मौसम से लेकर ऊर्जा सुरक्षा तक, क्यों अहम हैं धरती के ये जलडमरूमध्य
स्ट्रेट्स (जलडमरूमध्य) देखने में तो साधारण भौगोलिक संरचना लगते हैं, लेकिन ये धरती के प्राकृतिक कंट्रोल पॉइंट्स की तरह काम करते हैं। ये संकरे रास्ते महासागरों की चाल को नियंत्रित करते हैं, हवाओं की दिशा बनाते हैं, मौसम प्रणालियों को प्रभावित करते हैं और धरती के सबसे व्यस्त व्यापार मार्गों को दिशा देते हैं। प्राचीन मानव प्रवास से लेकर आधुनिक शिपिंग नेटवर्क तक, स्ट्रेट्स ने चुपचाप इंसानी इतिहास और पर्यावरण दोनों को दिशा दी है।
स्ट्रेट्स (जलडमरूमध्य) क्या होते हैं?
स्ट्रेट्स प्राकृतिक रूप से बने संकरे जलमार्ग होते हैं, जो दो बड़े जल निकायों जैसे समुद्र या महासागर को जोड़ते हैं। ये नक्शे पर सिर्फ पतली नीली पट्टी जैसे दिखते हैं, लेकिन इनका महत्व सिर्फ नौवहन तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट्स समुद्री धाराओं, क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों और भू-राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करते हैं। ये मानसून की नमी को नियंत्रित करने से लेकर खरबों डॉलर के व्यापार को आगे बढ़ाने तक धरती के अहम जंक्शन प्वाइंट हैं।
कैसे बनते हैं स्ट्रेट्स
स्ट्रेट्स का निर्माण लाखों सालों की भूगर्भीय और समुद्री प्रक्रियाओं से होता है। टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल से गहराई बनती है, समुद्र स्तर के उतार-चढ़ाव से निचले भू-भाग डूब जाते हैं और ग्लेशियरों के क्षरण से संकरे चैनल बन जाते हैं। उदाहरण के लिए, आइस एज (हिमयुग)के दौरान समुद्र का स्तर गिरने से महाद्वीप जुड़े हुए थे। जब बर्फ पिघली तो समुद्र का स्तर बढ़ा और रास्ते डूब गए, जिससे आज के कई स्ट्रेट्स (जलडमरूमध्य) बने। कुछ, जैसे जिब्राल्टर जलडमरूमध्य, अचानक आपदाओं से बने जबकि कुछ धीरे-धीरे क्षरण और अवसाद से विकसित हुए।
दुनिया के अहम स्ट्रेट्स
बेयरिंग स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – रूस और अलास्का को अलग करता है, सिर्फ 85 किमी चौड़ा है लेकिन आर्कटिक समुद्री बर्फ और महासागरीय संतुलन पर असर डालता है। आइस एज में यहीं से इंसानों का एशिया से अमेरिका प्रवास हुआ।
डार्डानेल्स स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) – तुर्की का ये जलडमरूमध्य एजियन सागर को मारमारा सागर से जोड़ता है। प्राचीन काल से व्यापार और युद्ध रणनीति में अहम रहा है। इसकी संकरी रचना हवाओं को चैनलाइज कर भूमध्यसागर के मौसम पर असर डालती है।
ताइवान स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – ताइवान और चीन के बीच स्थित, भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र और जलवायु विभाजक भी। यहां मानसूनी धाराओं की टकराहट से भारी बारिश होती है।
टार्टरी स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – रूस के सखालिन द्वीप और साइबेरिया के बीच, उप-आर्कटिक जल प्रवाह का रास्ता और बर्फ पिघलने में अहम।
युकातान स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – मैक्सिको की खाड़ी और कैरेबियन सागर को जोड़ता है। यहां से निकलने वाली धारा ‘गल्फ स्ट्रीम’ यूरोप के मौसम को संतुलित करती है।
मेसिना स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – सिसिली और इटली के बीच, जटिल ज्वारीय धाराओं और भंवरों के लिए प्रसिद्ध।
ओट्रांटो स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – इटली और अल्बानिया के बीच, एड्रियाटिक और आयोनियन सागर को जोड़ता है। यूरोप और मेडिटरेनियन के बीच मौसम को दिशा देता है।
कुक स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – न्यूज़ीलैंड के उत्तर और दक्षिण द्वीप के बीच, तेज़ हवाओं और तेज़ समुद्री धाराओं के लिए कुख्यात।
हडसन स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – अटलांटिक को हडसन खाड़ी से जोड़ता है, आर्कटिक बर्फ और कनाडा के मौसम पर असर डालता है।
मोज़ाम्बिक चैनल –तकनीकी रूप से एक Channel है, लेकिन यह भी स्ट्रेट्स की तरह महासागरीय धाराओं और साइक्लोन ट्रैक्स को प्रभावित करता है। मेडागास्कर और अफ्रीका के बीच, गर्म धाराओं को दक्षिण की ओर भेजता है। यह चैनल है, स्ट्रेट नहीं-लेकिन भूमिका स्ट्रेट जैसी है।
