बंगाल की खाड़ी में तेज हो रहा चक्रवात “सेनयार”,दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ की संभावना
मुख्य मौसम बिंदु
- बंगाल की खाड़ी में बन रहा सिस्टम चक्रवात सेनयार’ बनने की कगार पर।
- 25–30 नवंबर तक दक्षिण भारत में भारी बारिश और जलभराव का खतरा।
- स्कूल बंद, यातायात बाधित और तटीय क्षेत्रों में सतर्कता सलाह।
- अगले 48 घंटे में ट्रैक, ताकत और लैंडफॉल को लेकर तस्वीर साफ होगी।
बंगाल की खाड़ी में तेजी से मजबूत हो रहा मौसमीय तंत्र जल्द ही चक्रवात ‘सेनयार’ बन सकता है, जो इस पोस्ट-मानसून सीज़न का दूसरा शक्तिशाली तूफान होगा। यह सिस्टम स्ट्रेट ऑफ मलक्का (मलक्का जलडमरूमध्य)) और दक्षिण अंडमान सागर में बने लो-प्रेशर एरिया के रूप में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह कई वायुमंडलीय स्तरों में बनते गहरे चक्रवाती परिसंचरण में बदल चुका है। जैसे-जैसे यह पश्चिम-उत्तरी दिशा में दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है, गर्म समुद्री पानी और अनुकूल मौसम स्थितियाँ इसके और तेज होने में मदद कर रही हैं।

दक्षिणी राज्यों में भारी बारिश, Himawari Image
‘सेनयार’ नाम कहां से आया?
जैसे ही यह सिस्टम चक्रवाती तूफ़ान में बदलेगा, इसका नाम ‘Senyar’ रखा जाएगा। यह नाम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा उत्तर हिंद महासागर के नामकरण सूची में दिया गया है। यह तूफ़ान अक्टूबर में आए चक्रवात ‘मोंथा’ के तुरंत बाद बन रहा है, जो इस सीज़न में असामान्य रूप से अधिक गतिविधि को दर्शाता है। यह क्षेत्र इस पोस्ट-मानसून सीज़न में काफी सक्रिय दिखाई दे रहा है।

चक्रवात "सेनयार" तीव्र हो रहा है
सेनयार का मार्ग—क्या इसकी दिशा तय हो गई है?
फिलहाल पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। मौसम मॉडल दो संभावित रास्ते दिखा रहे हैं, पहला यह 29–30 नवंबर के आसपास तमिलनाडु या आंध्र प्रदेश के तट से होकर गुजर सकता है। दूसरा, यह उत्तर की ओर मुड़कर समुद्र में ही बना रहे और धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाएगा। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले तूफानों का मार्ग अक्सर ऊपरी हवाओं में छोटे बदलावों से प्रभावित होता है, इसलिए यह अनिश्चितता सामान्य है। अगले 48 घंटों में ट्रैक अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।
कहाँ-कहाँ होगी भारी बारिश—मुख्य बारिश क्षेत्र
25 नवंबर से सिस्टम के संगठित होने के साथ कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में 25–29 नवंबर तक भारी बारिश, गर्जना और 40–50 किमी/घंटा की हवाएँ चल सकती हैं। तमिलनाडु में 25–30 नवंबर तक व्यापक वर्षा के साथ बेहद भारी बारिश की संभावना है। केरल और माहे में मध्यम से भारी बारिश जारी रहेंगी। तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 29 नवंबर से बारिश बढ़ेगी और 30 नवंबर को बहुत भारी वर्षा हो सकती है। लक्षद्वीप में समुद्र में लहरें ऊँची और तेज़ रहेंगी। इसके साथ ही पानी अशांत रहेगा और बारिश जारी रहेगी। वहीं, ओडिशा में 25–27 नवंबर के बीच हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी बारिश संभव है, अगर सिस्टम थोड़ा उत्तर की ओर खिसकता है तो।
इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में सेनयार के प्रभाव से मौसम बिगड़ना शुरू हो गया है। आज सुबह से जारी भारी बारिश ने कई जिलों में जलभराव और बाधाएँ पैदा की हैं। तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन और दक्षिण तमिलनाडु के अन्य क्षेत्रों में जलभराव से सड़कों और आवासीय इलाकों में परेशानी बढ़ गई है। नागपट्टिनम में भी कई जगह पानी निकासी की कार्रवाई की जा रही है। जगह-जगह सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हो रहा है और जनजीवन बाधित है।
25 नवंबर तक दर्ज भारी बारिश के आँकड़े
राज्य के कई हिस्सों में भारी वर्षा मापी गई है। तिरुनेलवेली के ऊथू में 23 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। नालुमुक्कु में 22 सेंटीमीटर, कुड्डालोर के सेथियाथोप में 21 सेंटीमीटर, तिरुनेलवेली के कक्काची में 21 सेंटीमीटर और मंजोलाई में 19 सेंटीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। ये आँकड़े लगातार सक्रिय मौसम की स्थिति को दर्शाते हैं।
स्कूलों में आज (25 नवंबर) अवकाश घोषित
लगातार भारी बारिश और जलभराव को देखते हुए 25 नवंबर को मदुरै, रामनाथपुरम, तूतीकोरिन, मयिलादुथुरै, तंजावुर, पुडुकोट्टई, त्रिची, नागपट्टिनम, शिवगंगई और विरुधुनगर जिलों में स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। इसके अलावा पुडुचेरी और कराईकल में भी प्रशासन ने विद्यालय बंद रखने के आदेश जारी किए हैं।
इस समय सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्र
फिलहाल सबसे अधिक मौसमीय जोखिम अंडमान-निकोबार में तेज़ हवाओं, भारी बारिश और खतरनाक समुद्री परिस्थितियों के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिणी तटीय तमिलनाडु में जलभराव की स्थिति गंभीर हो सकती है। चेन्नई में सिस्टम की दिशा में मामूली बदलाव हुआ तो भारी बारिश की संभावना बढ़ जाएगी। केरल के वेस्टर्न घाट इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। तटीय आंध्र प्रदेश में भी सप्ताहांत तक भारी बारिश की आशंका है, जबकि लक्षद्वीप के आसपास समुद्र में लहरें ऊँची और अस्थिर रह सकती हैं।
नागरिकों के लिए सलाह—सावधानी और तैयारी जरूरी
संवेदनशील और तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को आने वाले दिनों में मौसम बिगड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए। आवश्यक सामान, पीने का पानी, दवाइयाँ और बैकअप बिजली पहले से सुरक्षित रखें। भारी बारिश के दौरान यात्रा से बचें, खासकर पहाड़ी इलाकों में जहाँ भूस्खलन हो सकता है। निचले और तटीय क्षेत्रों के लोग प्रशासनिक चेतावनियों पर ध्यान दें और जलस्तर बढ़ने या निकासी आदेश जारी होने पर तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाएँ। मछुआरों और समुद्र किनारे गतिविधियों से जुड़े लोगों को समुद्र में न उतरने की सलाह दी जाती है।
आगे क्या उम्मीद?—पूर्वानुमान
आगामी 48 घंटे इस सिस्टम के लिए निर्णायक रहेंगे। जैसे-जैसे यह सिस्टम दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में और मजबूत होगा, इसकी ताकत, आकार और संभावित लैंडफॉल को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी मिलेगी। तब तक अंडमान सागर, तमिलनाडु–पुडुचेरी तट, केरल और तटीय आंध्र प्रदेश के लोगों को सतर्क रहना चाहिए और मौसम अपडेट लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि परिस्थितियाँ तेजी से बदल सकती हैं।
यह भी पढ़ें: भारतीय समुद्रों में डबल लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय, दक्षिण भारत में पूर्वोत्तर मानसून ने फिर बढ़ाई बारिश
यह भी पढ़ें: Cyclone Alert: बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान की संभावना,रास्ता और समय अभी भी अनिश्चित








