फरवरी में डबल खगोलीय शो: ग्रहों की परेड और रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण से सजेगा आसमान

By: Arti Kumari | Edited By: Mohini Sharma
Feb 15, 2026, 8:00 AM
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आसमान में दिखेंगी दो खगोलीय घनाएं, फोटो-AI

मुख्य मौसम बिंदु

  • 17 फरवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण दिखाई देगा
  • इसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है
  • फरवरी अंत तक छह ग्रहों की परेड संभव
  • मौसम पर इन घटनाओं का सीधा असर नहीं

फरवरी 2026 एस्ट्रोनॉमी में दिलचस्पी रखने वालों के लिए खास रहने वाला है। इस महीने दो बड़ी खगोलीय घटनाएं एक साथ देखने को मिलेंगी, 28 फरवरी के आसपास छह ग्रहों की परेड (Planet Parade) अपने चरम पर होगी और 17 फरवरी को वलयाकार सूर्य ग्रहण (annular solar eclipse) दिखाई देगा। इन दोनों घटनाओं का दुनियाभर के लोगों को इंतजार है। सवाल है कि क्या भारत में इन खास नजारों को देखा जा सकेगा।

वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या होता है?

सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। 17 फरवरी 2026 को वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। इस प्रकार के ग्रहण में चंद्रमा अपनी कक्षा के सबसे दूर बिंदु (एपोजी) के पास होता है, इसलिए वह आकार में छोटा दिखाई देता है और सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता। परिणामस्वरूप सूर्य के चारों ओर चमकदार घेरा दिखता है, जिसे “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण से अलग है, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है।

कहां दिखाई देगा वलयाकार सूर्य ग्रहण

17 फरवरी के दिन चंद्रमा अपनी कक्षा के सबसे दूर वाले हिस्से के पास होगा, इसलिए वह आकार में थोड़ा छोटा दिखाई देगा और सूर्य को पूरा कवर नहीं कर पाएगा। यह वलयाकार ग्रहण (annular solar eclipse) अंटार्कटिका के ऊपर एक संकरी पट्टी में साफ दिखाई देगा। इसके अलावा दक्षिणी दक्षिण अमेरिका और दक्षिणी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।

प्लैनेट परेड क्या होती है?

प्लैनेट परेड एक दृश्य संरेखण(visual alignment) है, जिसमें कई ग्रह पृथ्वी से देखने पर आकाश के एक ही दिशा क्षेत्र में एक साथ दिखाई देते हैं। फरवरी की इस सौर घटना में शुक्र, बुध, शनि, नेपच्यून, यूरेनस और बृहस्पति सूर्यास्त के बाद आसमान में नजर आएंगे। यह कोई वास्तविक गुरुत्वाकर्षण समूह नहीं होता, बल्कि हमारी देखने की स्थिति के कारण बना परिप्रेक्ष्य प्रभाव (perspective effect) होता है।

किन ग्रहों को कैसे देख पाएंगे

कुछ चमकीले ग्रह जैसे शुक्र(planet venus) नंगी आंखों से आसानी से दिख जाते हैं, बशर्ते वे क्षितिज से ऊपर हों और आसमान साफ हो। लेकिन नेपच्यून (Planet Neptune) जैसे धुंधले ग्रहों को देखने के लिए दूरबीन या बाइनाक्यूलर (Binoculars or telescopes) की जरूरत पड़ सकती है। अगर ग्रह क्षितिज के बहुत पास हों या गोधूलि (ट्वाइलाइट) ज्यादा हो, तो उन्हें देख पाना मुश्किल हो सकता है।

कब दिखेगा ग्रहों का यह खास क्रम

8 फरवरी से शुक्र और बुध, शनि के पास पश्चिम-दक्षिणपश्चिम दिशा में दिखने लगेंगे। बृहस्पति दक्षिण-पूर्व दिशा में चमकेगा, जबकि नेपच्यून और यूरेनस भी महीने के मध्य से आखिर तक पास-पास दिखाई देंगे। 20 फरवरी को बुध अपनी सबसे ऊंची शाम वाली स्थिति पर होगा, इसलिए उसे देखना सबसे आसान रहेगा।

खगोलीय गणित और वैज्ञानिक महत्व

यह नजारा खगोलीय यांत्रिकी (celestial mechanics) को दर्शाता है—अलग-अलग गति से सूर्य की परिक्रमा करते ग्रह कभी-कभी ऐसे दुर्लभ क्रम में दिखते हैं, जो हर कुछ वर्षों में ही बनता है। ऐसे दृश्य प्राचीन खगोल गणनाओं से लेकर आधुनिक कक्षीय मॉडलों तक, खगोल विज्ञान को आगे बढ़ाने और लोगों में जिज्ञासा जगाने का काम करते हैं।

ग्रहण और ग्रह-परेड का वैज्ञानिक उपयोग

सूर्य ग्रहण सूर्य-पृथ्वी-चंद्रमा की सटीक ज्यामिति का परिणाम होता है। इससे वैज्ञानिकों को कक्षीय दूरी और गति का अध्ययन करने के महत्वपूर्ण अवसर मिलते हैं। वहीं ग्रहों की परेड यह दिखाती है कि गुरुत्वाकर्षण से नियंत्रित ग्रहों की गति कभी-कभी संयोग से उन्हें आकाश में एक साथ ला देती है।

मौसम पर कोई सीधा असर नहीं

इन खगोलीय घटनाओं का पृथ्वी के मौसम पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन ये घटनाएं लोगों में अंतरिक्ष और विज्ञान के प्रति उत्सुकता बढ़ाती हैं और पृथ्वी की ब्रह्मांड में स्थिति को समझने की प्रेरणा देती हैं।

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Arti Kumari
Content Writer (English)
With a strong foundation in science and a passion for research, Arti specializes in weather and climate communication. At Skymet Weather, she leads the company's digital content strategy, transforming complex meteorological data into clear, engaging narratives. Her research-backed storytelling has helped expand Skymet's digital reach while making weather and climate information accessible to millions of readers across India and beyond.
FAQ

जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता और चारों ओर चमकीला घेरा दिखता है।

जब कई ग्रह एक दिशा में पास-पास दिखाई देते हैं।

नहीं, इन खगोलीय घटनाओं का मौसम पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

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