उत्तराखंड त्रासदी: लगातार हो रही बारिश से बढ़ी मुसीबत, राहत-बचाव कार्य ठप पड़ने का खतरा, इस दिन से हो सकता है मौसम में सुधार
उत्तराखंड में कल भयानक त्रासदी घटी। लगातार बादल फटने और बार-बार भूस्खलन ने राहत व बचाव कार्यों में भारी बाधा डाली। 5 अगस्त की दोपहर में तीन जगह भयंकर बादल फटने की घटनाओं ने विशेषकर उत्तरकाशी जिले के धराली और हरसिल में कहर बरपाया। बादल फटने की घटनाएं धराली, सुखी टॉप और आवाना भुगीयाल में हुईं। हालांकि सुखी टॉप और आवाना भुगीयाल में आबादी कम होने से बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन धराली और हरसिल में जान-माल का भारी नुकसान हुआ। धराली में बाढ़ का पानी इमारतें बहा ले गया, जबकि हरसिल में बाढ़ ने एक सेना शिविर को बहा दिया। धराली में होटल और आवासीय भवन भी क्षतिग्रस्त हुए।
भौगोलिक स्थिति और खतरे की गंभीरता
धराली समुद्र तल से लगभग 8,800 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह उत्तरकाशी और गंगोत्री के बीच, गंगोत्री धाम से 20 किमी पहले और हरसिल से 3 किमी आगे स्थित है। इस इलाके की ढलानें 12,000 फीट तक ऊँची हैं। इतनी ऊँचाई से अचानक बहता पानी बेहद विनाशकारी हो सकता है। इस क्षेत्र में 2018 में भी एक भीषण आपदा आई थी। उत्तराखंड के अन्य हिस्से भी 2013, 2018 और 2021 में ऐसी भयानक घटनाओं का सामना कर चुके हैं।
खराब मौसम और भारी वर्षा
पिछले 24 घंटों से पहाड़ों और तराई में भारी बारिश हो रही है। उत्तरकाशी में लगातार 36 घंटे से बारिश जारी है। उधमसिंह नगर जिले के पंतनगर में पिछले 24 घंटों में 155 मिमी बारिश से जलमग्न हो गया। मुक्तेश्वर में 107 मिमी वर्षा दर्ज की गई। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी 24 घंटे से तेज बारिश हो रही है। मौसम की तीव्र गतिविधि अब कुमाऊं पहाड़ियों से गढ़वाल पहाड़ियों की ओर बढ़ गई है, जिसमें उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी गढ़वाल शामिल हैं।
बचाव कार्यों में कठिनाइयाँ
खराब मौसम के कारण भारतीय वायुसेना के राहत अभियानों में बाधा आएगी, भले ही वे तत्परता की उच्च स्थिति में हों। उड़ान सुरक्षा ऐसे साहसिक अभियानों में सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। लगातार भूस्खलनों ने क्षेत्र को दुर्गम बना दिया है। बोल्डरों ने सड़कों को यहां तक कि मुख्य मार्गों को भी अवरुद्ध कर दिया है। कई जगह राज्य राजमार्ग का बड़ा हिस्सा धंस गया है और दरारें पड़ने से संपर्क बाधित हुआ है। राहत और बचाव कार्य अत्यावश्यक हैं, लेकिन टीमों के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती होगी। कल 7 अगस्त को मौसम में कुछ सुधार की संभावना है, लेकिन भारी बारिश के कारण पहाड़ों की ढलानें नाज़ुक बनी रहेंगी और बार-बार टूट सकती हैं। जल निकाय (झीलें, झरने और नदियाँ) भी मौसम सुधरने के बाद देर तक प्रतिक्रिया करते रहते हैं। इसीलिए अत्यधिक सतर्कता बरतना आवश्यक है।