हॉर्मुज़ स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा कॉरिडोर, जहां से एक-पाँचवां वैश्विक तेल व्यापार गुजरता है। यहां की गर्म हवा और मानसून की नमी मिलकर धूलभरी आंधियां भी पैदा करती हैं।
बाब-एल-मंदेब स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है, व्यापारिक दृष्टि से बेहद अहम। यहां से मानसूनी हवाएं भी गुजरती हैं।
टेन डिग्री चैनल (जलडमरूमध्य)– अंडमान और निकोबार द्वीप को अलग करता है, भारत के पूर्वी तट पर मानसून की नमी लाने में भूमिका निभाता है। लेकिन यह तकनीकी रूप से चैनल है।
सुंडा स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – जावा और सुमात्रा के बीच, ज्वालामुखीय इतिहास और समुद्री धाराओं के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया के मौसम पर असर।
जिब्राल्टर स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – अटलांटिक और मेडिटरेनियन को जोड़ता है, खारे और मीठे पानी का संतुलन बनाए रखता है।
मलक्का स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) – सबसे व्यस्त व्यापार मार्गों में से एक, हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ता है। यहां गर्म पानी बादल बनाकर भारी बारिश लाता है।
पाक जलडमरूमध्य (Palk Strait) – भारत और श्रीलंका के बीच, मत्स्य पालन और उत्तर-पूर्व मानसून में महत्वपूर्ण।
बॉस्फोरस स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) – इस्तांबुल से गुजरता है, काला सागर को मारमारा सागर से जोड़ता है। यहां की दोहरी धाराएं वैज्ञानिक अध्ययन का केंद्र हैं।
बैस स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) – ऑस्ट्रेलिया और तस्मानिया के बीच, अप्रत्याशित मौसम और तेज़ हवाओं वाला इलाका।
डेविस स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) – ग्रीनलैंड और कनाडा के बीच, उत्तरी अटलांटिक की धाराओं को नियंत्रित करता है और वैश्विक महासागरीय सर्कुलेशन में अहम।
स्ट्रेट्स का रणनीतिक महत्व
स्ट्रेट्स सिर्फ प्राकृतिक चमत्कार नहीं बल्कि भू-राजनीतिक और जलवायु नियंत्रण के केंद्र भी हैं। इन पर नियंत्रण का मतलब समुद्री ताकत, व्यापार सुरक्षा और कूटनीतिक दबदबा होता है। हॉर्मुज़ से लेकर मलक्का तक, इन संकरे रास्तों पर देशों की ऊर्जा और अर्थव्यवस्था निर्भर है।
वैश्विक व्यापार में स्ट्रेट्स का योगदान
दुनिया का 80% से ज़्यादा व्यापार समुद्र से होता है और उसका लगभग आधा हिस्सा स्ट्रेट्स से गुजरता है। अगर कोई बड़ा स्ट्रेट ब्लॉक हो जाए तो सप्लाई चेन प्रभावित हो जाती है, तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं और मौसम-निर्भर शिपिंग रास्ते बाधित हो जाते हैं। जैसे स्वेज नहर में ‘एवर गिवेन’ घटना से वैश्विक व्यापार हिल गया था।
गल्फ(खाड़ी) और स्ट्रेट(जलडमरूमध्य) में फर्क
गल्फ यानी खाड़ी, एक बड़ा जल निकाय जो भूमि के भीतर जाता है और आमतौर पर चौड़ा मुहाना होता है। जबकि स्ट्रेट दो भूभागों के बीच संकरा चैनल है जो बड़े जल निकायों को जोड़ता है। यही संकरापन स्ट्रेट्स को समुद्री धाराओं और मानव गतिविधियों पर असरदार बनाता है। Channel यानी जलसंधि, आमतौर पर स्ट्रेट से चौड़ा होता है और कई बार मानव-निर्मित भी होता है। जैसे इंग्लिश चैनल या मोज़ाम्बिक चैनल।
स्ट्रेट्स और महासागर-वायुमंडल की कड़ी
स्ट्रेट्स जलवायु वाल्व की तरह काम करते हैं, यानी यह तय करते हैं कि गर्मी और लवणता महासागरों के बीच कैसे अदला-बदली करेगी। यहां पानी की तेज़ धाराएं वर्टिकल मिक्सिंग बढ़ाती हैं, जिससे सतही समुद्र तापमान बदलता है और वायुमंडलीय संवहन प्रभावित होता है। उदाहरण के लिए, मलक्का और सुंडा जलडमरूमध्य हिंद महासागर के गर्म जल को नियंत्रित करते हैं और मानसून की तीव्रता को प्रभावित करते हैं।
बदलती जलवायु में स्ट्रेट्स का महत्व
ग्लोबल वार्मिंग से समुद्र स्तर बढ़ रहा है और समुद्री धाराएं बदल रही हैं। ऐसे में स्ट्रेट्स जलवायु संकेतक बन गए हैं। पाक जलडमरूमध्य जैसे उथले जलडमरूमध्य में समुद्र स्तर का थोड़ा-सा बढ़ना भी मछली पकड़ने और अवसाद जमाव को प्रभावित कर सकता है। आर्कटिक बर्फ पिघलने से बेयरिंग स्ट्रेट में नई शिपिंग लेन खुल रही हैं लेकिन इससे आर्कटिक और पैसिफिक के बीच गर्मी का आदान-प्रदान बढ़कर मौसम को अस्थिर बना सकता है। इसलिए भविष्य की जलवायु और व्यापार सुरक्षा समझने के लिए स्ट्रेट्स की भूमिका जानना बेहद ज़रूरी है।
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