म्यांमार तट पार करते ही कमजोर पड़ा बंगाल की खाड़ी का डीप डिप्रेशन, भारत के पूर्वी तट पर टला खतरा
मुख्य मौसम बिंदु
- बंगाल की खाड़ी का गहरा दबाव म्यांमार के तट को पार करने के बाद कमजोर।
- अगले 6-8 घंटों में इसके कम दबाव वाले क्षेत्र में बदलने की संभावना है।
- सिस्टम के अवशेष बांग्लादेश और म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों से होते हुए पूर्वोत्तर भारत की ओर बढ़ सकते हैं।
- मिजोरम और त्रिपुरा में कुछ स्थानों पर बारिश और गरज के साथ बौछारें संभव हैं।
- पूर्वानुमान वैधता: पूर्वानुमान अगले करीब 3 दिनों और सप्ताह के मध्य तक मान्य है, सिस्टम में बदलाव होने पर इसमें संशोधन संभव है।
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कल 28 सितंबर को उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और म्यांमार के तट के पास बना डिप्रेशन गहरे दबाव (Deep Depression) में बदल गया था। इसके बाद यह सिस्टम म्यांमार के तट को पार करते हुए इरावदी डेल्टा (Ayeyarwady Delta) के रास्ते अंदर की ओर बढ़ गया। यह इलाका मार्तबान की खाड़ी के पास स्थित है। जमीन से टकराने के बाद सिस्टम का असर तेजी से कमजोर होने लगा। इसके निचले स्तर का चक्रवाती परिसंचरण भी कमजोर पड़ गया और इसकी पहले दिखाई दे रही मजबूत संरचना धीरे-धीरे बिखरने लगी।
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सैटेलाइट इमेज, Himawari
अगले 6-8 घंटों में और कमजोर होगा डिप्रेशन
अब यह मौसम प्रणाली फिर से डिप्रेशन में कमजोर हो चुकी है और यांगून के उत्तर-पूर्व में म्यांमार के काफी अंदर स्थित है। इसके आगे किसी महत्वपूर्ण सिस्टम में बदलने की संभावना नहीं है। अगले 6 से 8 घंटों में इसके कम दबाव वाले क्षेत्र (Low Pressure Area) में बदलने की संभावना है। इसके बाद यह म्यांमार के कुछ हिस्सों और बांग्लादेश की ओर बढ़ेगा। आगे चलकर इसके अवशेष पूर्वोत्तर भारत के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। इसके कारण मिजोरम और त्रिपुरा में सप्ताह के मध्य के आसपास कुछ स्थानों पर बारिश और गरज के साथ बौछारें देखने को मिल सकती हैं।
पूर्वी तट पर बड़े मौसम बदलाव का खतरा नहीं
यह सिस्टम पूर्वी तट से लगातार दूर जा रहा है और कमजोर भी हो रहा है। इसलिए भारतीय तट पर किसी बड़े मौसम बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि, अगले करीब तीन दिनों तक हल्के बादल और छिटपुट हल्की बारिश जारी रह सकती है। चूंकि कम दबाव का क्षेत्र भारत की मुख्य भूमि से सुरक्षित दूरी पर रहेगा, इसलिए इसका पश्चिमी और मध्य भारत में मानसून की वापसी की प्रक्रिया पर कोई बड़ी रुकावट डालने की संभावना नहीं है। बल्कि अब यह स्थिति मानसून की वापसी को जल्द शुरू होने में मदद कर सकती है। पिछले करीब 10 दिनों में बंगाल की खाड़ी में लगातार बन रहे मौसम सिस्टम को पोस्ट-मानसून सीजन की शुरुआत के साथ भारतीय समुद्री क्षेत्रों में आने वाली अधिक चक्रवाती गतिविधियों के शुरुआती संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।
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