पांच साल बाद सितंबर में फिर बंगाल की खाड़ी में तूफान, आंध्र प्रदेश के काकीनाडा-श्रीकाकुलम तट पर लैंडफॉल की आशंका
मुख्य मौसम बिंदु
- भारतीय समुद्रों में चक्रवात का मुख्य सीजन मार्च-मई और अक्टूबर-दिसंबर माना जाता है।
- बंगाल की खाड़ी में सितंबर में करीब पांच साल बाद चक्रवाती तूफान जैसी स्थिति बनी है।
- मौजूदा सिस्टम को राष्ट्रीय मौसम एजेंसी डीप डिप्रेशन, जबकि JTWC और CIMSS ट्रॉपिकल स्टॉर्म 01B के रूप में देख रहे हैं।
- सिस्टम के काकीनाडा और श्रीकाकुलम के बीच, विजयनगरम के पास देर रात लैंडफॉल करने की संभावना है।
- पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 23 से 27 सितंबर 2026 के दौरान चक्रवाती सिस्टम और उससे जुड़े मौसम प्रभावों के लिए मान्य है। सिस्टम की दिशा, गति या तीव्रता में महत्वपूर्ण बदलाव होने पर बारिश और लैंडफॉल के पूर्वानुमान में संशोधन किया जा सकता है।
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भारतीय समुद्रों में चक्रवाती तूफानों के मुख्य रूप से दो सीजन होते हैं। पहला प्री-मानसून सीजन, जो मार्च से मई तक रहता है और दूसरा पोस्ट-मानसून सीजन, जो अक्टूबर से दिसंबर तक माना जाता है। हालांकि, उष्णकटिबंधीय तूफानों (Tropical storms) के बनने के लिए साल में कोई निश्चित सीमा नहीं है और ये किसी भी समय विकसित हो सकते हैं। फिर भी दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान यानी जून से सितंबर के बीच बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफानों का बनना सामान्य नहीं है। अक्टूबर ऐसा महीना है, जब बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ चक्रवाती गतिविधियां बढ़ जाती हैं।
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गौरतलब है अक्टूबर 2025 में भारतीय समुद्रों में शक्ति और मोंथा नाम के दो चक्रवाती तूफान बने थे। इससे पहले अगस्त 2024 में भी अरब सागर में ‘असना’ नाम का तूफान बना था। असना 25 अगस्त से 2 सितंबर 2024 के बीच कच्छ की खाड़ी से होते हुए ओमान-यमन तट की ओर बढ़ा था। समुद्र के ऊपर शुष्क हवा के लगातार मिलने के कारण यह तूफान ओमान-यमन के तट के पास समुद्र में ही कमजोर होकर खत्म हो गया था।

बंगाल की खाड़ी में मौजूदा सिस्टम, सैटेलाइट इमेज
पांच साल बाद सितंबर में बंगाल की खाड़ी में तूफान
बंगाल की खाड़ी में सितंबर महीने में करीब पांच साल बाद कोई चक्रवाती तूफान देखने को मिल रहा है। इससे पहले सितंबर 2021 में ‘गुलाब’ तूफान बना था। गुलाब 26 सितंबर 2021 को बंगाल की खाड़ी के पूर्वी और मध्य हिस्सों से होते हुए तटीय आंध्र प्रदेश तक पहुंचा था। गुलाब की खास बात यह थी कि इसका एक तरह से ‘ट्विन स्टॉर्म’ इतिहास रहा। भारतीय समुद्रों में इस तरह की स्थिति बहुत कम देखने को मिलती है। 24 सितंबर 2021 को म्यांमार के एक तूफान का अवशेष मार्टाबन की खाड़ी से होते हुए बंगाल की खाड़ी के पूर्वी हिस्से में पहुंचा था। इसके बाद यह सिस्टम तेजी से मजबूत होकर चक्रवाती तूफान बन गया। कुछ समय के लिए यह कैटेगरी-1 तूफान तक भी मजबूत हुआ, लेकिन 25 सितंबर को यह फिर कमजोर होकर सामान्य उष्णकटिबंधीय तूफान की स्थिति में आ गया। इसके बाद यह पश्चिम दिशा में बढ़ा और 26 सितंबर को कलिंगपट्टनम के पास आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। लैंडफॉल के बाद यह डिप्रेशन में कमजोर हुआ और आगे चलकर कम दबाव का क्षेत्र बन गया। यह सिस्टम तेलंगाना और विदर्भ से होकर आगे बढ़ा।

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गुलाब के अवशेष से बना था एक और तूफान ‘शाहीन’
तूफान गुलाब के अवशेष 29 सितंबर 2021 को अरब सागर में पहुंच गए थे। समुद्र में पहुंचने के बाद यह सिस्टम तेजी से मजबूत हुआ और एक अन्य चक्रवाती तूफान में बदल गया, जिसका नाम ‘शाहीन’ रखा गया। शाहीन इतना मजबूत हुआ कि इसके केंद्र में एक स्पष्ट आंख (Eye) भी विकसित हो गई थी। यह चक्रवात गुजरात के तट से दूर होता हुआ आगे बढ़ा और बाद में उत्तरी ओमान में लैंडफॉल किया। ओमान और ईरान के आसपास के क्षेत्रों में इस तूफान से काफी नुकसान हुआ था। इस तरह तूफान गुलाब और उसके अवशेषों से बने शाहीन की पूरी प्रक्रिया भारतीय समुद्रों में चक्रवाती सिस्टम के दुर्लभ बदलावों का एक उदाहरण रही है।

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बंगाल की खाड़ी का मौजूदा सिस्टम, आंध्र-ओडिशा में बेहद भारी बारिश
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फिलहाल बंगाल की खाड़ी में एक प्रमुख मौसम प्रणाली विकसित हुई है। राष्ट्रीय मौसम एजेंसी ने इसकी तीव्रता को अभी डीप डिप्रेशन तक ही सीमित रखा है। उसके अनुमान के अनुसार, सिस्टम के उष्णकटिबंधीय तूफान बनने की संभावना कम है और यह डीप डिप्रेशन की स्थिति में ही तट को पार कर सकता है। वहीं JTWC और CIMSS ने इसे उष्णकटिबंधीय तूफान के रूप में अपग्रेड किया है और इसे 01B नाम दिया है। उपलब्ध अनुमान के अनुसार, यह सिस्टम आज 23 सितंबर की देर रात उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश में काकीनाडा और श्रीकाकुलम के बीच, विजयनगरम के आसपास तट पार कर सकता है।
लैंडफॉल के समय तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश के साथ बहुत तेज हवाएं चलने की आशंका है। इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना में अगले करीब चार दिनों तक खराब मौसम बना रह सकता है। इस सप्ताह विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी मौसम खराब रहने तथा बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। लोगों को तेज हवाओं, भारी बारिश और जलभराव जैसी स्थितियों को देखते हुए ज्यादा सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
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