सूखे पहाड़ों पर जमेगी बर्फ, पश्चिमी विक्षोभ रहेगा कई दिनों तक सक्रिय, लंबे समय तक बर्फबारी के आसार

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jan 14, 2026, 3:00 PM
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पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी

मुख्य मौसम बिंदु

  • दिसंबर 2025 में पहाड़ी राज्यों में 90–100% तक बारिश-बर्फबारी की कमी
  • 16 और 19 जनवरी को लगातार दो पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना
  • 21 जनवरी के बाद बर्फबारी की तीव्रता और दायरा बढ़ेगा
  • लद्दाख में खेलो इंडिया विंटर गेम्स के लिए बर्फबारी अहम

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उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में दिसंबर 2025 के दौरान बारिश और बर्फबारी की भारी कमी दर्ज की गई। पूरे क्षेत्र में 90% से अधिक की कमी रही, जबकि उत्तराखंड में तो 100% तक का घाटा रिकॉर्ड किया गया। जनवरी 2026 के पहले दो हफ्तों में भी हालात में कोई खास सुधार नहीं हुआ। मौसमी गतिविधियों की इस कमी ने कृषि, एडवेंचर स्पोर्ट्स, पर्यटन और जल प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। बर्फबारी ग्लेशियरों और जल स्रोतों को रिचार्ज करती है, जो आने वाले मौसमों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है।

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16 जनवरी से बदल सकता है मौसम का मिज़ाज

अब पहाड़ों में मौसम के सुधरने की उम्मीदें बन रही हैं। एक पश्चिमी विक्षोभ 16 जनवरी 2026 को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ 18 जनवरी को मैदानी इलाकों में प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण विकसित होगा। हालांकि, बर्फबारी मुख्य रूप से 12,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों तक सीमित रहेगी। निचले क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं।

दूसरा पश्चिमी विक्षोभ और लंबा चलेगा मौसम का असर

पहले सिस्टम के तुरंत बाद 19 जनवरी 2026 को एक और पश्चिमी विक्षोभ आने की संभावना है, जो पहले से अधिक शक्तिशाली होगा। दोनों सिस्टम की मौसमी गतिविधियाँ लगभग एक-दूसरे पर ओवरलैप करेंगी। मैदानी इलाकों में इसका प्रेरित परिसंचरण 21 जनवरी 2026 के आसपास दिखाई देगा। इन दोनों सिस्टम्स के संयुक्त प्रभाव से मौसम गतिविधियां अगले हफ्ते के अंत तक बनी रह सकती हैं। 21 जनवरी के बाद बर्फबारी की तीव्रता और क्षेत्रफल में लगातार बढ़ोतरी होगी। गणतंत्र दिवस समारोह भी खराब मौसम की चपेट में आ सकते हैं।

खेलो इंडिया विंटर गेम्स के लिए बर्फबारी बनी उम्मीद की किरण

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 20 से 26 जनवरी 2026 के बीच ‘खेलो इंडिया विंटर गेम्स’ आयोजित होने हैं। लेह में एनडीएस आइस हॉकी स्टेडियम, लद्दाख स्काउट्स आइस रिंक और गुपुक्स तालाब समेत कई स्थानों पर प्रतियोगिताएं होंगी। खेलों के सफल आयोजन के लिए बर्फ और बर्फ की मोटी परत बेहद जरूरी है। आने वाले दिनों में संभावित बर्फबारी से इन खेलों के सफल आयोजन की उम्मीद जगी है। इससे पहले बर्फ की कमी के कारण यह आयोजन कई बार स्थगित करना पड़ा है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

बर्फबारी से ग्लेशियर और जल स्रोत रिचार्ज होते हैं, जो कृषि और जल आपूर्ति के लिए जरूरी हैं।

12,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की संभावना ज्यादा है।

हां, 21 जनवरी के बाद खराब मौसम के कारण गणतंत्र दिवस के आसपास असर पड़ सकता है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है