Cyclone Alert: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान की संभावना,रास्ता और समय अभी भी अनिश्चित
मुख्य मौसम बिंदु
- लो-प्रेशर सिस्टम स्ट्रेट ऑफ मलक्का–अंडमान सागर में सक्रिय।
- अगले 48 घंटे सिस्टम की दिशा और ताकत के लिए महत्वपूर्ण।
- समुद्री परिस्थितियाँ अनुकूल, लेकिन फिलहाल चक्रवात बनने की संभावना कम।
- बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ने की संभावना, तटीय राज्यों को सतर्क रहना होगा।
लगातार बने चक्रवाती परिसंचरण के असर से स्ट्रेट ऑफ मलक्का (मलक्का जलडमरूमध्य) और आस-पास के अंडमान सागर में एक लो-प्रेशर एरिया बना है। यह सिस्टम अब “वेल-मार्क्ड” हो गया है और इसका सर्कुलेशन ऊपरी वायुमंडल के ऊंचे स्तरों तक फैला हुआ है। यह आगे और मजबूत होकर डिप्रेशन में बदलने और जल्दी ही दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और साउथ अंडमान सागर की ओर बढ़ने की संभावना है।
मौसम मॉडल्स में असहमति, अगले 48 घंटों में स्थिति साफ होगी
विभिन्न मौसम मॉडल्स में इस सिस्टम को लेकर एकमत राय नहीं है। सभी मॉडल्स तूफान बनने की संभावना दिखाते तो हैं, लेकिन इसकी दिशा और गति को लेकर स्पष्टता नहीं है। खासतौर पर बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के पास का क्षेत्र इन दिनों काफी सक्रिय है, जहां लगातार लो-प्रेशर सिस्टम बन रहे हैं। किसी भी सटिक पूर्वानुमान के लिए अभी 48 घंटे और इंतजार करना होगा। उसके बाद सिस्टम थोड़ा ऊपर उठकर और संगठित होकर स्पष्ट संकेत देगा।

तूफान बनने की परिस्थितियाँ अनुकूल
तूफान बनने के लिए स्थितियाँ अभी काफी अनुकूल मानी जा रही हैं। सिस्टम का निचले स्तर का सर्कुलेशन साफ दिखाई दे रहा है और समुद्र व वातावरण दोनों ही इसके मजबूत होने में मदद कर रहे हैं। वर्टिकल विंड शियर यानी हवा की ऊपरी-निचली दिशा में रुकावट कम से मध्यम है, जो तूफान के बनने के लिए अच्छी मानी जाती है। समुद्र की सतह का तापमान भी काफी गर्म है, जिससे सिस्टम को ऊर्जा मिलती रहेगी। इसके अलावा इसे समुद्र में लंबा सफर भी मिलेगा, जिससे इसके और ज्यादा ताकतवर बनने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि, फिलहाल अगले 24 घंटों में इसके चक्रवात में बदलने की संभावना कम ही मानी जा रही है।
पोस्ट-मानसून सीज़न का यह दूसरा तूफान हो सकता है
अगर यह चक्रवात बनता है, तो यह बंगाल की खाड़ी में पोस्ट-मानसून सीज़न 2025 का दूसरा चक्रवाती तूफान होगा। इससे पहले अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में चक्रवात ‘Montha’ आंध्र प्रदेश से टकराया था। तूफान अक्सर अनिश्चित होते हैं क्योंकि वे अपनी दिशा, ताकत और समय को काफी बदलते रहते हैं, खासकर जब वे खुले समुद्र में होते हैं। नवंबर में ऐसे तूफान आमतौर पर मुड़कर बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल की ओर जाते हैं। हालाँकि, कभी-कभी ये तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की तटरेखा पर भी प्रभाव डाल देते हैं। इसी वजह से आने वाले 48 घंटे इस सिस्टम की सही दिशा और ताकत समझने के लिए बेहद अहम होंगे।
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