उत्तराखंड में झमाझम बारिश का अलर्ट, नैनीताल से पिथौरागढ़ तक भारी बारिश, भूस्खलन का बढ़ा खतरा
पिछले कुछ दिनों में जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। सड़कों और राजमार्गों पर बाढ़, नदियों-नालों का उफान और बांधों से पानी छोड़े जाने से कई इलाकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। हालांकि, इस दौरान उत्तराखंड बड़े संकट से बचा रहा है। लेकिन, अब 28 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच उत्तराखंड में खराब मौसम का दौर शुरू हो सकता है। यह बारिश का सिलसिला अगले हफ्ते के मध्य तक भी जारी रह सकता है।
मौसम के बिगड़ने के कारण
छत्तीसगढ़ और ओडिशा पर बना निम्न दबाव क्षेत्र और उसके साथ चक्रवाती परिसंचरण, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की ओर बढ़ रहा है। यह सिस्टम मानसून ट्रफ से जुड़ा है, जो उत्तराखंड की तराई और निचली पहाड़ियों तक खिंच सकता है। इसके साथ सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ मौसम को और ज्यादा ताकत देगा, जिससे भारी बारिश का दायरा और असर दोनों बढ़ेंगे।
कुमाऊं क्षेत्र सबसे ज्यादा संवेदनशील
उत्तराखंड के पूर्वी हिस्से कुमाऊं मंडल में ज्यादा खतरा रहेगा। तराई और निचली पहाड़ियों (7000 फीट से नीचे) पर असर गहरा होगा। पंतनगर में बीते 24 घंटे में 113 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है। लेकिन रुद्रपुर, उधमसिंहनगर, सितारगंज, काशीपुर और पंतनगर खतरे वाले क्षेत्रों में शामिल हैं।
मध्य पहाड़ियों पर भी असर
चंपावत, बागेश्वर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली और मुक्तेश्वर जैसे जिलों में भी खराब मौसम का असर दिखेगा। बारिश थमने के बाद भी यहां भूस्खलन, मिट्टी-धसाव और पत्थरों के गिरने का खतरा बना रहेगा।
गढ़वाल में भी सावधानी जरूरी
भले ही कुमाऊं पर ज्यादा असर पड़ेगा, लेकिन गढ़वाल क्षेत्र भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। यहां भी लोगों को सतर्क रहना होगा। बारिश और बाढ़ से जुड़े खतरे स्थानीय लोगों और पर्यटकों, दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।





