Monsoon 2026 Update: केरल में तय तारीख पर नहीं पहुंचा मानसून, 3-4 दिन और इंतजार! क्या इस बार बदल जाएगा बारिश का समीकरण?

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jun 1, 2026, 4:00 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून की सामान्य तिथि पर केरल नहीं पहुंच पाया।
  • मानसून फिलहाल मालदीव और कोमोरिन क्षेत्र के आसपास सक्रिय है।
  • अगले 3 से 4 दिनों में केरल में मानसून के प्रवेश की संभावना है।
  • मानसून के आगे बढ़ने की गति फिलहाल सामान्य से धीमी रहने के संकेत हैं।

दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष केरल में अपनी सामान्य आगमन तिथि 1 जून को नहीं पहुंच पाया। हालांकि मानसून ने 16 मई 2026 को अंडमान सागर और दक्षिण श्रीलंका में समय से पहले दस्तक दे दी थी, जिससे उम्मीद की जा रही थी कि यह जल्दी ही केरल पहुंच जाएगा। लेकिन शुरुआती तेजी के बाद मानसून की प्रगति काफी धीमी पड़ गई।

सामान्य परिस्थितियों में अंडमान क्षेत्र से केरल पहुंचने में मानसून को लगभग एक सप्ताह का समय लगता है, लेकिन इस बार मानसूनी धाराएं अभी भी मुख्य भूमि भारत में प्रवेश के लिए संघर्ष कर रही हैं। फिलहाल कमजोर मानसूनी प्रवाह मालदीव और कोमोरिन क्षेत्र (कन्याकुमारी के आसपास का समुद्री क्षेत्र) तक ही सीमित है और श्रीलंका तथा दक्षिण भारत के सुदूर हिस्सों में फैलने का इंतजार कर रहा है।

मानसून की आधिकारिक बारिश की गणना आज से शुरू

भले ही मानसून अभी केरल नहीं पहुंचा हो, लेकिन देश में मानसूनी वर्षा की आधिकारिक मौसमी गणना आज यानी 1 जून से शुरू हो चुकी है। मौसम विज्ञान में 24 घंटे के दौरान सुबह 8:30 बजे तक दर्ज हुई वर्षा को संबंधित दिन की वर्षा माना जाता है। इसलिए आज सुबह 8:30 बजे तक हुई बारिश को 1 जून 2026 की वर्षा के रूप में दर्ज किया जाएगा।

मानसूनी मौसम की यह गणना 30 सितंबर तक जारी रहती है। इसके बाद भी यदि देश के कुछ हिस्सों में मानसूनी बारिश जारी रहती है, तो उसे आधिकारिक मानसून सीजन की गणना में शामिल नहीं किया जाता। यानी भारत में मानसून का मौसम कैलेंडर के अनुसार 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है।

पिछले 10 वर्षों में कभी जल्दी तो कभी देर से पहुंचा मानसून

पिछले एक दशक के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो मानसून के आगमन का समय हर वर्ष अलग-अलग रहा है। पिछले वर्ष मानसून ने 24 मई को ही केरल में दस्तक देकर सामान्य तिथि से काफी पहले आगमन किया था। वहीं 2016, 2019 और 2023 में मानसून ने 8 जून को केरल पहुंचकर सामान्य तिथि से लगभग एक सप्ताह की देरी की थी। हालांकि अच्छी बात यह है कि पिछले दस वर्षों में मानसून का आगमन सामान्य तिथि से लगभग एक सप्ताह के भीतर ही रहा है। यानी मानसून ने अपने औसत समय से बहुत अधिक विचलन नहीं दिखाया, जो मौसम विज्ञान के लिहाज से एक संतुलित रिकॉर्ड माना जाता है।

बादल और हवाएं अभी नहीं दे रहीं मानसून जैसे संकेत

मानसून के आधिकारिक आगमन के लिए केवल बारिश होना पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए बादलों की संरचना, हवाओं की दिशा और उनकी निरंतरता भी मानसून के मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। मानसूनी हवाएं आमतौर पर एक स्थिर और मजबूत प्रवाह के रूप में विकसित होती हैं तथा इनके साथ विशेष प्रकार के घने बादलों का समूह भी मौजूद रहता है।

लेकिन वर्तमान समय में दक्षिण-पूर्व अरब सागर, कोमोरिन क्षेत्र और मालदीव के आसपास मौजूद बादलों का समूह पूरी तरह मानसूनी बादलों जैसा नहीं दिख रहा है। हालांकि कुछ मौसम संकेत बताते हैं कि अगले 3 से 4 दिनों में मानसून भारतीय मुख्य भूमि तक पहुंच सकता है, लेकिन इसके लिए उसे कुछ मानक परिस्थितियों से समझौता करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून अगले कुछ दिनों में केरल पहुंच भी जाता है, तब भी उसके लिए दक्षिण भारत के अंदरूनी इलाकों में तेजी से आगे बढ़ना आसान नहीं होगा। यानी मानसून की रफ्तार और विस्तार दोनों ही फिलहाल सामान्य से कमजोर बने रहने की संभावना है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

हां, मानसून 1 जून की सामान्य तिथि को केरल नहीं पहुंच पाया है और इसमें हल्की देरी हो रही है।

मानसून का कमजोर प्रवाह फिलहाल मालदीव और कोमोरिन क्षेत्र के आसपास बना हुआ है।

मौसम संकेतों के अनुसार अगले 3 से 4 दिनों में मानसून केरल में प्रवेश कर सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है