दिल्ली-NCR में 59 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज आंधी, अब बारिश के आसार कम, जानें पूरा मौसम पूर्वानुमान
मुख्य मौसम बिंदु
- पालम में 59 किमी प्रति घंटे और सफदरजंग में 46 किमी प्रति घंटे की हवा दर्ज हुई।
- सफदरजंग में 24 घंटे में कोई बारिश नहीं हुई, जबकि गाजियाबाद में केवल 1 मिमी बारिश
- 18–23 सितंबर तक बारिश की संभावना नहीं है। 21 सितंबर से आसमान साफ हो सकता है।
- पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 23 सितंबर 2026 तक के लिए है। मौसम प्रणालियों और हवाओं के पैटर्न में बदलाव होने पर पूर्वानुमान संशोधित हो सकता है।
दिल्ली में 17 सितंबर की सुबह अचानक तेज आंधी-तूफान यानी थंडरस्क्वॉल देखने को मिला। खास बात यह रही कि तेज हवाओं के बावजूद राजधानी में बारिश बहुत कम हुई। पालम में सुबह 4:22 बजे 59 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली, जबकि इसके दो मिनट बाद सफदरजंग में हवा की रफ्तार 46 किमी प्रति घंटे दर्ज की गई। यह गतिविधि ऐसे समय हुई है जब दिल्ली में मानसून कमजोर पड़ रहा है और जल्द ही लंबे शुष्क दौर की शुरुआत होने वाली है। इससे पता चलता है कि बड़े स्तर पर मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर गरज वाले बादल और अचानक तेज हवाएं बन सकती हैं।
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बारिश कम, लेकिन गरज वाले बादलों ने बढ़ाई हवाओं की रफ्तार
17 सितंबर को सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों में सफदरजंग पर कोई मापने योग्य बारिश दर्ज नहीं हुई। गाजियाबाद में 1 मिमी बारिश हुई, जबकि दिल्ली-एनसीआर के बाकी प्रमुख मौसम केंद्र लगभग सूखे रहे। सुबह 5:30 बजे की सैटेलाइट तस्वीरों में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तरी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में मध्यम से तीव्र संवहन गतिविधि दिखाई दी। इसके अलावा पश्चिमी विक्षोभ से जुड़े कई स्तरों वाले बादल भी उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर मौजूद थे।
थंडरस्क्वॉल उस स्थिति को कहा जाता है जब गरज वाले तूफानी बादलों से नीचे आने वाली ठंडी हवा सतह के पास तेजी से फैलती है। इस हवा के फैलने से अचानक तेज झोंके पैदा हो सकते हैं, भले ही किसी खास मौसम केंद्र पर बारिश बहुत कम या बिल्कुल न हो। उत्तरी हरियाणा के ऊपर बना ऊपरी हवा का परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ से जुड़े बादलों का क्षेत्र दिल्ली के आसपास अलग-अलग स्थानों पर गरज वाले तूफान बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहा था।
गुरुवार को आखिरी हल्की बारिश का मौका, 18 से 23 सितंबर तक सूखा
दिल्ली में 17 सितंबर की दोपहर या शाम को कुछ अलग-अलग स्थानों पर गरज और बिजली के साथ बहुत हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, अधिकांश इलाकों में मौसम आंशिक रूप से बादल छाए रहने वाला रहेगा। इसके बाद 18 से 23 सितंबर के बीच दिल्ली में बारिश की संभावना नहीं है। शुरुआत में आसमान आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं, जबकि 21 सितंबर से मौसम मुख्य रूप से साफ होने लगेगा।
इस दौरान उत्तर-पश्चिमी हवाएं हावी रहने की संभावना है। ये हवाएं वातावरण में मौजूद नमी को धीरे-धीरे कम करने में मदद करेंगी। हालांकि, गुरुवार की आंधी-तूफान गतिविधि के तुरंत बाद हवा में नमी कम होना जरूरी नहीं है। तापमान की बात करें तो 16 सितंबर को सफदरजंग का अधिकतम तापमान 36.8°C रहा, जो सामान्य से करीब 3 डिग्री अधिक था। फरीदाबाद में भी 36.8°C और गाजियाबाद में 36.7°C दर्ज किया गया। इसलिए अगले दिनों में दोपहर गर्म रह सकती है, जबकि रात के तापमान में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
तेज हवाओं से सावधानी, मानसून वापसी के लिए भी बन सकती हैं स्थितियां
अचानक चलने वाले तेज हवा के झोंकों से कमजोर पेड़ों की शाखाएं गिर सकती हैं और खुले में रखी हल्की या असुरक्षित वस्तुएं हट सकती हैं। सड़क और विमान सेवाओं पर भी कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है। पालम में दर्ज 59 किमी प्रति घंटे की हवा की रफ्तार एयरपोर्ट गतिविधियों के लिहाज से खास रही, हालांकि उपलब्ध स्रोतों में किसी विशेष व्यवधान की पुष्टि नहीं हुई है।
आने वाला शुष्क मौसम 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मानसून उसी समय दिल्ली से भी वापस हो जाएगा। दिल्ली से वापसी की पुष्टि के लिए लगातार शुष्क मौसम, वातावरण में नमी में कमी और निचले स्तर पर हवाओं के उपयुक्त पैटर्न जैसे संकेतों की जरूरत होगी।
दिल्ली-एनसीआर के लिए फिलहाल मौसम में एक स्पष्ट बदलाव दिखाई दे रहा है। 17 सितंबर की सुबह तेज थंडरस्क्वॉल और गुरुवार को एक आखिरी छिटपुट बारिश हो सकती है। इसके बाद कई दिनों तक शुष्क मौसम रहने की संभावना है और उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बढ़ सकता है।
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यह पूर्वानुमान 23 सितंबर 2026 तक दिल्ली-एनसीआर के मौसम के लिए है। मानसून वापसी से जुड़े संकेतों में बदलाव होने पर बारिश और शुष्क मौसम के पूर्वानुमान में संशोधन संभव है।















