Monsoon Update: सितंबर में घट सकती है बारिश, जून-जुलाई-अगस्त जितना नहीं बरसेंगे मेघ
दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार उम्मीद से बेहतर रहा है। जून, जुलाई और अगस्त तीनों महीनों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई। जून में 109%, जुलाई और अगस्त में 105% बारिश लंबी अवधि के औसत (LPA) के मुकाबले दर्ज की गई। ऐसा संयोग बहुत कम देखने को मिलता है, पिछली बार 2007 में ऐसा हुआ था।
सितंबर का औसत और शुरुआती प्रदर्शन
सितंबर में औसतन 167.9 मिमी बारिश होती है। यानी प्रतिदिन करीब 5–6 मिमी बारिश की जरूरत रहती है ताकि औसत पूरा हो सके। महीने की शुरुआत (पहले तीन दिन) में ही अच्छी बारिश दर्ज हुई है और कुल बारिश औसत से काफी अधिक रही। उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर की वजह से अगले सात दिनों तक मध्य और पश्चिमी भारत में अच्छी बारिश जारी रहेगी। हालांकि, दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर भारत में बारिश की कमी बनी रह सकती है।
सितंबर में कमजोर रहते हैं सिस्टम
सितंबर के महीने में मानसून सिस्टम जून–अगस्त जितने मजबूत नहीं होते। चूंकि यह मानसून वापसी का महीना है, इसलिए सिस्टम की दिशा और असर भी अलग रहता है। मौजूदा सिस्टम के कमजोर पड़ने के बाद बारिश की गतिविधि भी धीरे-धीरे घटेगी। यही कारण है कि सितंबर का मौसम जुलाई और अगस्त जैसा स्थिर नहीं रहता।
सितंबर का उतार-चढ़ाव और 2025 की तस्वीर
पिछले रिकार्ड बताते हैं कि सितंबर का बारिश पैटर्न काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। 2018 से 2024 के बीच सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई, लेकिन 2015 से 2018 के बीच बारिश सामान्य से काफी कम रही। इस बार सितंबर का पहला पखवाड़ा औसत से बेहतर रह सकता है, लेकिन दूसरा हिस्सा उतना अच्छा नहीं रहेगा। इसके बावजूद, मानसून 2025 सीजन का समापन संतोषजनक होगा और कुल बारिश 100% LPA से कहीं अधिक दर्ज की जाएगी।
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