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[Hindi] जतिन सिंह, एमडी स्काइमेट: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी में हो रही है देरी, उत्तर-पूर्वी मॉनसून के आगमन में विलंब, दिल्ली वालों को प्रदूषण से कुछ राहत मिलेगी

October 19, 2020 6:35 PM |

दक्षिण पश्चिम मॉनसून उत्तरी भागों से 30 सितंबर को ही लौट गया लेकिन देश के बाकी हिस्सों से मॉनसून 2020 की अभी तक वापसी नहीं हुई है। मॉनसून की वापसी आमतौर पर 15 अक्टूबर तक हो जाती है लेकिन इस बार कई मौसमी सिस्टमों ने इसकी वापसी की राह में बाधा खड़ी की जिससे अब तक देश के कई राज्यों से मॉनसून ने विदाई नहीं ली है। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मॉनसून की वापसी इस महीने के आखिर से पहले होने की संभावना कम है। नतीजतन, उत्तर-पूर्वी मॉनसून के आगमन में भी देरी हो रही है। अब अनुमान है कि उत्तर-पूर्वी मॉनसून अक्टूबर के आरंभ में ही दस्तक देगा।

पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामले धीरे-धीरे बढ़ने लगे हैं। नासा के उपग्रह चित्रों में स्टबल बर्निंग के शुरुआती संकेतों दिखे थे अब इन मामलों में तेज़ी आएगी इसलिए, उत्तर भारतीय राज्यों की सरकारों के साथ-साथ केंद्र सरकार सतर्क होने की आवश्यकता है। खरीफ फसलों की कटाई का काम उत्तर भारत में जल्द खत्म हो जाएगी और रबी फसलों की बुआई के लिए खेतों को खाली करने के क्रम में पराली जलाने की घटनाओं में तेज़ी आना स्वाभाविक है क्योंकि लंबे समय से यही परंपरा बनी रही है।

राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत में वायु प्रदूषण के लिए मौसमी बदलाव एक कारण तो है ही लेकिन पराली से उठने वाला धुआँ भी बड़ा योगदान करता है। पिछले सप्ताह के दौरान दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण की स्थिति हम देख चुके हैं। पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली प्रदूषण का पराली से उठने वाले धुएँ का योगदान 44% था। बाकी का प्रदूषण दिल्ली से उठने वाले वाले प्रदूषक तत्वों से उपजा था। अदालत ने भी मामले में हस्तक्षेप कर प्रदूषण को कम करने के लिए कारगर उपायों के निर्देश दिए हैं। इसके चलते राज्य सरकारों ने भी किसानों को नियमों का उल्लंघन करने के लिए भारी जुर्माने की चेतावनी देने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार की ओर से सब्सिडी के रूप में वित्तीय मदद के अभाव में किसानों ने पराली जलाने की प्रक्रिया जारी रखी है।  किसानों का तर्क है कि फसलों के अवशेष जलने से उन्हें श्रम और उपकरण पर आने वाली लागत की बचत होती है।

फसलों से उठने वाला धुआँ बढ़ने और तापमान होने के कारण गंगा के मैदानी राज्यों पर प्रदूषण की एक मोटी परत बन जाती है और वायु गुणवत्ता में व्यापक गिरावट आती है। अच्छे मॉनसून और वर्तमान मौसमी परिदृश्य को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस साल सर्दियाँ लंबे समय तक चलने वाली हैं। इस साल कोविड महामारी की एक नई चुनौती सामने है। कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन जैसी जहरीली गैसों के उत्सर्जन से COVID-19 रोगियों की स्थिति गंभीर रूप से खराब हो सकती है। प्रदूषण को स्वास्थ्य के लिए गंभीर ख़तरा और चुनौती मानते हुए सरकारी तंत्र को कड़े कदम उठाने पड़ेंगे, इससे पहले कि स्थितियाँ भयावह हो जाएंग।

