केरल में फिर सक्रिय होगा मानसून,17–20 सितंबर के बीच भारी बारिश, पहाड़ी जिलों में भूस्खलन का खतरा

By: Mahesh Palawat | Edited By: Mohini Sharma
Sep 17, 2026, 4:00 PM
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केरल में बारिश , फोटो: AI-Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • केरल में 17–20 सितंबर के बीच बारिश बढ़ेगी, जबकि 17–18 सितंबर सबसे सक्रिय रह सकते हैं।
  • कुछ स्थानों पर 24 घंटे में 7–11 सेमी भारी बारिश हो सकती है।
  • उत्तरी और मध्य केरल के कुछ जिलों में भी भारी बारिश संभव है।
  • बारिश से खेती और जलाशयों को फायदा, लेकिन जलभराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 20 सितंबर 2026 तक के लिए है। स्थानीय भारी बारिश रविवार तक जारी रह सकती है।

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इस सप्ताह की शुरुआत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर रहने के बाद अब केरल में एक बार फिर बारिश बढ़ने की संभावना है। 17 से 20 सितंबर के बीच राज्य में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक और तेज हवाओं की भी संभावना है। गुरुवार और शुक्रवार को केरल तथा लक्षद्वीप में कई स्थानों पर बारिश होने की उम्मीद है, जबकि सप्ताहांत में बारिश का दायरा कुछ कम हो सकता है।

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पिछले 24 घंटों में केरल के केवल एक-दो स्थानों पर बारिश हुई। कोझिकोड जिले के उरुमी में 3 सेमी, जबकि इडुक्की और उडुंबन्नूर में 2-2 सेमी बारिश दर्ज की गई। इसके बाद बारिश के पूर्वानुमान में काफी बदलाव हुआ है। 17 और 18 सितंबर को केरल के कई हिस्सों में बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। गुरुवार से रविवार तक अलग-अलग स्थानों पर 7 से 11 सेमी यानी भारी बारिश की संभावना है।

इडुक्की और पथानामथिट्टा समेत कई जिलों पर नजर

भारी बारिश की शुरुआती चेतावनी पथानामथिट्टा और इडुक्की के लिए है। शुक्रवार को भी इडुक्की पर विशेष नजर रहेगी। इसके बाद उत्तरी और मध्य केरल के कुछ जिलों में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। हालांकि, भारी बारिश पूरे राज्य में एक समान नहीं होगी। ज्यादातर जगहों पर सामान्य मानसूनी बारिश हो सकती है, जबकि एक-दो स्थानों पर इससे काफी ज्यादा बारिश दर्ज हो सकती है।

केरल में बारिश बढ़ाने वाली कई मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। उत्तर आंतरिक कर्नाटक से दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु होते हुए मन्नार की खाड़ी तक एक ट्रफ बनी हुई है। ट्रफ कम दबाव वाला एक लंबा क्षेत्र होता है, जहां हवाएं आपस में मिलती हैं और नम हवा ऊपर उठती है। इसके अलावा दक्षिण तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे रायलसीमा पर निचले स्तर का चक्रवाती परिसंचरण भी मौजूद है। ये दोनों सिस्टम दक्षिण भारत में नमी और गरज वाले बादलों को संगठित करने में मदद कर सकते हैं।

पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से बढ़ सकती है बारिश

पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से टकराकर नम हवाओं के ऊपर उठने से केरल के पहाड़ी जिलों में बारिश और बढ़ सकती है। इस प्रक्रिया को ओरोग्राफिक लिफ्टिंग कहा जाता है। इसी वजह से इडुक्की और पथानामथिट्टा जैसे पहाड़ी जिलों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

बारिश की सबसे सक्रिय अवधि 17 और 18 सितंबर रहने की संभावना है। हालांकि, रविवार तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश जारी रह सकती है। 18 और 19 सितंबर को केरल में बिजली चमकने के साथ 30–40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर मौसम में अचानक बदलाव संभव है और अलग-अलग जिलों में बारिश की स्थिति काफी अलग हो सकती है।

बारिश से खेती को फायदा, लेकिन जलभराव और भूस्खलन का खतरा

यह बारिश मिट्टी में नमी बढ़ाने, बागानों की स्थिति सुधारने और छोटे जलाशयों में पानी की आवक बढ़ाने में मदद कर सकती है। यदि बारिश अच्छी तरह से फैली रही तो नारियल, रबर, काली मिर्च, अदरक और हल्दी जैसी फसलों को फायदा हो सकता है। हालांकि, बहुत तेज स्थानीय बारिश से सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है।

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पहाड़ी इलाकों में मिट्टी पहले से संतृप्त या कमजोर होने पर भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। कम दृश्यता और पेड़ों की शाखाएं गिरने से सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। किसानों को खेतों की जल निकासी साफ रखने, केले और बेलदार फसलों को सहारा देने तथा बारिश से ठीक पहले खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह है। यात्रियों को जिला-स्तरीय पूर्वानुमान पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि थोड़ी दूरी पर भी बारिश की स्थिति काफी बदल सकती है।

यह पूर्वानुमान 17 से 20 सितंबर 2026 के चार दिवसीय मौसम दौर के लिए है। सबसे सक्रिय बारिश 17–18 सितंबर को रहने की संभावना है, जबकि अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश रविवार तक जारी रह सकती है। जिला-स्तरीय चेतावनियों में बदलाव होने पर स्थानीय पूर्वानुमान भी बदल सकता है।

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Mahesh Palawat
Vice President of Meteorology & Climate Change
Mr. Palawat, Vice President of Meteorology & Climate Change, is a former Air Force boxer and a passionate weather enthusiast. Dedicated to tracking and predicting weather for the benefit of farmers and the general public, he has been an integral part of Skymet since its inception.
FAQ

केरल में 17 से 20 सितंबर के बीच बारिश का दौर सक्रिय रह सकता है। 17–18 सितंबर सबसे ज्यादा बारिश वाले दिन हो सकते हैं, जबकि अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश रविवार तक जारी रह सकती है।

शुरुआती तौर पर पथानामथिट्टा और इडुक्की पर विशेष नजर है। शुक्रवार को इडुक्की के साथ उत्तरी और मध्य केरल के कुछ जिलों में भी भारी बारिश की संभावना है।

तेज स्थानीय बारिश से सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है। केरल के पहाड़ी क्षेत्रों में संतृप्त मिट्टी के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है। गरज-चमक के साथ 30–40 किमी प्रति घंटे की तेज हवाएं भी चल सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है