कमजोर मानसून का असर गहराया, बारिश की कमी 40% तक पहुंची, खेती-किसानी पर मंडराया संकट ?

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jun 22, 2026, 10:00 AM
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मानसून 2026 अपडेट

मुख्य मौसम बिंदु

  • 1 जून से 18 जून 2026 के बीच देशभर में 40% कम बारिश दर्ज की गई।
  • मध्य भारत में 63% और पूर्वोत्तर भारत में 46% बारिश की कमी बनी हुई है।
  • पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिम राजस्थान में हाल के दिनों में बहुत कम बारिश हुई।
  • 25 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनने की संभावना।
  • यह पूर्वानुमान अगले 5-7 दिनों के लिए मान्य है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति इस बार काफी धीमी और सुस्त बनी हुई है। मानसून की उत्तरी सीमा पिछले 7 से 10 दिनों से लगभग एक ही स्थान पर अटकी हुई है। पश्चिमी तट पर यह सीमा हरनाई (कोंकण) तक और पूर्वी भारत में मुजफ्फरपुर (बिहार) तक सीमित बनी हुई है। मानसून की रफ्तार थमने के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की भारी कमी दर्ज की जा रही है। 1 जून से 18 जून 2026 के बीच पूरे देश में औसतन 40% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले लगभग एक सप्ताह तक मानसून में किसी बड़े सुधार की संभावना नहीं है।

मध्य और पूर्वोत्तर भारत सबसे ज्यादा प्रभावित

देश में सबसे अधिक बारिश की कमी मध्य भारत और पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत में दर्ज की गई है। मध्य भारत में अब तक 63% कम बारिश हुई है, जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 46% की कमी बनी हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत, जो अब तक अतिरिक्त बारिश वाला क्षेत्र बना हुआ था, वह भी अब सामान्य से नीचे पहुँच गया है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से बहुत कम बारिश होने के कारण पूरे उत्तर-पश्चिम भारत में कुल बारिश का घाटा 2% तक पहुंच गया है। हालांकि, पश्चिमी विक्षोभों और मैदानी इलाकों में बने प्रेरित परिसंचरण के कारण पहाड़ी क्षेत्रों और आसपास के राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियाँ लगातार बनी रहीं, जिससे जून के पहले पखवाड़े में कुछ क्षेत्रों में बारिश की स्थिति बेहतर रही।

कुछ राज्यों में सामान्य या अधिक बारिश

बारिश की कमी के बीच कुछ उप-विभाग ऐसे भी हैं जहां सामान्य या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गई है। पश्चिम में पूर्वी राजस्थान में 84% अधिक बारिश हुई है, जबकि दक्षिण भारत के रायलसीमा क्षेत्र में 23% अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके अलावा पश्चिम उत्तर प्रदेश में 6% अधिक, सिक्किम और सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 13% कम तथा उत्तर आंतरिक कर्नाटक में 3% कम बारिश दर्ज की गई है, जिसे सामान्य श्रेणी में माना जा रहा है। देश का सबसे अधिक वर्षा वाला राज्य केरल भी अब घाटे की स्थिति के करीब पहुंच गया है और वहां फिलहाल 17% बारिश की कमी दर्ज की जा रही है।

मानसून कमजोर क्यों पड़ा और आगे क्या होगा

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कमजोर मानसून की सबसे बड़ी वजह मानसूनी सिस्टम और ट्रिगर का अभाव है। पश्चिमी तट पर बनने वाली मौसमी ट्रफ सक्रिय नहीं रही और बंगाल की खाड़ी में अब तक कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम विकसित नहीं हो पाया। हालांकि, 25 जून 2026 के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक नया सिस्टम बनने की संभावना जताई जा रही है। यह सिस्टम बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होगा, लेकिन इसके प्रभाव से पूर्वोत्तर भारत, दक्षिण भारत, केरल, तटीय कर्नाटक और गोवा में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। वहीं, अगले सप्ताह उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश की गतिविधियाँ और कमजोर पड़ने के संकेत हैं।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

मानसून कमजोर रहने की मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी में किसी मजबूत मानसूनी सिस्टम का न बनना और पश्चिमी तट की मौसमी ट्रफ का निष्क्रिय रहना है।

मध्य भारत में 63% और पूर्व एवं पूर्वोत्तर भारत में 46% बारिश की सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है।

अगले एक सप्ताह तक बड़े सुधार की संभावना कम है, लेकिन 25 जून के आसपास बनने वाला सिस्टम कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है

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