अरब सागर में बना दबाव का क्षेत्र, गुजरात-कोंकण में मूसलाधार बारिश के आसार
पिछले 2–3 दिनों से अरब सागर के मध्य भाग में एक दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। यह सिस्टम पहले 22 अक्टूबर को लक्षद्वीप के पास दक्षिण-पूर्व अरब सागर में निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ था। पिछले कुछ दिनों में यह सिस्टम कई दिशाओं में घूमता रहा, लेकिन पश्चिमी तट (वेस्ट कोस्ट) से सुरक्षित दूरी बनाए रखा। वर्तमान में यह 16°N और 67°E के आसपास, पूर्व-मध्य अरब सागर में स्थित है। यह मुंबई और गोवा दोनों से लगभग 600 किमी दूर गहरे समुद्री क्षेत्र में है।
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अरब सागर में बना दबाव, फोटो: CIMSS
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कोस्टल इलाकों में हुई भारी बारिश
पिछले 48 घंटों में यह दबाव क्षेत्र ज़िग-ज़ैग (zig-zag) तरीके से आगे बढ़ा है। अब यह उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ने की संभावना है, हालांकि भारतीय तट से सुरक्षित दूरी पर रहेगा, इसलिए किसी बड़े तूफानी असर की आशंका नहीं है। इसके असर से तटीय कर्नाटक, कोंकण-गोवा और गुजरात के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई है। गोवा, कारवार, होन्नावर और दीव में भारी वर्षा, जबकि मुंबई, दहानू, सूरत, भावनगर, अमरेली, बड़ौदा और गाँधीनगर में मध्यम बारिश हुई है।
अरब सागर में बना दबाव क्षेत्र
अगले 24 घंटे तक बारिश का असर
यह दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटे तक इसी इलाके में घूमता रहेगा, हालांकि इसकी तीव्रता में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। फिर भी यह कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना बनाए रखेगा। उत्तर कोंकण (मुंबई सहित), दक्षिण गुजरात (सूरत सहित) और सौराष्ट्र के कई हिस्सों जैसे भावनगर, वेरावल, माहुवा, अमरेली, दीव, जूनागढ़ और सोमनाथ में तेज बारिश के आसार हैं। बारिश का असर मध्य गुजरात तक फैलेगा, जिससे बड़ौदा, अहमदाबाद, आनँद और गाँधीनगर में भी बारिश जारी रहेगी। यह मौसम गतिविधि अगले 4–5 दिनों तक जारी रहेगी, जिसकी तीव्रता और क्षेत्र समय-समय पर बदलेंगे।
सौराष्ट्र और खंभात की खाड़ी में बढ़ेगा खतरा
जैसे-जैसे यह सिस्टम सौराष्ट्र और खंभात की खाड़ी (Gulf of Cambay) के पास पहुंचेगा, वैसे-वैसे यह सौराष्ट्र के दक्षिणी तटवर्ती जिलों में भारी वर्षा कर सकता है। अगले 48 घंटों में इस सिस्टम की तीव्रता बढ़ सकती है, इसलिए आपदा प्रबंधन एजेंसियों को इस पर करीबी नजर बनाए रखने की आवश्यकता है।
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