मानसून फिर से होगा एक्टिव,अगले हफ्ते बंगाल, बिहार और झारखंड में दस्तक संभव, होगी झमाझम बारिश

By: Skymet team | Edited By:
Jun 9, 2025, 4:15 PM
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मॉनसून की प्रगति पिछले कुछ समय से ठहरी हुई है। इसका पश्चिमी सिरा मुंबई पर और पूर्वी हिस्सा सिक्किम व उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में अटका हुआ है। बंगाल की खाड़ी (BoB) में दो नए मॉनसूनी सिस्टम बनने की संभावना है, जो मॉनसून को नई रफ्तार देंगे। इनके प्रभाव से जिन इलाकों में मॉनसून पहले ही पहुंच चुका है, वहां बारिश दोबारा लौटेगी, साथ ही पूर्वी भारत में भी तेजी से आगे बढ़ेगा।

11 जून को आंध्र तट के पास चक्रवाती परिसंचरण

11 जून को बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य हिस्से में आंध्र प्रदेश तट के पास एक चक्रवाती परिसंचरण विकसित होने की संभावना है। यह सिस्टम जल्द ही भूमि की ओर बढ़ेगा और आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और कर्नाटक में बारिश लाएगा। इसके प्रभाव से कोकण और गोवा में भी सप्ताहांत के आसपास भारी बारिश हो सकती है। मुंबई में 14 से 16 जून के बीच मॉनसून की पहली झलक मिलने की संभावना है।

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14 जून को उत्तरी बंगाल की खाड़ी में गतिविधि

एक और सिस्टम 14 जून को उत्तरी बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बनने की संभावना है। यह प्रणाली ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के रास्ते आगे बढ़ेगी। इसके चलते मॉनसून बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आगे बढ़ेगा और भारी बारिश की पट्टी पश्चिम की ओर खिसकेगी, जिससे मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में अच्छी बारिश होगी। मुंबई में अगला बारिश का दौर सप्ताह के मध्य के बाद शुरू हो सकता है।

दोनों सिस्टम मिलकर देंगे मानसून को नई रफ्तार

इन दोनों सिस्टमों के प्रभाव से मॉनसून उन इलाकों में दोबारा सक्रिय होगा जहां यह प्रबल आगमन के बाद सुस्त हो गया था। इसके साथ ही मॉनसून की उत्तर सीमा (NLM) पश्चिम तट के साथ गुजरात तक पहुंचेगी, महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों को कवर करेगी, और छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, पूर्वी मध्य प्रदेश के बड़े हिस्सों में फैल जाएगी। साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी इसकी शुरुआती दस्तक होगी।

लू से राहत की उम्मीद

इस मॉनसूनी प्रगति के कारण उत्तर भारत में जारी लू के हालात में भी कमी आएगी। तापमान में गिरावट आएगी और गर्मी से जूझ रहे राज्यों को राहत मिलने की पूरी संभावना है।

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Skymet team

डिस्क्लेमर: यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

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