Southwest Monsoon 2025: मानसून 108% बारिश के साथ हुआ समाप्त, जून से सितम्बर तक हर महीने औसत से ज्यादा बारिश
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून का आधिकारिक समय 01 जून से 30 सितम्बर तक माना जाता है। आज सुबह 8:30 बजे तक हुई बारिश के साथ मानसून 2025 का आधिकारिक समापन हो गया। इस साल मानसून का असाधारण रहा, क्योंकि इस सीजन में लंबी अवधि के औसत (LPA) का 108% बारिश हुई है। गौरतलब है, लगातार दूसरे साल मानसून सामान्य से ऊपर रहा है।
7 साल का रिकॉर्ड
2019 से लेकर अब तक पिछले 7 सालों में सिर्फ 2023 को छोड़कर बाकी सभी सालों में मानसून सामान्य या सामान्य से अधिक रहा है। 2023 में एल-नीनो (El Niño) के कारण बारिश कम हुई थी, जैसा 2017 और 2018 में भी हुआ था।
चारों महीनों में सामान्य से अधिक बारिश
मानसून 2025 की सबसे बड़ी खासियत रही कि जून, जुलाई अगस्त और सितम्बर चारों महीनों में वर्षा सामान्य से अधिक दर्ज की गई। जिसमें जून में 109%, जुलाई में 105%, अगस्त में 105% और सितम्बर में 116% बारिश रिकॉर्ड की गई थी। पिछले 75 वर्षों (1950 से अब तक) में ऐसा रिकॉर्ड केवल साल 2007, 1975, 1961 और 1956 में ही देखने को मिला था। हालांकि, फर्क ये है कि इन वर्षों में मानसून ‘अत्यधिक वर्षा (Excess)’ की श्रेणी में था, जबकि मानसून 2025 ‘सामान्य से अधिक (Above Normal)’ श्रेणी में रहेगा।
जून-सितम्बर से आगे भी जारी रहता है असर
हालाँकि मानसून की आधिकारिक अवधि जून से सितम्बर तक सीमित मानी जाती है, लेकिन वास्तव में इसका असर मध्य मई से मध्य अक्टूबर तक यानी लगभग 5 महीने रहता है। इस बार भी 1 से 15 अक्टूबर 2025 के बीच देश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। यह बारिश उन इलाकों में भी होगी, जहाँ से आधिकारिक रूप से मानसून की विदाई घोषित हो चुकी है।
मानसून 2025 की खास बातें
मानसून 2025 में कुछ अनोखी बातें दर्ज की गईं हैं-
• मानसून में कोई टिपिकल ब्रेक (Break in Monsoon) नहीं हुआ। हाँ, अगस्त के पहले हिस्से में थोड़ी कमी जरूर रही, लेकिन सीज़न के शुरुआती अधिशेष ने उस कमी को पूरा कर दिया।
• पूरे सीज़न में सिर्फ 9% क्षेत्र ही बारिश की कमी वाला रहा है, यानी बहुत ही कम हिस्सों में कमी रही।
• जुलाई और अगस्त जैसे कोर मानसून महीनों जुलाई और अगस्त में मध्य भारत के वर्षा-निर्भर इलाकों में अच्छी बारिश हुई।
• मानसून सीजन की शुरुआत में मराठवाड़ा और रायलसीमा में बारिश की कमी दिखी थी, लेकिन बाद में अच्छी बारिश ने इस कमी को पूरा कर अधिशेष (surplus) में बदल दिया।
• पूरे मानसून सीजन में बिहार कमजोर कड़ी रहा, यहां राज्य पूरे सीजन लगभग 30% बारिश की कमी से जूझता रहा।
• लगातार कई वर्षों की तरह इस बार भी पूर्वोत्तर राज्यों में मानसून कमजोर रहा।
मुंबई और कोलकाता में देर से विदाई
इस बार मानसून के लंबे ठहराव के कारण मुंबई और कोलकाता से मानसून की वापसी क्रमशः 10 और 15 अक्टूबर के आसपास होगी। उत्तर भारत के मैदानों में अतिरिक्त वर्षा रबी फसलों के लिए अच्छा संकेत है, बशर्ते खरीफ फसल की कटाई और सुरक्षित भंडारण पूरा हो चुका हो।





