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[Hindi] महाराष्ट्र का साप्ताहिक मौसम पूर्वानुमान और फसल सलाह (21 से 27 दिसम्बर, 2020)

December 21, 2020 3:24 PM |

आइए जानते हैं 21 से 27 दिसम्बर के बीच कैसा रहेगा मौसम।

पिछले सप्ताह में महाराष्ट्र के कई भागों को बेमौसम बरसात देखने को मिली थी। बादल छाए रहने के कारण तथा बारिश होने के कारण न्यूनतम तापमान महाराष्ट्र में बढ़े हुए थे। परंतु पिछले दो-तीन दिनों उत्तर पूर्वी दिशा से ठंडी और शुष्क हवाओं के चलने के प्रभाव से तापमान गिरने लगे हैं।

इस समय अधिकांश स्थानों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे बने हुए हैं तथा अधिकतम तापमान भी कई भागों में सामान्य से कुछ नीचे हैं। विदर्भ तथा मराठवाड़ा में कुछ स्थानों पर शीतलहर भी चल रही है।

इस सप्ताह महाराष्ट्र में लगभग सभी जिलों में मौसम मुख्यतः साफ और शुष्क बना रहेगा। 21 से 23 दिसम्बर के बीच अधिकांश भागों में तापमान सामान्य से कम ही बने रहेंगे परंतु 24 दिसंबर से एक बार फिर तापमान में वृद्धि होने की संभावना है। 23 या 24 दिसंबर से हवाओं की दिशा में परिवर्तन होगा तथा पूर्वी या दक्षिण पूर्वी दिशा से नम हवाएं चलेंगी जिससे दिन और रात के तापमान में वृद्धि देखने को मिलेगी।

मुंबई, पुणे, नाशिक, नागपुर, वर्धा, अकोला, वासिम समेत लगभग सभी शहरों में इस सप्ताह मौसम मुख्यतः साफ और शुष्क रहने का अनुमान है।

महाराष्ट्र के किसानों के लिए फसल सलाह:

महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में ग्रीष्म कालीन धान की नर्सरी डालने की शुरुआत इस समय कर सकते हैं। आम की पत्तियों पर लगने वाले झुलसा रोग (anthracnose) की रोकथाम के लिए कारबेंडाज़िम 12% और मैंकोजेब 10 ग्राम प्रति लिटर पानी की दर से छिड़काव करें।

मध्य महाराष्ट्र, मराठवाडा और विदर्भ में समय से पहले बोई गई तूर की कटाई और मड़ाई शुरू कर सकते हैं। तूर में फली छेदक कीट का संक्रमण हो तो डेल्टामेथरीन 2.8% ईसी 1 मिली प्रति लिटर पानी की दर से डालें।

शुष्क और ठंडे मौसम को देखते हुए किसान गेहूं और फल वाली सब्जियों में निराई-गुड़ाई का काम कर सकते हैं। अंबिया बाहर अनार इस समय वानस्पतिक वृद्धि और पुष्पन की अवस्था में है। अज़ाडायरेक्टिन या नीम तेल 1% (10000 पीपीएम) 3 मिली और 0.25 मिली स्टीकर प्रति लीटर पानी की दर से पहला छिड़काव दें। 7 से 10 दिन बाद क्यांट्रानीलीप्रोल 0.75 मिली का प्रति लीटर पानी के दर से स्प्रे करें।

अंगूर की फसल पुष्पन की अवस्था में आ गई हो तो बाग में ड्रिप सिंचाई दें। जिन बागों में वानस्पतिक वृद्धि से फल लगने की अवस्था है वहाँ पौधे अगर घने हो गए हैं तो कुछ टहनियों को निकाल दें।

केले के बाग में पौधों पर निगरानी करते रहें।

Image Credit: Free Press Journal

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