अरब सागर में उठा चक्रवाती तूफान शक्ति, फिलहाल भारतीय तटरेखा पर खतरा नहीं
कच्छ की खाड़ी और आसपास के इलाके में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अरब सागर में पहुँचकर गहरे दबाव में तब्दील हो गया। बीती रात यह और तेज होकर इस साल का पहला चक्रवाती तूफान बन गया है, जिसका नाम श्रीलंका ने ‘शक्ति’ रखा है। यह तूफान फिलहाल कराची से 350 किमी दक्षिण और द्वारका-पोरबंदर से करीब 250 किमी पश्चिम-दक्षिण पश्चिम में केंद्रित है।

तूफान की दिशा और गति
उत्तर की ओर स्थित मज़बूत सब-ट्रॉपिकल रिज (दबाव की दीवार) तूफान को हल्का दक्षिण की ओर धकेलेगी। अगले 48 घंटे तक यह तूफान दक्षिण-दक्षिण पश्चिम की ओर बढ़ेगा और समुद्र के और गहरे हिस्सों में चला जाएगा। इस दौरान इसके और तेज होकर गंभीर चक्रवाती तूफान बनने की संभावना है, जिसमें हवाओं की रफ्तार 90-100 किमी/घंटा से अधिक हो सकती है। रिज कमजोर पड़ने के बाद यह तूफान यू-टर्न लेकर भारतीय तट की ओर लौट भी सकता है।
समुद्र का तापमान और तूफान की ताकत
अरब सागर के इस हिस्से में इस मौसम में समुद्र का तापमान ज़्यादा गर्म नहीं रहता। यह मुश्किल से 26.5°C की सीमा को छू रहा है, जो चक्रवात बनने के लिए न्यूनतम ज़रूरी है। ऐसे में तूफान आगे और मज़बूत नहीं होगा। उल्टी दिशा में लौटते समय इसे तेज़ हवाओं के दबाव (विंड शियर) का सामना करना पड़ेगा, जिससे इसकी ताकत कमजोर पड़ जाएगी। गुजरात तट के नज़दीक आते-आते सूखी हवा और जमीन के घर्षण के कारण इसका असर और घट सकता है।
गुजरात के तट पर क्या होगा असर
अभी इस तूफान से गुजरात के तट पर कोई बड़ा खतरा नहीं है। सौराष्ट्र और कच्छ के पश्चिमी हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होगी, लेकिन तूफान दूर जाते ही बारिश की तीव्रता घट जाएगी। हालांकि, अगले 72 घंटों में स्थिति को दोबारा आंका जाएगा और आगे की रणनीति तय होगी।
सतर्कता और एहतियात ज़रूरी
भले ही तत्काल कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन चक्रवाती तूफानों का रुख और ताकत अक्सर अप्रत्याशित रूप से बदल जाते हैं। इसलिए 48 घंटे बाद फिर से स्थिति की समीक्षा ज़रूरी है। राज्य सरकार और प्रशासन को तैयार रहना चाहिए और अलर्ट की स्थिति में किसी भी समय तुरंत कार्रवाई करने के लिए तैयार रहना होगा।






