[Hindi] पूर्वोत्तर भारत, बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति में सुधार की संभावना है, दिल्ली सहित उत्तर भारत पर मॉनसून हो सकता है मेहरबान- जतिन सिंह, एमडी, स्काइमेट

July 14, 2020 11:00 AM |

मॉनसून का एक-तिहाई समय बीत गया है और देश में अब तक सामान्य से 14% अधिक बारिश हुई है। देश के कुल भू-भाग के लगभग 85% क्षेत्र में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। मात्र 15% क्षेत्र ही ऐसा है जहां बारिश में कमी रह गई है। यहां तक ​​कि मॉनसून वर्षा का वितरण भी एक समान रहा है। लेकिन असली परख अब होगी क्योंकि जुलाई और अगस्त में मॉनसून का रुख ही खरीफ फसलों का उत्पादन तय करता है।

कोविड महामारी की भयावह स्थिति ने अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। वर्तमान समय में भी अर्थवयवस्था में बहुत तेज़ी से सुधार की गुंजाइश नहीं है। ऐसे में कृषि क्षेत्र ही एकमात्र उम्मीद की किरण है, जो एक विशाल जनसंख्या का भरण-पोषण कर सकता है। नीतियों में संशोधनों और अनुकूल मॉनसून बारिश के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान कृषि तथा इससे संबद्ध अन्य क्षेत्रों में 2-3% की वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। लॉकडाउन के कारण कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को काफी हद तक दूर किया गया है, इससे इस सीजन में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। कृषि क्षेत्र हमारी जीडीपी में लगभग 13% का योगदान देता है और भारत की लगभग आधी आबादी को रोजगार प्रदान करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसमें विकास की संभवना सरकार के लिए निश्चित तौर पर उत्साहजनक है वो भी तब, जब अन्य क्षेत्रों में रोज़गार का संकट पैदा हो रहा है।

इस बीच देश के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में खरीफ फसलों पर संभावित टिड्डी के खतरे को कम करने के लिए सरकारी मशीनरी तैयार है। 11 अप्रैल से 6 जुलाई के बीच, टिड्डियों के हमले को निष्प्रभावी करने के लिए पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लगभग 2.75 लाख हेक्टेयर भूमि पर अभियान चलाया गया। इसके अलावा, राजस्थान के 6 जिलों जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर, बीकानेर, सीकर और अजमेर में पहले सप्ताह में टिड्डी नियंत्रण अभियान चलाए गए। ये ऑपरेशन उत्तर प्रदेश के झांसी और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ तक किए गए। यह पहली बार है जब फसलों को टिड्डियों के हमलों से बचाने के लिए ड्रोन और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा रहे हैं। मॉनसून सीज़न में टिड्डी दल पर स्प्रे अभियान के लिए बीईएल का एक हेलीकाप्टर और वायुसेना के चार एमआई-17 को तैनात किया गया है। मॉनसूनी हवाओं में बदलाव के साथ ईरान और पाकिस्तान से टिड्डियों के ताज़ा हमले की आशंका है।

इस सप्ताह मॉनसून वर्षा का वितरण देश के अधिकांश हिस्सों में समान रूप से होने की संभावना है। राजस्थान के पश्चिमी जिलों बाड़मेर, जैसलमेर, फलौदी, बीकानेर और जोधपुर में भी मॉनसून की अच्छी बारिश होने के संकेत मिल रहे है। दूसरी ओर पूर्वोत्तर भारत, बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति में इस सप्ताह सुधार होने की संभावना है। हालांकि अगले सप्ताह फिर से बाढ़ का संकट वापसी कर सकता है।

उत्तर भारत

मॉनसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति में वापस आ जाएगी। इसके परिणामस्वरूप पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में वर्षा गतिविधियां बढ़ेंगी। पश्चिमी राजस्थान में अभी तक मॉनसून ने निराश किया है। गंगानगर से लेकर बाड़मेर तक सप्ताह के आखिर में अच्छी मॉनसून वर्षा देखने को मिल सकती है। उत्तराखंड में भारी बारिश होने की उम्मीद है। जबकि उत्तर भारत के शेष पर्वतीय राज्यों में मध्यम मॉनसून वर्षा की संभावना है।

पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत

देश के इन भागों में इस सप्ताह मॉनसून वर्षा जारी रहेगी। लेकिन सिक्किम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल को छोड़कर बाकी हिस्सों में मूसलाधार मॉनसून वर्षा की उम्मीद नहीं है। गंगीय पश्चिम बंगाल में 13 और 14 जुलाई को छोड़कर सप्ताह के बाकी दिनों में हल्की मॉनसून वर्षा होगी। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में बाढ़ की स्थिति में सुधार होगा। बारिश में कमी तो होगी लेकिन बिहार के तराई क्षेत्रों, उत्तरी बंगाल और असम के निचले इलाकों में वज्रपात यानि बिजली गिरने की संभावना बनी रहेगी।

मध्य भारत

छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश पर एक चक्रवाती सिस्टम बनने के कारण इन दोनों राज्यों में बारिश बढ़ने की संभावना है। खासतौर पर सप्ताह के शुरुआती दिनों में बारिश ज़्यादा होगी। मुंबई सहित दक्षिणी गुजरात और कोंकण-गोवा में भी शुरुआती 3 दिनों के दौरान (13 से 15 जुलाई के बीच) मध्यम से भारी वर्षा हो सकती है। उसके बाद बारिश की गतिविधियां कम हो जाएंगी।

दक्षिण भारत

सप्ताह के शुरुआती 3-4 दिनों के दौरान प्रायद्वीपीय भारत पर सक्रिय मॉनसून की स्थिति रहेगी। तेलंगाना, रायलसीमा और कर्नाटक में काफी व्यापक बारिश होने की संभावना है। सप्ताह के आखिर में बारिश की गतिविधियों में काफी कमी आ जाएगी विशेष रूप से केरल और तमिलनाडु में वर्षा कम हो जाएगी। इस दौरान पश्चिमी तटों पर अरब सागर के ऊपर बना ट्रफ भी कमजोर हो जाएगा।

दिल्ली-एनसीआर

राजधानी दिल्ली में सप्ताह की शुरुआत मुख्यतः शुष्क मौसम के साथ होगी। सप्ताह के मध्य से मॉनसून के सक्रिय होने की संभावना है, खासतौर पर तब, जब मॉनसून की अक्षीय रेखा दक्षिणवर्ती होगी। दिल्ली में 17 और 19 जुलाई के बीच बारिश काफी अच्छी हो सकती है। बारिश से पहले तापमान 38-40 डिग्री तक चलता रहेगा। जबकि बारिश शुरू होने के बाद इसमें गिरावट आएगी।

चेन्नई

शहर के कुछ हिस्सों में पिछले सप्ताह भारी बारिश हुई थी। इस सप्ताह चेन्नई में भारी बारिश की संभावना कम है। हालांकि रुक-रुक कर हल्की से मध्यम मॉनसूनी बौछारें चेन्नई के लोगों को देखने को मिल सकती हैं।

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