मानसून की वापसी जल्द होगी शुरू, अगले सप्ताह के मध्य तक दिल्ली पहुंच सकती है मानसून विदाई रेखा
मुख्य मौसम बिंदु
- राजस्थान से मानसून की वापसी 19 सितंबर के आसपास शुरू होने के संकेत हैं।
- जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और फलोदी में 20 सितंबर से मौसम अधिक शुष्क।
- 21 सितंबर से मध्य और पश्चिमी राजस्थान में एंटी-साइक्लोन मजबूत होने की संभावना।
- अगले सप्ताह मानसून की वापसी पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के कुछ हिस्सों तक बढ़ सकती है।
- मौसम पूर्वानुमान: यह मौसम पूर्वानुमान 25 सितंबर 2026 तक के लिए मान्य है। बंगाल की खाड़ी की संभावित प्रणाली के विकास के अनुसार इसमें बदलाव संभव है।
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मानसून की वापसी अगले करीब 24 घंटे में शुरू हो सकती है। मानसून की विदाई की निर्धारित तारीख 17 सितंबर है, इसलिए इस बार वापसी तय समय-सीमा के भीतर ही शुरू होने की संभावना है। हालांकि, अगर यह प्रक्रिया 20 सितंबर से शुरू होती तो स्थिति अधिक अनुकूल मानी जाती, लेकिन मौजूदा मौसमी संकेत 19 सितंबर को मानसून वापसी की संभावित तारीख बता रहे हैं। कल 19 सितंबर को राजस्थान के पश्चिमी सीमावर्ती इलाकों में बहुत हल्की बारिश हो सकती है, जो मानसून वापसी की प्रक्रिया के साथ ही होगी। यहां यह समझना जरूरी है कि किसी क्षेत्र से मानसून की वापसी का मतलब यह नहीं है कि उसके बाद वहां बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। किसी क्षेत्र से मानसून की विदाई घोषित करने के लिए कुछ निर्धारित मौसमी परिस्थितियों का पूरा होना जरूरी होता है।
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राजस्थान में 20 सितंबर से मौसम के सूखने के संकेत
मानसून की वापसी के लिए जरूरी परिस्थितियों में ऊंचाई पर बने बादलों का नहीं होना, बारिश का रुकना, तापमान में बढ़ोतरी, हवा में नमी का कम होना और हवाओं की दिशा में बदलाव प्रमुख हैं। वहीं, राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और फलोदी जैसे सीमावर्ती इलाकों में पिछले 7–10 दिनों से कोई मापने योग्य बारिश नहीं हुई है। हालांकि, कुछ स्थानों पर छिटपुट बादल और बेहद हल्की मौसमी गतिविधियां बनी हुई थीं।
इन इलाकों में 20 सितंबर से मौसम पूरी तरह शुष्क होने की संभावना है और इसके बाद करीब एक सप्ताह या उससे अधिक समय तक बारिश से राहत रह सकती है। 21 सितंबर से मध्य और पश्चिमी राजस्थान में प्रति-चक्रवाती परिसंचरण यानी एंटी-साइक्लोन और मजबूत होने की संभावना है। इसके प्रभाव से राजस्थान के अधिकांश हिस्सों से मानसून की वापसी आगे बढ़ सकती है और अगले सप्ताह पंजाब, हरियाणा तथा दिल्ली के कुछ हिस्से भी इसकी प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
बंगाल की खाड़ी का संभावित तूफान बढ़ाएगा वापसी की जटिलता
मानसून की वापसी आमतौर पर एक साथ और लगातार नहीं होती। कई बार कुछ इलाकों से तेजी से मानसून लौट जाता है, जबकि कुछ जगहों पर यह प्रक्रिया कई दिनों तक रुक सकती है। इस बार बंगाल की खाड़ी में बनने वाला संभावित तूफान इस मानसून वापसी की प्रक्रिया को अधिक जटिल कर सकता है। थाईलैंड और म्यांमार के ऊपर मौजूद मौसम प्रणाली का अवशेष 19 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में प्रवेश कर सकता है। इसके प्रभाव से रविवार या सोमवार तक उत्तरी अंडमान सागर के ऊपर निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह सिस्टम समुद्र के ऊपर कुछ दिन रहकर मजबूत होकर आगे चलकर तूफान का रूप ले सकता है। इस प्रणाली का तट से टकराने का स्थान और इसके बाद देश के अंदर इसका रास्ता यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि मध्य और पश्चिमी भारत से मानसून की वापसी कब तक आगे बढ़ती है।
दिल्ली में मानसून की वापसी सामान्य तारीख 25 सितंबर के आसपास समय पर होने की संभावना है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी की इस प्रणाली की दिशा और ताकत के आधार पर आगे की समय-सीमा में बदलाव हो सकता है।
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