प्रणालियों से जुड़ता है और बाद में जमीन के अंदर की ओर बढ़ता है। इस समय, दक्षिणी उत्तर प्रदेश में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जिससे संबंधित एक चक्रवाती परिसंचरण मध्य स्तर तक फैला हुआ है। इसके अलावा पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक और चक्रवाती परिसंचरण विकसित हो रहा है। इन दोनों प्रणालियों को जोड़ता हुआ पूर्व-पश्चिम ट्रफ, इस समय पश्चिमी राजस्थान तक फैला हुआ है।

ट्रफ दिल्ली से दक्षिण की ओर: तेज बारिश की संभावना नहीं

फिलहाल यह ट्रफ दिल्ली से काफ़ी दक्षिण में स्थित है, इसीलिए दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में आज ज़्यादा सक्रिय मौसम प्रणाली के आसार नहीं हैं। हालांकि, ट्रफ की नज़दीकी के चलते दिल्ली में आज बिखरी हुई बौछारें पड़ सकती हैं, जिससे मानसून की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। लेकिन यह शुरुआत कुछ फीकी यानी "damp squib" रह सकती है – यानी तेज मानसूनी बारिश का स्वाद अभी थोड़ा इंतज़ार करवा सकता है।

तेज मानसूनी बौछारें कब आएंगी?

भले ही आज या कल छिटपुट बारिश के बाद मानसून के आगमन की घोषणा हो जाए, लेकिन असली मानसूनी तेज़ बारिश 26 और 27 जून को ही देखने को मिलेगी। 24 और 25 जून के दौरान दिल्ली/एनसीआर में हल्की से मध्यम बारिश संभव है। महीने के बचे हुए दिनों में दिल्ली/एनसीआर में मानसूनी मौसम बना रहेगा और यह बारिश जुलाई की शुरुआत तक भी जारी रह सकती है

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डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

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