अंडमान सागर में मानसून की एंट्री पर सस्पेंस, अलग-अलग संकेत दे रहे मौसम मॉडल
मुख्य मौसम बिंदु
- सामान्यतः मानसून 20 मई के आसपास दक्षिण अंडमान पहुंचता है।
- कुछ मॉडल्स जल्दी मानसून आने के संकेत दे रहे हैं।
- बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में सिस्टम बनने की संभावना।
- अगले 2-3 दिनों में मानसून की स्थिति और स्पष्ट होगी।
दक्षिण-पश्चिम मानसून आमतौर पर 20 मई के आसपास दक्षिण अंडमान सागर में प्रवेश करता है। इसके बाद यह तेजी से आगे बढ़ते हुए 22 मई तक पोर्ट ब्लेयर और उत्तर अंडमान सागर तक पहुंच जाता है। आमतौर पर इसके बाद मानसून को केरल पहुंचने में करीब 10 से 12 दिन लगते हैं और इसके आगमन की सामान्य तिथि 1 जून मानी जाती है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ये तारीखें पूरी तरह निश्चित नहीं होतीं है। कई बार मानसून अंडमान सागर और केरल तट पर लगभग एक साथ या बहुत कम अंतराल में भी पहुंचता है। इसलिए हर साल मानसून की चाल अलग हो सकती है।
बंगाल की खाड़ी वाला मानसून तेजी से बढ़ता है
मानसून की दो मुख्य शाखाएं होती हैं, जिनमें पहली बंगाल की खाड़ी शाखा और दूसरी अरब सागर शाखा होती है। बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ने वाली शाखा सामान्यतः ज्यादा तेज गति से आगे बढ़ती है, जबकि अरब सागर से केरल की तरफ आने वाली शाखा धीमी रहती है। अगर मानसून का आगमन अंडमान और केरल में लगभग एक साथ होता है, तो इसके लिए बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों क्षेत्रों में एक साथ तेज और मजबूत भूमध्य रेखा को पार करने वाली हवाओं (Cross-Equatorial) हवाओं का विकसित होना जरूरी होता है। यानी मानसून का धीरे-धीरे आगे बढ़ने के बजाय अचानक मजबूत होना जरूरी है।
कभी बहुत जल्दी तो कभी काफी देर से पहुंचा मानसून
भारत में मानसून के आगमन का रिकॉर्ड देखें तो कई बार इसमें बड़ा अंतर देखने को मिला है। वर्ष 2004 में मानसून 18 मई को ही केरल पहुंच गया था, जो बहुत जल्दी माना जाता है। वहीं 1990 में मानसून का आगमन 19 मई को हुआ था। दूसरी तरफ 1972 में मानसून काफी देर से पहुंचा और 18 जून तक केरल नहीं पहुंच पाया था। हालांकि वर्ष 2000 के बाद से मानसून 8 जून से ज्यादा देर से कभी नहीं पहुंचा। पिछले साल यानी 2025 में मानसून दक्षिण अंडमान सागर में 13 मई को पहुंच गया था और 24 मई तक केरल पहुंच गया था। यानी दोनों जगह सामान्य समय से करीब एक सप्ताह पहले मानसून का आगमन हुआ था।
अगले 2-3 दिनों में साफ होगी मानसून की तस्वीर
फिलहाल विभिन्न मौसम मॉडल्स मानसून की प्रगति को लेकर अलग-अलग संकेत दे रहे हैं। NCEP GFS मॉडल के अनुसार 12 मई 2026 को दक्षिण-पूर्व भूमध्यरेखीय हिंद महासागर में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बन सकता है। यह सिस्टम उत्तर दिशा की ओर बढ़ते हुए मजबूत होगा और 14-15 मई तक मध्य बंगाल की खाड़ी में पहुंच सकता है। स्काइमेट का GEFS मॉडल भी इसी तरह के विकास का समर्थन कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो मानसून जल्दी आगे बढ़ सकता है।
लेकिन कुछ अन्य मौसम मॉडल्स इस संभावना से सहमत नहीं हैं। इन मॉडलों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत सिस्टम बनने के संकेत फिलहाल नहीं हैं। इसके बजाय ये मॉडल 15 मई के आसपास श्रीलंका के पास भूमध्यरेखीय क्षेत्र (equatorial region) में निम्न दबाव बनने की संभावना जता रहे हैं। यह सिस्टम आगे बढ़ते हुए मालदीव और कोमोरिन क्षेत्र से होकर अरब सागर के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में केरल में मानसून आने से पहले भारी प्री-मानसून बारिश देखने को मिल सकती है। फिलहाल मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 2 से 3 दिनों तक इंतजार करना होगा, तभी मानसून की वास्तविक चाल और आगमन को लेकर स्थिति साफ होगी।
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