अरब सागर पर बना डिप्रेशन भारतीय तटों से दूर निकलते हुए कमजोर हो जाएगा। इस सिस्टम के चलते देश के मौसम पर कोई प्रतिकूल प्रभाव की उम्मीद नहीं है। मध्य और दक्षिणी भागों में बेमौसम बारिश इस सप्ताह भी जारी रहने की संभावना है। जैसा कि पिछले सप्ताह के हमने उल्लेख किया था, बंगाल की खाड़ी में 19 अक्टूबर को एक और निम्न दबाव बन रहा है। यह लगभग पूरे सप्ताह तटीय भागों को प्रभावित करेगा।

उत्तर भारत

उत्तर भारत के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में पूरे सप्ताह के दौरान मौसम शुष्क ही बना रहेगा। दिन का तापमान अधिकांश स्थानों पर 33-35 डिग्री के बीच बना रहेगा जबकि रात के तापमान में 1-2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी।

पूर्व और पूर्वोत्तर भारत

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के भागों में इस सप्ताह बारिश होने की संभावना है। सप्ताह के मध्य से गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और मिज़ोरम तथा मणिपुर में बारिश की गतिविधियां बढ़ जाएंगी। सप्ताह के आखिरी दिन पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां और तेज़ हो सकती हैं और उम्मीद है कि अधिकांश पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भारी बारिश देखने को मिलेगी।

मध्य भाग

बंगाल की खाड़ी पर कम दबाव और इस सिस्टम से ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात तक बने विंड शीयर ज़ोन के चलते मध्य भारत में मौसम सक्रिय रहेगा। सप्ताह का पहले भाग में मध्य भारत के सभी राज्यों में छिटपुट जगहों पर गर्जना के साथ बारिश देखने को मिलेगी। सप्ताह के उत्तरार्ध के दौरान, मौसम की गतिविधियां केवल ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक ही सीमित रहेगी। मुंबई में 19 से 21 अक्टूबर के बीच हल्की बारिश होगी।

दक्षिण भारत

19 से 22 अक्टूबर के बीच आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में फिर से भारी बारिश की उम्मीद है। शेष दक्षिणी प्रायद्वीप में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। सप्ताह के अंतिम दो दिन दक्षिण भारत के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ और शुष्क रहने का अनुमान है।

दिल्ली एनसीआर

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हल्की हवा के साथ मंद-मंद हवाओं के साथ सुबह का मौसम बेहद खुशनुमा और शीतल होगा। दिन में आसमान साफ रहेगा जिससे अच्छी धूप बनी रहेगी जबकि रात में तारों की झिलमिलाहट और चाँदनी से रात का नज़ारा खूबसूरत लगेगा। अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 34 डिग्री सेल्सियस और 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।

चेन्नई

चेन्नई में 19 से 22 अक्टूबर के बीच बादल छाए रहने और गर्जना के साथ कुछ स्थानों पर बारिश होने की उम्मीद है। सप्ताह के मध्य से मौसम मुख्यतः साफ हो जाएगा। अधिकतम और न्यूनतम तापमान क्रमशः 33 डिग्री और 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।

दिल्ली प्रदूषण

दिल्ली प्रदूषण पिछले सप्ताह काफी बढ़ गया था। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सहित उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी आर्द्र हवाएँ लगातार चल रहीं थीं। हवा की रफ्तार भी बहुत कम थी। अधिक आर्द्रता और हवाओं की कम रफ्तार के चलते राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में सुबह के समय धुंध घनी होने लगी थी। धुएं और धूल के कण अधिक नमी के कारण निचली सतह पर ही टिके रहते हैं और ऊपर नहीं जा पाते जिससे प्रदूषण बढ़ता है।

अब हवा की दिशा बदली है और उत्तर-पश्चिमी शुष्क हवाएँ दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में चलने लगी हैं। हवा की रफ्तार भी मध्यम है, इसलिए अगले दो दिनों तक प्रदूषण से राहत रहेगी। लेकिन यह उत्तर-पश्चिमी हवाएँ पंजाब और हरियाणा की तरफ आ रही हैं ऐसे में ज़्यादा राहत की उम्मीद नहीं कर सकते क्योंकि पंजाब और हरियाणा में फसलों के जलते अवशेष खासकर पराली का धुआँ भी आ रहा है जिससे अगले 48 घंटों के बाद प्रदूषण फिर से बढ़ जाएगा और वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के आसपास पहुँच जाएगा।

Image credit: Tripsavvy

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