राजस्थान में अजमेर से जोधपुर तक बाढ़ जैसी बारिश, फसलों पर जलभराव का खतरा, जानें अपने जिले का हाल

By: skymet team | Edited By: skymet team
Sep 1, 2025, 7:44 PM
WhatsApp icon
thumbnail image

राजस्थान में बाढ़ का खतरा, फोटो: PTI

करीब एक महीने तक सूखे जैसे हालात झेलने के बाद मानसून ने राजस्थान में जोरदार वापसी की है। जुलाई के आखिरी दो हफ्ते और अगस्त के पहले तीन हफ्ते लगभग सूखे रहे, जिससे किसानों को फसल खराब होने का बड़ा खतरा था। अगस्त के तीसरे हफ्ते में पूर्वी जिलों में बौछारें शुरू हुईं, जो चौथे हफ्ते तक पश्चिमी हिस्सों में फैल गईं। पिछले 3-4 दिनों से राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है।

24 घंटे में झमाझम बारिश

बीते 24 घंटों में राजस्थान के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई। बीकानेर में 46 मिमी, चूरू में 37 मिमी, पिलानी में 61 मिमी, सीकर में 53 मिमी, जयपुर में 33 मिमी, अजमेर में 93 मिमी, जोधपुर में 72 मिमी, भीलवाड़ा में 64 मिमी और जैसलमेर में 7 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा 30 अगस्त को गंगानगर, हनुमानगढ़ और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के आसपास भी तेज बारिश रिकॉर्ड की गई। इस सक्रियता से पश्चिम राजस्थान में सीजनल बारिश 66% अधिशेष और पूर्वी राजस्थान में 57% अधिशेष हो गई है। सूखे जैसे हालात से परेशान किसानों को अब राहत मिल रही है।

अगले दिनों का अनुमान

उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर क्षेत्र बन रहा है। यह ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से होते हुए 6 सितम्बर तक दक्षिण-पूर्वी राजस्थान, दक्षिण-पश्चिम एमपी और पूर्वी गुजरात पहुंचेगा। अगले 2-3 दिन में पूर्वी राजस्थान के कोटा, बूंदी, बारां, भीलवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, सवाई माधोपुर, जयपुर, अजमेर) में भारी बारिश होने के आसार हैं। वहीं, 6 से 8 सितम्बर के बीच दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम राजस्थान (जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, सिरोही, पाली) में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

किसानों के लिए राहत और चिंता दोनों

गौरतलब है राजस्थान में हो रही बारिश ने मिट्टी में नमी बढ़ाकर फसलों को बचा लिया है। लेकिन अगर 10 सितम्बर के बाद भी तेज बारिश जारी रही, तो अधिक पानी और जलभराव से खड़ी खरीफ फसलों को नुकसान हो सकता है। वहीं, सितम्बर का पहला आधा हिस्सा राजस्थान के लिए अत्यधिक बरसाती रहने वाला है। यह बारिश जहां किसानों को सूखे से राहत दे रही है, वहीं बाढ़ जैसी स्थिति और जलभराव से फसल नुकसान का खतरा भी बढ़ा सकती है।

author image

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है