उत्तर भारत में लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, पहाड़ी राज्यों में बदलेगा मौसम, जानें किन जगहों पर होगी बारिश-बर्फबारी
मुख्य मौसम बिंदु
- 7 मार्च को पश्चिमी विक्षोभ से पहाड़ी राज्यों में मौसम बदलेगा।
- 9 से 12 मार्च के बीच दूसरा और ज्यादा मजबूत सिस्टम सक्रिय रहेगा।
- बढ़ते तापमान से मैदानों में आंधी, धूल भरी हवा और हल्की बारिश संभव।
- 14–15 मार्च के आसपास एक और सिस्टम आने के शुरुआती संकेत।
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उत्तरी भारत में जैसे-जैसे प्री-मानसून मौसम की शुरुआत होती है, वैसे-वैसे पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) का रास्ता थोड़ा उत्तर की ओर खिसकने लगता है और इनका असर अधिकतर पहाड़ी इलाकों पर ही देखने को मिलता है। मैदानी क्षेत्रों को इन प्रणालियों से सीधे बहुत कम प्रभाव मिलता है, लेकिन इनके साथ बनने वाले द्वितीयक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण (induced circulation) के कारण कभी-कभी मैदानों में भी मौसम बदल जाता है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इस समय जो आंधी-तूफान, धूल भरी आंधी या हल्की बारिश देखने को मिलती है, वह इसी तरह की परिस्थितियों का परिणाम होती है। इसके साथ-साथ बढ़ता तापमान भी इन गतिविधियों को बढ़ाने में ट्रिगर का काम करता है, जिससे मौसम की तीव्रता और फैलाव बढ़ सकता है।
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6-7 मार्च को पहाड़ों पर असर, 9 मार्च को आएगा अगला पश्चिमी विक्षोभ
वर्तमान में जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी वायुमंडलीय प्रणाली के रूप में सक्रिय है। यह सिस्टम लगभग दो दिनों तक बना रहेगा और 6 तथा 7 मार्च को पहाड़ी क्षेत्रों के मौसम को प्रभावित करेगा। इसके बाद 9 मार्च को एक और पश्चिमी विक्षोभ तेजी से आएगा। यह प्रणाली पहले वाले सिस्टम की तुलना में अधिक समय तक सक्रिय रहेगी और 12 मार्च तक बनी रह सकती है। हालांकि इसका प्रभाव भी मुख्य रूप से पहाड़ी राज्यों के मध्य और ऊंचाई वाले इलाकों में ही देखने को मिलेगा। लेकिन यह सिस्टम पिछले वाले की तुलना में थोड़ा अधिक मजबूत होगा, इसलिए इससे मौसम गतिविधियों की तीव्रता और क्षेत्रफल दोनों अधिक हो सकते हैं।
मैदानों में शुरू हो सकती है प्री-मानसून गतिविधि
मौसम मॉडल की विश्वसनीयता आमतौर पर 4 से 5 दिन से आगे कम हो जाती है, लेकिन शुरुआती संकेत यह बता रहे हैं कि अगले सप्ताहांत यानी 14-15 मार्च 2026 के आसपास एक और पश्चिमी विक्षोभ आ सकता है। इस प्रणाली के साथ मैदानी इलाकों में एक प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण बनने की संभावना भी है। इस दौरान तापमान में लगातार हो रही वृद्धि भी मौसम गतिविधियों को तेज करने में भूमिका निभा सकती है। इसके कारण उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत हो सकती है, हालांकि शुरुआत में यह गतिविधियां हल्की से मध्यम स्तर की ही रहने की संभावना है। मौसम विभाग को इस पूर्वानुमान को और स्पष्ट करने के लिए अगले सप्ताह की शुरुआत में नया अपडेट जारी करना पड़ सकता है।
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