अंडमान सागर में बन सकता है नया निम्न दबाव, ओडिशा-आंध्र तट की ओर बढ़ने के संकेत
मुख्य मौसम बिंदु
- उत्तरी अंडमान सागर में 19 सितंबर की शाम के आसपास निम्न दबाव बनने की संभावना है।
- सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़कर दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर जा सकता है।
- 18 सितंबर को अंडमान-निकोबार में कुछ स्थानों पर 115.6–204.4 मिमी तक बहुत भारी बारिश संभव है।
- 19–22 सितंबर के दौरान ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तेलंगाना में बारिश बढ़ सकती है।
- पूर्वानुमान वैधता: पूर्वानुमान 17–24 सितंबर 2026 के लिए है। सिस्टम अभी बना नहीं है, इसलिए इसके ट्रैक, तीव्रता और बारिश के वितरण में बदलाव संभव है।
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उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर जल्द ही एक नया मौसम सिस्टम विकसित हो सकता है, जो आगे चलकर भारत के पूर्वी तट की ओर बढ़ सकता है। अनुमान है कि 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तरी अंडमान सागर में निम्न दबाव का क्षेत्र बन सकता है। इसके बाद यह सिस्टम धीरे-धीरे मजबूत होते हुए अगले 3 से 4 दिनों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसका संभावित रुख दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों की ओर रहने की संभावना है। हालांकि, अभी निम्न दबाव बना नहीं है, इसलिए इसकी सटीक दिशा, ताकत और बारिश के वितरण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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थाईलैंड से अंडमान सागर की ओर बढ़ रहा चक्रवाती परिसंचरण
16 सितंबर को उत्तरी थाईलैंड के ऊपर एक ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ था। इसके 18 सितंबर की शाम के आसपास उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर पहुंचने की उम्मीद है। चक्रवाती परिसंचरण वायुमंडल में हवाओं के घूमने वाली व्यवस्था होती है। जब ऐसी प्रणाली गर्म उष्णकटिबंधीय समुद्री क्षेत्र के ऊपर पहुंचती है, तो लगातार बन रहे गरज वाले बादल सतही दबाव को कम कर सकते हैं और कई बार यह प्रक्रिया आगे चलकर निम्न दबाव के क्षेत्र के गठन में मदद करती है।
17 सितंबर को 00:00 UTC यानी सुबह 5:30 बजे IST की INSAT-3DS सैटेलाइट तस्वीरों में दक्षिणी बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर, मार्तबान की खाड़ी और टेनासेरिम तट के ऊपर तीव्र से बहुत तीव्र संवहन गतिविधि दिखाई दी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के ऊपर भी मध्यम से तीव्र बादल गतिविधि मौजूद थी। ये सैटेलाइट संकेत बताते हैं कि क्षेत्र में नमी अच्छी है और मौसम सक्रिय है, लेकिन इनसे यह पुष्टि नहीं होती कि सतह पर अनुमानित निम्न दबाव का क्षेत्र बन चुका है।
अंडमान-निकोबार में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा
आने वाले सात दिनों के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। खासकर 18 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है। बहुत भारी बारिश का मतलब 24 घंटे में 115.6 से 204.4 मिलीमीटर बारिश माना जाता है।
अंडमान सागर तथा दक्षिण-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में तेज हवाओं के साथ खराब समुद्री परिस्थितियां भी बन सकती हैं। मछुआरों, फेरी संचालकों और छोटी नावों को ताजा समुद्री चेतावनियों का पालन करना चाहिए। तेज बारिश के कारण कुछ समय के लिए उड़ानों और द्वीपों के बीच फेरी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर जलभराव, कम दृश्यता, पेड़ों की शाखाएं गिरने और केले या पपीते की फसलों को नुकसान की स्थिति बन सकती है।
ओडिशा-आंध्र में बढ़ेगी बारिश, मानसून वापसी के पैटर्न पर भी असर
19 सितंबर के आसपास निम्न दबाव बनने के बाद इसके धीरे-धीरे मजबूत होकर अगले 3 से 4 दिनों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में दक्षिण ओडिशा-उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ने का अनुमान है। ओडिशा में 19 सितंबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। 19 से 22 सितंबर के बीच तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तेलंगाना में भी बारिश का दौर बढ़ने की संभावना है। 20 सितंबर से छत्तीसगढ़ में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
हालांकि, ये व्यापक क्षेत्र के पूर्वानुमान हैं और इन्हें किसी विशेष जिले के लिए निश्चित बारिश की गारंटी नहीं माना जा सकता। सिस्टम के ट्रैक में मामूली बदलाव होने पर सबसे ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र उत्तर या दक्षिण की ओर खिसक सकते हैं। यह संभावित मौसम प्रणाली मानसून की वापसी के बड़े पैटर्न को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे समय में जहां पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी शुरू हो सकती है, वहीं पूर्वी और मध्य भारत में मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर सक्रिय हो सकती हैं।
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यह पूर्वानुमान 17 सितंबर 2026 से अगले 7 दिनों, विशेष रूप से 19–22 सितंबर के दौरान संभावित मौसम गतिविधियों पर आधारित है। निम्न दबाव अभी बना नहीं है, इसलिए इसके बनने के बाद सिस्टम की दिशा और ताकत में बदलाव होने पर बारिश का पूर्वानुमान संशोधित किया जा सकता है।















