लोहड़ी के साथ बदलेगा मौसम का रुख: सूर्य की उत्तरायण यात्रा से दिन बढ़ेंगे, ठंड अभी रहेगी कायम

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jan 13, 2026, 3:18 PM
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सूर्य की दिशा बदली, अब दिन होंगे लंबे

मुख्य मौसम बिंदु

  • लोहड़ी आमतौर पर 13 जनवरी को मनाई जाती है
  • मकर संक्रांति से सूर्य की उत्तरायण यात्रा शुरू होती है
  • दिन की अवधि बढ़ने लगती है, पर ठंड तुरंत कम नहीं होती
  • पोंगल और बिहू भी इसी ऋतु परिवर्तन से जुड़े पर्व हैं

लोहड़ी का त्योहार उत्तर भारत में खास तौर पर लोकप्रिय है, आमतौर पर 13 जनवरी को मनाया जाता है (हालाँकि कुछ अपवाद भी होते हैं)। इसी दिन सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में अपनी सबसे दक्षिणी स्थिति पर पहुंचता है और मकर रेखा (Tropic of Capricorn) के ऊपर स्थित होता है। उत्तरी गोलार्ध में इसका समकक्ष कर्क रेखा (Tropic of Cancer) है। मकर रेखा वह अक्षांश रेखा है जहाँ सूर्य को सीधे सिर के ऊपर देखा जा सकता है। यह पृथ्वी की पाँच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक है, जिसकी वर्तमान स्थिति भूमध्य रेखा से 23°26′09″ (23.43591°) दक्षिण में है।

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मकर संक्रांति और सूर्य की उत्तरायण यात्रा की शुरुआत

मकर संक्रांति उस दिन को दर्शाती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी के साथ सूर्य की उत्तरायण यात्रा शुरू होती है। इसका सीधा प्रभाव यह होता है कि उत्तरी गोलार्ध में दिन की अवधि धीरे-धीरे बढ़ने लगती है। दिन और रात की अवधि पूरी तरह बराबर वसंत विषुव (Spring Equinox) के दिन होती है, जो वर्ष 2026 में 20 मार्च को रात 8:15 बजे (IST) होगा। इस दिन सूर्य ठीक भूमध्य रेखा के ऊपर होता है। साथ ही, मौसम की गतिविधियों का केंद्र मानी जाने वाली इंटर ट्रॉपिकल कन्वर्जेंस ज़ोन (ITCZ) भी उत्तर की ओर, भूमध्य रेखा की दिशा में खिसकने लगती है।

उत्तरायण के बावजूद ठंड में तुरंत राहत नहीं

सूर्य की उत्तर की ओर गति शुरू होने के साथ आम तौर पर माना जाता है कि उत्तरी गोलार्ध में भीषण ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है। लेकिन जलवायु पैटर्न में आए बदलावों के कारण ऐसा तुरंत नहीं होता और देश के उत्तरी हिस्सों में ठंड कुछ समय तक बनी रह सकती है। लोहड़ी का पर्व इस बात का प्रतीक है कि मुख्य फसलें कटाई के लिए तैयार हो रही हैं। मकर संक्रांति, उत्तरायण, बिहू और पोंगल—देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग नामों से मनाए जाने वाले ये सभी पर्व एक ही भावना, यानी नई ऋतु और फसल के स्वागत को दर्शाते हैं।

मकर संक्रांति की तारीख को लेकर भ्रम और क्षेत्रीय पर्व

मकर संक्रांति की तारीख को लेकर अक्सर भ्रम बना रहता है। यह पर्व कभी-कभी 15 जनवरी तक भी खिसक जाता है। इस बार सरकार द्वारा घोषित राजपत्रित अवकाश 15 जनवरी कर दिया गया है। हालांकि पंचांग के अनुसार, धार्मिक अनुष्ठान और परंपराएँ मुख्य रूप से 14 जनवरी 2026 को ही होंगी। दक्षिण भारत में तमिल समुदाय पोंगल को बड़े उत्साह से फसल उत्सव के रूप में मनाता है। वहीं, बिहू उत्तर-पूर्व भारत का प्रमुख त्योहार है, जो मौसम परिवर्तन और असमिया नववर्ष का प्रतीक माना जाता है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और उसकी उत्तरायण यात्रा शुरू होती है, जिससे दिन लंबे होने लगते हैं।

जलवायु पैटर्न में बदलाव के कारण ठंड धीरे-धीरे कम होती है, तुरंत नहीं।

सूर्य की स्थिति और पंचांग गणना के कारण यह पर्व 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है