तमिलनाडु में 5 नवंबर से बढ़ेगी बारिश, केरल में अगले 3 दिन भारी बरसात का अलर्ट
मुख्य मौसम बिंदु
- तमिलनाडु के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां भारी होने की संभावना है।
- केरल में 5 और 6 नवंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।
- पुडुचेरी और कराईकल भी 5 नवंबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।
- तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 40–50 km/h की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
- पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 6 नवंबर 2026 तक के लिए है। तमिलनाडु में 5 नवंबर से बारिश बढ़ने और केरल में तीन दिनों तक भारी बारिश जारी रहने की संभावना है।
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दक्षिण भारत के राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने वाली हैं। तमिलनाडु में 5 नवंबर से बारिश का दायरा बढ़ने की संभावना है। जबकि केरल में अगले तीन दिनों तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश जारी रह सकती है। 4 नवंबर को तमिलनाडु में बारिश की गतिविधियां कुछ सीमित और अलग-अलग हिस्सों तक रहने का अनुमान है, लेकिन 5 नवंबर से राज्य के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना है। इसके साथ ही पुडुचेरी और कराईकल में भी बारिश का दायरा बढ़ सकता है। केरल में 4, 5 और 6 नवंबर को भारी बारिश के आसार हैं। लगातार बारिश के कारण खेती-किसानी, सड़क यातायात और खुले स्थानों पर होने वाली गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। खासकर अचानक तेज बारिश होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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दक्षिण तमिलनाडु और लक्षद्वीप के आसपास चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय
दक्षिण भारत में बारिश का यह दौर केवल चक्रवात मुरासु के पहले वाले तटीय प्रभाव का विस्तार नहीं है। इस समय दक्षिण तमिलनाडु और लक्षद्वीप के आसपास निचले वायुमंडलीय स्तर पर चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है। ऐसी मौसम प्रणालियां वातावरण में नमी को एक जगह इकट्ठा करने और हवाओं के आपस में मिलने में मदद करती हैं। इससे हवा ऊपर उठती है और बारिश वाले बादलों का निर्माण होता है। इसके अलावा पश्चिमी घाट (Western Ghats) के पहाड़ी इलाके भी बारिश को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पहाड़ियों से टकराकर नमी वाली हवाएं ऊपर उठती हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में बारिश तेज हो सकती है। इन मौसम प्रणालियों के कारण दक्षिण भारत में बारिश का एक सक्रिय दौर बनने की संभावना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि केरल या तमिलनाडु के ऊपर कोई नया डिप्रेशन या चक्रवाती तूफान बन रहा है। फिलहाल बारिश के लिए क्षेत्रीय स्तर पर अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं।
तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 5 नवंबर से कई जगह बारिश
4 नवंबर को तमिलनाडु में बारिश समान रूप से नहीं होगी। कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के बीच स्थानीय स्तर पर भारी बारिश के दौर भी संभव हैं, लेकिन पूरे राज्य में बारिश का दायरा सीमित रह सकता है। 5 नवंबर से स्थिति में बदलाव आने की संभावना है। इसके बाद तमिलनाडु के कई स्थानों पर बारिश होने का अनुमान है। पुडुचेरी और कराईकल में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, केरल में इस दौरान अपेक्षाकृत व्यापक बारिश होने की संभावना है। हालांकि, क्षेत्रीय पूर्वानुमान का मतलब यह नहीं है कि चेन्नई, मदुरै, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम जैसे सभी शहरों में एक समान बारिश होगी। अलग-अलग शहरों और जिलों में बारिश की मात्रा, समय और तीव्रता अलग हो सकती है। किसी शहर में तेज बारिश हो सकती है, जबकि आसपास के दूसरे इलाकों में केवल हल्की बौछारें देखने को मिल सकती हैं।
गरज-चमक के साथ 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं हवाएं
बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाएं भी परेशानी बढ़ा सकती हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में इस दौरान हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। केरल में भी भारी बारिश के साथ गरज-चमक वाली गतिविधियां हो सकती हैं। इस दौरान बारिश वाले बादल तेजी से विकसित हो सकते हैं। इसलिए कुछ समय तक मौसम शांत रहने के बाद अचानक तेज बारिश और आंधी जैसी स्थिति बन सकती है। इसका मतलब है कि पूरे दिन लगातार बारिश होना जरूरी नहीं है। ऐसे में तत्काल मौसम संबंधी फैसले लेने के लिए जिला स्तर के पूर्वानुमान और कम समय के मौसम अपडेट (Nowcast) अधिक उपयोगी रहेंगे। केवल इस आधार पर घर से बाहर निकलने की योजना नहीं बनानी चाहिए कि दिन के किसी हिस्से में बारिश नहीं हो रही है।
किसानों और वाहन चालकों को सतर्क रहने की सलाह
लगातार बारिश और गरज-चमक को देखते हुए किसानों को खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखने और काटकर रखी गई फसल को सुरक्षित रखने की जरूरत है। गरज-चमक की आशंका होने पर फसलों पर कीटनाशक या अन्य दवाओं का छिड़काव टालना चाहिए। वाहन चालकों को जलभराव वाली सड़कों से बचना चाहिए और तेज बारिश के दौरान कम दृश्यता (Low Visibility) को ध्यान में रखते हुए सावधानी से वाहन चलाना चाहिए। पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और सड़क संबंधी सलाह की जानकारी लेकर ही निकलना चाहिए। खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों को बादलों की गरज सुनाई देने पर किसी सुरक्षित और पक्के स्थान पर शरण लेनी चाहिए। भारी बारिश से पानी का बहाव बढ़ सकता है, लेकिन बाढ़ और पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का खतरा पहले हुई बारिश, मिट्टी में मौजूद नमी और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। इसलिए यह जरूरी नहीं है कि पूरे क्षेत्र में एक जैसी बाढ़ या भूस्खलन की स्थिति बने।
















