पश्चिमी तट पर सुस्त पड़ा मानसून, मुंबई समेत कई इलाकों में बारिश का इंतजार बढ़ा, जानें अगले 7 दिन का मौसम
मुख्य मौसम बिंदु
- पश्चिमी भारत में मानसून की प्रगति पिछले 7 दिनों से लगभग थमी।
- बंगाल की खाड़ी में कोई लो प्रेशर एरिया या डिप्रेशन नहीं बन रहा है।
- मुंबई, कोंकण और गोवा में भारी बारिश के लिए अभी 7-8 दिन और इंतजार ।
- पश्चिमी तट पर केवल हल्की बारिश होने की संभावना है।
देश के पश्चिमी हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल काफी धीमी बनी हुई है। मानसून ने 4 जून को केरल में दस्तक दी थी, जो सामान्य तिथि 1 जून से चार दिन देरी से था। शुरुआत में इसकी प्रगति संतोषजनक रही, 8 जून तक मानसून दक्षिण कोंकण और गोवा के साथ-साथ दक्षिण मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों तक पहुंच गया था। लेकिन 8 जून के बाद से मानसून की पश्चिमी शाखा लगभग ठहर सी गई है। पिछले सात दिनों में पश्चिमी तट पर मानसून में कोई खास बढ़त देखने को नहीं मिली। वहीं दूसरी ओर मानसून की पूर्वी शाखा ने थोड़ी प्रगति दिखाई और 15 जून को ओडिशा, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों तक आगे बढ़ गई।
सामान्य परिस्थितियों में जून के मध्य तक मानसून दक्षिण गुजरात, महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों, दक्षिण मध्य प्रदेश और लगभग आधे छत्तीसगढ़ तक पहुंच जाता है। इससे साफ है कि पूर्वी भारत में मानसून लगभग समय पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन मध्य और पश्चिमी भारत में इसकी चाल धीमी बनी हुई है।
बंगाल की खाड़ी में सिस्टम न बनने से असर
मानसून की इस सुस्ती की सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी में किसी मजबूत मौसम प्रणाली का न बनना है। फिलहाल बंगाल की खाड़ी शांत बनी हुई है और अगले कई दिनों तक किसी लो प्रेशर एरिया या डिप्रेशन के बनने की संभावना भी नजर नहीं आ रही है। आमतौर पर मध्य बंगाल की खाड़ी में बनने वाला लो प्रेशर एरिया या डिप्रेशन अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाओं को मजबूती देता है। इससे महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक तक मानसून तेजी से आगे बढ़ता है और पश्चिमी तट पर सक्रिय बारिश शुरू हो जाती है। ऐसी मौसम प्रणालियाँ अक्सर पश्चिमी तट पर मानसून को सक्रिय कर देती हैं और भारी बारिश का दौर शुरू हो जाता है। लेकिन फिलहाल मौसम मॉडल अगले एक सप्ताह तक बंगाल की खाड़ी में किसी बड़े सिस्टम के बनने के संकेत नहीं दे रहे हैं।
मुंबई, कोंकण और गोवा को करना पड़ सकता है इंतजार
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मुंबई, कोंकण और गोवा समेत पश्चिमी तट के अधिकांश हिस्सों को अभी कम से कम 7 से 8 दिनों तक और इंतजार करना पड़ सकता है। इस दौरान मानसून के आगे बढ़ने और लगातार मध्यम से भारी बारिश शुरू होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। जब तक कोई मजबूत मौसम प्रणाली विकसित नहीं होती, तब तक पश्चिमी तट पर बारिश की गतिविधियां बिखरी हुई और रुक-रुक कर जारी रहेंगी। फिलहाल भारी बारिश वाले सिस्टम की संभावना नहीं है। इसका असर खासकर मुंबई और आसपास के इलाकों में महसूस किया जा सकता है, जहां लोग मानसून की तेज बारिश का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि हल्की से मध्यम बारिश बीच-बीच में जारी रह सकती है, लेकिन फिलहाल लंबे और लगातार बारिश वाले दौर के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
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