[Hindi] मॉनसून 2020 की उल्टी गिनती शुरू, वर्तमान स्थितियां समय पर अंडमान सागर में मॉनसून के दस्तक देने की ओर कर रही हैं इशारा

May 12, 2020 3:00 PM |

भारत में 4 महीनों के मॉनसून सीजन का समय शुरू होने में अब अधिक समय नहीं रह गया है। पूरे साल में 4 महीनों के इस सीजन को लेकर उत्सुकता और आशंका दोनों देश भर में छाई रहती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बेहतर मॉनसून या खराब बारिश दोनों का असर भारत की अर्थव्यवस्था, भारत की खेती और भारत के कृषि उत्पादन पर देखने को मिलता है।

सबसे पहले तो मॉनसून के आगमन को लेकर लोग आशंकित रहते हैं। और जब मॉनसून आ जाता है उसके बाद इसका रूप कैसा होगा, किन क्षेत्रों में अधिक बारिश होगी और कहां पर मॉनसून निराश करेगा इसे लेकर किसानों सहित सरकार और आम आदमी के मन में आशंका के बादल घुमड़ते रहते हैं।

1 जून को केरल आने से 10 दिन पहले अंडमान सागर में होती है मॉनसून की दस्तक

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून आमतौर पर 20 मई के आसपास अंडमान सागर पर पहुंचता है। इसके 5 दिनों के बाद अगली छलांग लगाता है जब यह श्रीलंका पर 25 मई तक दस्तक दे देता है। भारत के मुख्य भूभाग पर केरल के रास्ते 1 जून को आमतौर पर मॉनसून के 4 महीनों की यात्रा का शुभारंभ होता है।

साल 2019 का मॉनसून अंडमान सागर में तो 2 दिन पहले 18 मई को आ गया था, लेकिन केरल तक पहुंचने में इसे काफी विलंब हुआ और 1 सप्ताह की देरी से पहुंचा।

Read this article in English: Countdown Monsoon 2020 starts, augurs well to kick start with the Andaman Sea

बीते 10 वर्षों में मॉनसून वर्ष 2009 में मॉनसून अपने सामान्य समय से एक सप्ताह पहले 23 मई को ही केरल पहुँच गया था। इन 10 वर्षों में मॉनसून एक्सप्रेस सबसे लेट हुई थी 2016 में, जब 8 जून को केरल में मॉनसून वर्षा शुरू हुई थी।

यहां उल्लेखनीय है कि अंडमान सागर में मॉनसून के पहले या देरी से आगमन का केरल में पहले या देर से आगमन के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है, जैसा कि पिछले वर्ष हुआ। इसी तरह यह भी गौर करने वाली बात है कि मॉनसून के पहले या बाद में आने तथा मॉनसून के बेहतर प्रदर्शन या खराब प्रदर्शन के बीच कोई संबंध नहीं है।

मॉनसून के आगमन और विदाई की तारीखें बदल गई हैं

मॉनसून के आगमन और विदाई के सामान्य समय में संशोधन किया गया है। इसमें 3 से 7 दिनों का अंतर बदलाव किया गया है। खासतौर पर मध्य और पूर्वी भारत के भागों में 3 से 7 दिनों की देरी से मॉनसून का आगमन होगा। जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में पहले आगमन और देर से विदाई की तारीख तय की गई है।

समुद्र में बनने लगा है माहौल

मॉनसून करंट के स्थाई रूप लेने से पहले हिंद महासागर क्षेत्र में कुछ स्थायी बदलाव आते हैं। इसमें महत्वपूर्ण है भूमध्य रेखा के पार का हवा का प्रवाह और अरब सागर पर बने विपरीत चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र का स्थानांतरण। उसके बाद पूरब से आने वाली ट्रेड विंड दक्षिणी गोलार्ध से भूमध्य रेखा को पार कर आगे बढ़ती है। हवाएँ स्थायी रूप से दक्षिण-पश्चिमी दिशा से चलने लगती हैं।

हवाओं के निरंतर दक्षिण-पश्चिम होने की वजह से ही जून से सितंबर के 4 महीनों के इस बारिश के सीजन को दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कहते हैं। मॉनसून शुरू होने से पहले ही अरब सागर के मध्य भागों पर विपरीत चक्रवाती क्षेत्र बनता है जिसके कारण भूमध्य रेखा के पार से आने वाली हवा पश्चिमी रुख कर तटों तक चलने लगती है।

बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर मॉनसून करंट को करता है एक्टिव

इस बीच कई बार ऐसा हुआ है जब मॉनसून के आने से पहले मई के मध्य तक अरब सागर या बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर यानी निम्न दबाव का क्षेत्र या डिप्रेशन बन जाते हैं। ऐसे में मॉनसून करंट के समय से पहले चलने की संभावना होती है।

मई का दूसरा सप्ताह ऐसा समय होता है जब मॉनसून के आगमन से पहले की स्थितियों की सही तस्वीर बनने लगती है। पूरब से आने वाली ट्रेड विंड्स भूमध्य रेखा को पार करने लगी है। 12 मई के आसपास बंगाल की खाड़ी के दक्षिण पश्चिमी भागों पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके चलते बंगाल की खाड़ी से पश्चिमी दिशा में जाने वाली मॉनसून करंट के और प्रभावी होने की संभावना है।

Image credit: Tripsavvy

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