बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर के आसार, क्या समय से पहले आएगा मानसून 2026?

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
May 8, 2026, 3:15 PM
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मानसून 2026 अपडेट, फोटो: AI Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • 12-13 मई के बीच बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर बनने की संभावना।
  • सिस्टम डिप्रेशन या कमजोर चक्रवात में बदल सकता है।
  • 16-17 मई के दौरान अंडमान-निकोबार में तेज बारिश संभव।
  • केरल और तमिलनाडु में भारी प्री-मानसून बारिश के संकेत।

12-13 मई 2026 को दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के भूमध्यरेखीय क्षेत्र के निकट निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इस समय भूमध्यरेखा और 5° उत्तरी अक्षांश (5° North latitude) के बीच भूमध्यरेखीय क्षेत्र में एक विस्तृत चक्रवाती परिसंचरण देखा जा रहा है, जो दक्षिण श्रीलंका, कोमोरिन क्षेत्र और मालदीव को कवर कर रहा है। एक लंबी पूर्व-पश्चिम ट्रफ इस परिसंचरण (circulation) के दोनों ओर फैली हुई है, यह ट्रफ एक तरफ दक्षिण-पूर्व अरब सागर और हिंद महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्रों तक फैली हुई है, जबकि दूसरी ओर दक्षिण बंगाल की खाड़ी तक इसका प्रभाव बना हुआ है। इस परिसंचरण के प्रभाव से अगले सप्ताह की शुरुआत में समुद्र के ऊपर एक स्थिर निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है।

डिप्रेशन और साइक्लोन बनने के संकेत

गौरतलब है, मौसम प्रणाली यानी निम्न दबाव बनने के अगले दिन यह ज्यादा मजबूत हो सकता है। इसके बाद अगले 48 घंटों में इसके डिप्रेशन या गहरे डिप्रेशन में बदलने की संभावना है। हालांकि अभी किसी बड़े निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन समुद्री परिस्थितियाँ और मौसमी पैटर्न इस सिस्टम को कमजोर चक्रवाती तूफान में बदलने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। स्काईमेट और विशेषज्ञ अगले 3 दिनों तक इस सिस्टम की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखेंगे, क्योंकि इसके मजबूत होने की स्थिति में दक्षिण भारत और तटीय इलाकों पर असर बढ़ सकता है।

अंडमान सागर में मानसून की दस्तक करीब

रिकॉर्ड के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर 20 मई के आसपास दक्षिण अंडमान सागर में प्रवेश करता है। इसके बाद यह तेजी से आगे बढ़ते हुए 22 मई तक उत्तर अंडमान सागर, पोर्ट ब्लेयर और माया बंदर तक पहुंच जाता है। इसके बाद मानसून को केरल पहुंचने में लगभग 10 से 12 दिनों का समय लगता है और सामान्य तौर पर 1 जून के आसपास मानसून केरल में दस्तक देता है। हालांकि ये तिथियाँ अनुमानित होती हैं और हर साल मौसम की परिस्थितियों के अनुसार बदलती हैं। इस बार बंगाल की खाड़ी में बनने वाला संभावित लो प्रेशर मानसून की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है।

15 मई के बाद बढ़ेगी मानसूनी गतिविधि

लो प्रेशर बनने की स्थिति में बंगाल की खाड़ी के ऊपर भूमध्यरेखीय हवाएं और मजबूत हो जाएंगी। दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का प्रवाह 15 मई के बाद अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक तेजी से पहुंच सकता है। 16 और 17 मई के बीच अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियाँ देखने को मिल सकती हैं। यह वही समय माना जा रहा है जब मानसून की धाराएं अंडमान सागर में प्रवेश कर सकती हैं। अगर ऐसा होता है तो यह दक्षिण-पश्चिम मानसून की आधिकारिक शुरुआत का संकेत होगा।

केरल और तमिलनाडु में प्री-मानसून बारिश

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार कुछ दुर्लभ मौकों पर मानसून ने अंडमान सागर और केरल तट पर लगभग एक साथ दस्तक दी है। आमतौर पर बंगाल की खाड़ी वाला मानसून भाग अरब सागर शाखा की तुलना में ज्यादा तेजी से आगे बढ़ता है। दोनों क्षेत्रों में एक साथ मानसून पहुंचने के लिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों तरफ भूमध्यरेखीय हवाओं का अचानक और मजबूत होना जरूरी होता है। बंगाल की खाड़ी में संभावित डिप्रेशन ऐसी परिस्थितियाँ बना सकता है। इसके असर से 14 से 16 मई के बीच केरल और तमिलनाडु में भारी प्री-मानसून बारिश होने की संभावना है। अगर मौसम प्रणाली मजबूत बनी रही, तो इस बार मानसून तय समय से पहले भारत के मुख्य भूभाग में प्रवेश कर सकता है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया बनने की संभावना है, जो आगे मजबूत हो सकता है।

हाँ, समुद्री परिस्थितियां इसके डिप्रेशन या कमजोर चक्रवाती तूफान बनने के अनुकूल हैं।

मानसून 15 मई के बाद अंडमान सागर में प्रवेश कर सकता है और केरल में समय से पहले पहुंचने की संभावना है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है