देशभर में फिर तेज हुआ मानसून, पिछले 4 दिनों की बारिश से कम हुआ वर्षा घाटा, अभी और बरसेंगे बादल

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Jul 20, 2026, 5:06 PM
WhatsApp icon
thumbnail image

मानसून 2026 अपडेट, फोटो: AI-Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • जून का 40% बारिश घाटा जुलाई की शुरुआत में घटकर 14% तक पहुंचा।
  • 1 जून से 19 जुलाई तक देश में मौसमी वर्षा घाटा घटकर 23% रह गया है।
  • अगले दो दिनों में पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना।
  • 26 जुलाई के बाद मानसूनी ट्रफ हिमालय की तलहटी की ओर खिसक सकती है।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 26 जुलाई 2026 तक उपलब्ध मौसमीय परिस्थितियों पर आधारित है और निम्न दबाव क्षेत्र, चक्रवाती परिसंचरण या मानसूनी ट्रफ में बदलाव होने पर संशोधित किया जा सकता है।

बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र (Low Pressure Area) और उसके देश के अंदर आगे बढ़ने के कारण जुलाई की शुरुआत में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। इसी वजह से जून के दौरान बना करीब 40% बारिश का घाटा घटकर 9 जुलाई तक केवल 14% रह गया था। लेकिन 9 जुलाई के बाद से 16 जुलाई तक देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश कमजोर पड़ गई। इस दौरान रोजाना बारिश सामान्य से कम रही, जिससे बारिश का घाटा हर दिन 1 से 2 प्रतिशत बढ़ता गया। जुलाई का पहला सप्ताह जहां सामान्य से अधिक बारिश वाला रहा, वहीं दूसरे सप्ताह में बारिश कम होने से यह बढ़त खत्म हो गई। इसके चलते 1 जून से 16 जुलाई के बीच पूरे देश में मौसमी बारिश का घाटा बढ़कर 24% हो गया। हालांकि पिछले चार दिनों से यह घाटा और नहीं बढ़ा है।

1200X630 ani HINDI (11).jpg

देशभर में बारिश की स्थिति में सुधार

1 जून से 19 जुलाई के बीच पूरे देश में 253.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 332.5 मिमी है। यानी देश में अब भी 23–24% बारिश की कमी बनी हुई है। पिछले चार दिनों में कुल 26.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य रूप से 38.9 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। यानी इन चार दिनों में भी लगभग 30% की कमी रही। हालांकि राहत की बात यह है कि लगातार चार दिनों से बारिश का घाटा बढ़ना रुक गया है। आज पहली बार हाल के दिनों में देशभर की दैनिक औसत बारिश सामान्य से अधिक दर्ज की गई। जहां सामान्य बारिश 9.6 मिमी होनी चाहिए थी, वहीं वास्तविक बारिश 10 मिमी रिकॉर्ड हुई। इसके चलते देश में मौसमी बारिश का कुल घाटा 24% से घटकर 23% रह गया है।

अगस्त की शुरुआत में फिर कमजोर पड़ सकता है मानसून

अगले दो दिनों के दौरान पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा विदर्भ और तेलंगाना में भी मध्यम बारिश होने का अनुमान है। इसके बाद चक्रवाती परिसंचरण पश्चिम की ओर बढ़ेगा, जिससे बारिश का मुख्य क्षेत्र मध्य और उत्तर मध्य प्रदेश, पश्चिम उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, कोंकण और गोवा की ओर शिफ्ट हो जाएगा। वहीं पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली समेत उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भी छिटपुट बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

26 जुलाई के बाद मानसूनी ट्रफ के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने की संभावना है। इसके कारण बारिश की मुख्य गतिविधियां तराई और इंडो-गंगा के मैदानी क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो जाएंगी। इसके बाद अगस्त की शुरुआत में मानसून में एक और 'ब्रेक' आने की संभावना है, जिससे देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां फिर कमजोर पड़ सकती हैं।

पूर्वानुमान वैधता: यह पूर्वानुमान 20 जुलाई 2026 तक उपलब्ध मौसमीय आंकड़ों पर आधारित है। यदि बंगाल की खाड़ी के निम्न दबाव क्षेत्र, चक्रवाती परिसंचरण, मानसूनी ट्रफ की स्थिति या इसकी पश्चिम और उत्तर की ओर होने वाली गति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव होता है, तो इस पूर्वानुमान में संशोधन किया जा सकता है।

author image
AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।

हां, अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होने से मौसमी वर्षा घाटा और कम होने की संभावना है।

मौसम संकेतों के अनुसार अगस्त की शुरुआत में मानसून में एक और 'ब्रेक' आ सकता है, जिससे अधिकांश हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कुछ समय के लिए कमजोर पड़ सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है

Suggested Resources