उत्तराखंड-हिमाचल में 5 जून तक बारिश-बिजली और ओलावृष्टि का खतरा, यात्रा से पहले जानें ताजा मौसम अपडेट

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jun 1, 2026, 1:45 PM
WhatsApp icon
thumbnail image

उत्तर भारत के पर्वतीय इलाकों में खराब मौसम

मुख्य मौसम बिंदु

  • 3 से 5 जून के बीच उत्तराखंड में मौसम सबसे अधिक खराब रहने की संभावना है।
  • गढ़वाल और कुमाऊं के निचले तथा मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक बारिश हो सकती है
  • गरज-चमक, आकाशीय बिजली और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि का खतरा बना रहेगा।
  • 7 जून से मौसम साफ होने और चारधाम यात्रा के लिए बेहतर परिस्थितियां बनने की उम्मीद है।

उत्तराखंड में हाल ही में खराब मौसम के कारण चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। हालांकि, अब पश्चिमी विक्षोभ के आगे बढ़ जाने से आज और कल मौसम की स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है। लेकिन यह राहत ज्यादा लंबे समय तक नहीं रहने वाली है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 3 जून से एक नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्रों में प्रवेश करेगा, जिसके प्रभाव से 3 से 6 जून के बीच उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों में फिर से बारिश और खराब मौसम का दौर शुरू हो जाएगा।

हालांकि, 6 जून से मौसम में धीरे-धीरे सुधार शुरू होने की संभावना है और 7 से 11 जून तक मौसम सामान्यतः अनुकूल बना रह सकता है। इसके बावजूद यात्रियों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम साफ होने के बाद भी भूस्खलन, पत्थर गिरने और रास्तों के अवरुद्ध होने जैसी समस्याएं अगले 24 घंटे तक बनी रह सकती हैं।

प्री-मानसून सीजन में कहां कितनी बारिश हुई?

1 मार्च से 31 मई 2026 के बीच के प्री-मानसून सीजन में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में सामान्य से 28 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। वहीं हिमाचल प्रदेश में वर्षा की कमी अपेक्षाकृत कम रही और यहां 10 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। दूसरी ओर उत्तराखंड में इस अवधि के दौरान सामान्य से 28 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन पहाड़ी राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है। खासकर उत्तराखंड में भारी बारिश, भूस्खलन और मौसम जनित आपदाओं का खतरा अधिक रहने की आशंका है।

4 और 5 जून को उत्तराखंड में सबसे ज्यादा असर

नया पश्चिमी विक्षोभ 3 जून की देर शाम या रात तक पहाड़ों पर पहुंचेगा। इसके बाद 4 और 5 जून को मौसम गतिविधियाँ सबसे ज्यादा सक्रिय रहेंगी। उत्तराखंड इस पूरे मौसम तंत्र से सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहेगा।

गढ़वाल और कुमाऊं मंडल दोनों में, विशेष रूप से निचले और मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर बारिश और गरज-चमक की गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं। इन इलाकों में भारी गरज-चमक वाले तूफान, आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं तथा कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने की भी प्रबल संभावना है।

हिमाचल प्रदेश में भी कई स्थानों पर बारिश, गरज-चमक और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं। हालांकि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का क्षेत्र इस बार बेहतर स्थिति में रहेगा। यहां हल्की बारिश और बौछारें तो होंगी, लेकिन मौसम की तीव्रता कम रहने की संभावना है और ओलावृष्टि का खतरा भी बहुत कम रहेगा।

3 से 5 जून तक पहाड़ी पर्यटन से बचने की सलाह

मौसम विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अन्य पर्वतीय क्षेत्रों के प्रमुख पर्यटन स्थलों की यात्रा 3 जून से 5 जून के बीच टाल देना बेहतर होगा। इस दौरान भारी बारिश, बिजली गिरने, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण यात्रा में बाधाएं आ सकती हैं। 6 जून से मौसम में सुधार शुरू हो जाएगा और 7 जून, रविवार तक अधिकांश क्षेत्रों में रूप से मौसम साफ होने की संभावना है। इसके बाद अगले सप्ताह के मध्य तक यानी 11 जून तक मौसम सामान्य और यात्रा के लिए अनुकूल बना रह सकता है। इसलिए चारधाम यात्रा या पहाड़ी पर्यटन की योजना बनाने वाले लोगों के लिए 7 जून के बाद का समय अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक रहने की उम्मीद है।

author image
AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

6 जून से मौसम में सुधार शुरू होगा और 7 जून के बाद परिस्थितियां अधिक अनुकूल रहने की संभावना है।

उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल, विशेषकर निचले और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का सबसे अधिक प्रभाव रहेगा।

हां, 3 से 5 जून के बीच पहाड़ी पर्यटन और लंबी यात्राओं से बचने की सलाह दी गई है क्योंकि भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा रहेगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है