Mumbai Rain: मुंबई में मानसून का इंतजार खत्म, 23 जून से तेज होंगी बारिश की गतिविधियाँ, जानें पूरा मौसम पूर्वानुमान
मुख्य मौसम बिंदु
- 23 जून से मुंबई में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना।
- मानसून का आगमन इस बार 12 दिनों से अधिक विलंबित रहा।
- 22 जून तक केवल 32.3 मिमी बारिश दर्ज की गई।
- कोंकण और गोवा में भी वर्षा गतिविधियां तेज होंगी।
- पूर्वानुमान की वैधता: 23 जून से 30 जून तक मान्य
मुंबई में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन का इंतजार अब खत्म होने वाला है। पिछले लगभग तीन सप्ताह से शहर में बारिश की गतिविधियाँ काफी कमजोर बनी हुई थीं, लेकिन अब मौसम की परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं। पश्चिमी तट पर मानसून की प्रगति तेज होने के साथ 23 जून से मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियाँ बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही कोंकण, गोवा और पश्चिमी तट के अन्य हिस्सों में भी मानसून अधिक सक्रिय हो सकता है।
जून में सामान्य से बेहद कम हुई बारिश
मुंबई के सांताक्रूज वेधशाला के आंकड़ों के अनुसार 22 जून तक केवल 32.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो इस समय के सामान्य स्तर से काफी कम है। शहर में पहली मध्यम बारिश 1 जून को हुई थी, जिसमें केवल 13 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके बाद लगभग 20 दिनों तक बारिश लगभग गायब रही। दूसरी बार 21 जून को 19 मिमी बारिश दर्ज की गई। इन दोनों घटनाओं के बीच लंबे समय तक शुष्क मौसम बना रहा, जिससे लोगों को मानसून का इंतजार करना पड़ा।
23 जून को हो सकता है मानसून का आगमन
आमतौर पर मुंबई में मानसून जून के पहले पखवाड़े में पहुँच जाता है, लेकिन इस बार इसका आगमन 12 दिनों से अधिक विलंबित हो चुका है। हालांकि अब अरब सागर और पश्चिमी तट पर मौसम संबंधी परिस्थितियाँ अनुकूल होती जा रही हैं। इसी वजह से 23 जून को मुंबई में मानसून के आधिकारिक आगमन की घोषणा होने की संभावना है। इसके बाद शहर में नियमित बारिश का सिलसिला शुरू हो सकता है, जिससे गर्मी और उमस से राहत मिलेगी।
भारी बारिश नहीं, लेकिन लगातार बरसेंगे बादल
हालांकि मानसून की वापसी के साथ बारिश बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल मुंबई में मानसून के आगमन पर होने वाली अत्यधिक भारी बारिश की संभावना कम दिखाई दे रही है। तीन अंकों वाली वर्षा यानी 100 मिमी से अधिक बारिश की उम्मीद नहीं है। इसके बजाय मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बौछारें देखने को मिल सकती हैं। यह स्थिति मुंबईवासियों के लिए राहत भरी रहेगी क्योंकि अत्यधिक बारिश अक्सर जलभराव, फ्लैश फ्लड, ट्रैफिक जाम और दैनिक जीवन में बड़ी परेशानियाँ पैदा करती है।
अल-नीनो का असर बाकी
इस बीच अल नीनो वॉच अभी भी बनी हुई है और इसका प्रभाव जुलाई तथा अगस्त के दौरान अधिक साफ रूप से दिखाई दे सकता है। जून महीने में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश में लगभग 42 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। अगर मध्य और पूर्वी भारत में जल्द ही अच्छी बारिश नहीं होती है तो यह कमी आगे भी बनी रह सकती है या बढ़ सकती है।
जून के शेष दिनों में मुंबई में रुक-रुक कर अच्छी बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बौछारें देखने को मिल सकती हैं। वहीं मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि इन क्षेत्रों में मानसून की प्रगति धीमी रहने की संभावना है।
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