Delhi AQI: गर्मी, ओज़ोन और सूखा मौसम, क्यों अटका दिल्ली का AQI 100 के ऊपर

By: skymet team | Edited By: skymet team
Oct 3, 2025, 5:45 PM
WhatsApp icon
thumbnail image

दिल्ली वायु गुणवत्ता अपडेट, फोटो: AI

सितंबर 2025 में दिल्ली की हवा का मिज़ाज बाकी सालों से अलग रहा। 12 से 29 सितंबर तक लगातार 18 दिन एयर क्वालिटी “मॉडरेट” कैटेगरी (AQI 100–200) में फंसी रही। ये सितंबर में 2016 के बाद सबसे लंबा ऐसा दौर था जब हवा की क्वालिटी न बहुत बिगड़ी, न सुधरी—बस 100 AQI के ऊपर जमी रही। आखिर में मौसम में बदलाव, बारिश और दक्षिण-पूर्वी हवाओं के झोंकों ने इस प्लेटो जैसे हालात को तोड़ा।

बारिश जल्दी थमी, प्रदूषण की सफाई रुक गई

सितंबर के आखिर में मौसम उम्मीद से ज़्यादा सूखा रहा। पूरे महीने में कुल 136.1 मिमी बारिश हुई-जो सामान्य से लगभग 10% ज़्यादा, थीलेकिन बरसात जल्दी खत्म हो गई। आमतौर पर मानसूनी बारिश हवा को साफ करने का काम करती है, लेकिन इस साल मानसून 24 सितंबर को ही विदा हो गया-2002 के बाद सबसे जल्दी। अचानक सूखी परिस्थितियों के कारण रोज़मर्रा के उत्सर्जन (emissions) को धोने के लिए बारिश नहीं थी, जिससे AQI लगातार मॉडरेट स्तर पर टिका रहा।

डेटा में दिखी अनोखी ‘लगातार’ गंदगी

सितंबर का औसत मासिक AQI 104.7 रहा, जो पिछले कुछ सालों जैसा ही था। फर्क इस बार सफाई के ब्रेक की कमी में था। लगभग तीन हफ्ते तक हवा की गुणवत्ता एक बार भी “सैटिस्फैक्ट्री” कैटेगरी में नहीं आई। पुराने रिकॉर्ड बताते हैं कि सितंबर के आखिरी 10 दिन (21–30) ज़्यादातर पहले 10 दिनों से ज़्यादा प्रदूषित होते हैं-2016 के बाद से इन आखिरी दिनों में दो-तिहाई बार AQI 100 से ऊपर गया है, जबकि पहले 10 दिनों में ऐसा करीब आधे मामलों में हुआ।

गर्मी और साफ आसमान ने ‘ओज़ोन’ को बढ़ाया

सितंबर के आखिर में तापमान बढ़ गया। 28 सितंबर को दिल्ली में 38.1°C दर्ज हुआ-दो साल में सबसे गर्म सितंबर दिन। अगले 29 सितंबर को दिन भी तापमान 37.5°C रहा। साफ आसमान और तेज धूप ने फोटो-केमिकल रिएक्शन (रासायनिक प्रतिक्रियाएं जो धूप में होती हैं) को तेज़ किया। ट्रैफिक से निकले नाइट्रोजन ऑक्साइड धूप में बदलकर ग्राउंड-लेवल ओज़ोन बनाने लगे। बारिश और तेज़ हवाओं की कमी से ये ओज़ोन बिखर नहीं पाया और दोपहर में स्तर बढ़ गया, जिससे AQI मॉडरेट पर अटका रहा।

अक्टूबर में बारिश ने दी ‘वातावरण रीसेट’ की राहत

आमतौर पर मानसून के जाने के बाद अक्टूबर में दिल्ली में बारिश बहुत कम होती है-औसतन सिर्फ 14.1 मिमी। लेकिन इस बार अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही 52 मिमी बारिश हो चुकी है। 1 अक्टूबर को 38 मिमी और अगले दिन सुबह 14 मिमी बरसात हुई। इन झमाझम बारिशों और तेज़ हवाओं ने हफ्तों से जमा प्रदूषण को धोकर हवा को ताजा किया।

कई मौसम तंत्रों ने मिलकर बदला खेल

फिलहाल उत्तरी भारत में कई वेदर सिस्टम एक साथ एक्टिव हैं-उत्तर राजस्थान में लो-लेवल साइक्लोनिक सर्कुलेशन, पश्चिम से आ रही वेस्टर्न डिस्टर्बेंस, और बंगाल की खाड़ी व अरब सागर दोनों में डीप डिप्रेशन। इन सबने मिलकर नमी को दिल्ली की तरफ धकेला है। इनके प्रभाव से उत्तर राजस्थान से दक्षिण-पश्चिम यूपी तक एक ट्रफ बनी है जो दिल्ली से होकर गुजर रही है। इसी वजह से छिटपुट बारिश और गरज के साथ बौछारें शुरू हुईं, और 5 से 7 अक्टूबर के बीच ज़्यादा बारिश व तेज़ हवाएं आने की संभावना है-जो प्रदूषण को ऊपर की तरफ मिक्स करके हवा साफ करने में मदद करेगी।

3 अक्टूबर की स्थिति: हवा में ट्रांज़िशन

3 अक्टूबर को दिल्ली में आसमान साफ था, तापमान 25.9°C से 33.9°C के बीच रहा। AQI अभी भी मॉडरेट था लेकिन 13 किमी/घंटा की हल्की हवा और 59% नमी के साथ वेंटिलेशन में सुधार दिखा। सितंबर के लंबे प्लेटो के बाद अब हवा की गुणवत्ता एक ‘ट्रांज़िशनल फेज़’ में है-जहां मॉडरेट से निकलकर मौसम-निर्भर बदलाव दिखने लगे हैं।

18 दिन की मॉडरेट हवा के सेहत पर असर

18 दिन लगातार 101–200 AQI में सांस लेना मामूली बात नहीं। इतने समय तक मॉडरेट प्रदूषण में रहना बच्चों, बुज़ुर्गों और दिल-फेफड़ों के मरीजों के लिए धीरे-धीरे नुकसानदेह होता है। भले ही प्रदूषण बहुत ज़्यादा न हो, लेकिन क्लीन-एयर ब्रेक न मिलने से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाते हैं। अब दिल्ली के लेट-मॉनसून सीजन में ऐसे लंबे मॉडरेट फेज़ आम होते जा रहे हैं।

क्यों अहम है ये ट्रेंड समझना

दिल्ली की सितंबर AQI कहानी बताती है कि हवा की गुणवत्ता सिर्फ उत्सर्जन पर निर्भर नहीं, बल्कि मौसम के पैटर्न पर भी गहराई से जुड़ी है। बारिश का समय, हवा की दिशा, तापमान में उतार-चढ़ाव और वायुमंडलीय रसायन-ये सब मिलकर तय करते हैं हवा कैसी होगी। जैसे-जैसे क्लाइमेट वेरिएबिलिटी (जलवायु की अनिश्चितता) बढ़ रही है और मानसून के पैटर्न बदल रहे हैं, वैसे-वैसे ऐसे “मॉडरेट स्ट्रीक” लंबे होते जा रहे हैं। इसलिए प्रदूषण नियंत्रण नीतियों को मौसम के साथ सिंक में लाना ज़रूरी होता जा रहा है।

author image

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है