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[Hindi] मार्च के मध्य तक पश्चिमी हिमालय राज्यों में वर्षा और हिमपात जबकि मैदानी भागों में गरज के साथ वर्षा जारी रहने की संभावना

March 11, 2021 2:16 PM |

सर्दियों के मौसम में आमतौर पर फरवरी महीने में व्यापक संख्या में पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के पहाड़ों पर आते हैं जिनके कारण उत्तर के पर्वतीय राज्यों में कई जगहों पर वर्षा और हिमपात की गतिविधियां देखने को मिलती हैं। लेकिन इस साल फरवरी महीने में उम्मीद से काफी कम संख्या में पश्चिमी विक्षोभ आए और कम वर्षा हिमपात दर्ज की गई। जबकि मार्च महीने की शुरुआत से ही पश्चिमी विक्षोभों की संख्या बढ़ी है और इसके कारण पहाड़ों पर रुक रुक कर वर्षा और हिमपात की गतिविधियां हो रही हैं। 

वर्तमान पश्चिमी विक्षोभ 12 मार्च तक सक्रिय रहेगा और पर्वतीय राज्यों में कश्मीर से लेकर उत्तराखंड तक रुक-रुक कर वर्षा होती रहेगी। इस सिस्टम के बाद आगामी पश्चिमी विक्षोभ 13 मार्च से उत्तर भारत के पहाड़ों पर अपना असर दिखाना शुरू करेगा जो इस समय उत्तरी अफगानिस्तान पर पहुंच गया है। इस सिस्टम के चलते 13 और 14 मार्च को जम्मू कश्मीर, गिलगित-बालटिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कई जगहों पर वर्षा और हिमपात की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

यह सिस्टम मार्च महीने का आखिरी प्रभावी पश्चिमी विक्षोभ हो सकता है। इसके बाद आने वाले मौसमी सिस्टमों के अपेक्षाकृत कमज़ोर रहने की संभावना है। मार्च के मध्य से भी कई मौसमी सिस्टम एक के बाद एक पहाड़ों पर आते रहेंगे लेकिन इन सिस्टर की तुलना में कमजोर रहने के कारण मध्य मार्च के बाद पर्वतीय राज्य पर ज्यादा वर्षा और बर्फबारी की संभावना फिलहाल नहीं रहेगी।

पश्चिम विक्षोभों के प्रभाव से उत्तर भारत के मैदानी इलाकों पर बनने वाले चक्रवाती सिस्टम के कारण पंजाब, हरियाणा, दिल्ली एनसीआर और राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बीते दिनों में वर्ष हुई है। 

उत्तर बात के पहाड़ी राज्यों और मैदानी इलाकों में जिस तरह की संभावना बन रही है उसके चलते उम्मीद कर सकते हैं कि न सिर्फ पहाड़ों पर ही व्यापक वर्षा और हिमपात होगी बल्कि मैदानी क्षेत्र भी प्रभावित होंगे और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में गरज के साथ बौछारें गिरेंगी। उत्तर प्रदेश की प्रभावित होगा। बारिश की गतिविधियां काफी तेज इसलिए भी हो सकती हैं क्योंकि हरियाणा पर एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित होगा और उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य भारत के बीच एक विंड डिस्कंटीन्यूएशन बनेगी। इन सभी मौसमी सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव के कारण मैदानी भागों में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के पूर्वी इलाकों, मध्य प्रदेश के अधिकांश भागों और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में 12 और 13 मार्च तक वर्षा का अनुमान है।

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