दक्षिण-पश्चिम मानसून अंतिम चरण में, जल्द पूरी हो सकती है देश से विदाई, उत्तर-पूर्वी मानसून का इंतजार
मुख्य मौसम बिंदु
- दक्षिण-पश्चिम मानसून गोवा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के शेष हिस्सों से विदा हो चुका है।
- कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से मानसून की वापसी लगभग पूरी।
- 15 अक्टूबर तक पूरे देश से मानसून की विदाई संभव है, ऐसा 2019 और 2024 में भी हुआ था।
- बंगाल की खाड़ी में अगले 24 घंटों में कम दबाव का क्षेत्र बनने से दक्षिण भारत में बारिश बढ़ सकती है।
- पूर्वानुमान वैधता: 15 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी और उत्तर-पूर्वी मानसून के संभावित आगमन पर नजर रहेगी।
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दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी आगे बढ़ गई है। यह गोवा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के बाकी बचे हिस्सों से भी विदा हो चुका है। वहीं, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल से इसकी वापसी लगभग पूरी हो चुकी है। असम और मेघालय से भी मानसून की वापसी शुरू हो गई है। मौजूदा मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए उम्मीद है कि 15 अक्टूबर 2026 तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश से विदा हो सकता है। ऐसा होने पर यह मानसून की सबसे शुरुआती वापसी की घटनाओं में से एक होगी। इससे पहले 2019 और 2024 में भी मानसून की पूरी तरह वापसी 15 अक्टूबर को हुई थी। पिछले साल यानी 2025 में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 16 अक्टूबर को देश से विदाई ली थी। इस तरह, इस साल मानसून की वापसी पिछले साल के मुकाबले एक दिन पहले पूरी हो सकती है।
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बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी पूरी होने के बाद उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन का रास्ता साफ हो जाएगा। वास्तव में, उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत से पहले ही दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय हिस्सों में बारिश होने लगी है। अगले 24 घंटों के दौरान बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह मौसमी सिस्टम दक्षिण भारत के विभिन्न क्षेत्रों में उत्तर-पूर्वी मानसून से जुड़ी बारिश को और मजबूत कर सकता है। हालांकि, उत्तर-पूर्वी मानसून के आधिकारिक आगमन के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून की देश से पूरी तरह वापसी होना जरूरी है। कुछ परिस्थितियों में दोनों घटनाएं एक ही दिन हो सकती हैं, यानी दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई और उत्तर-पूर्वी मानसून का आगमन साथ-साथ हो सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है। वर्ष 2024 और 2025 में दोनों मौसमी घटनाएं एक ही दिन हुई थीं। इस साल भी परिस्थितियां 15 अक्टूबर 2026 को इन दोनों घटनाओं के एक साथ होने के अनुकूल बन रही हैं।
मानसून की विदाई का मतलब बारिश पूरी तरह बंद होना नहीं
दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी का यह मतलब नहीं है कि संबंधित क्षेत्रों में बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। इसी तरह, उत्तर-पूर्वी मानसून के आगमन का अर्थ यह भी नहीं है कि दक्षिण भारत में लगातार बारिश होती रहेगी। दोनों मौसमी चरणों का मतलब केवल बारिश के एक नए पैटर्न की शुरुआत है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी एक निर्धारित मौसमी प्रक्रिया है, जबकि उत्तर-पूर्वी मानसून का दक्षिण भारत में आगमन खासकर कृषि क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद लेकर आता है। उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश तमिलनाडु और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अन्य हिस्सों में खेती तथा जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण होती है। इस साल प्रशांत महासागर में अल नीनो की परिस्थितियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद मौजूदा अनुमान के अनुसार उत्तर-पूर्वी मानसून का मौसम सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश वाला रह सकता है। हालांकि, पूरे मौसम में बारिश का वास्तविक वितरण और मात्रा बदल सकती है, इसलिए आगे के पूर्वानुमानों पर नजर रखना जरूरी होगा।
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