दिल्ली में भीषण गर्मी, मार्च के पहले हफ्ते में 50 साल का तापमान रिकॉर्ड टूटा
मुख्य मौसम बिंदु
- 7 मार्च 2026 को दिल्ली में 35.7°C तापमान दर्ज हुआ
- तापमान सामान्य से लगभग 7°C अधिक रहा।
- सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की कमी और साफ आसमान से गर्मी बढ़ी।
- 14–20 मार्च के बीच प्री-मानसून गतिविधियों से मौसम बदल सकता है।
Advertisement
दिल्ली में मार्च 2026 की शुरुआत से ही असामान्य गर्मी देखने को मिल रही है। राजधानी के बेस स्टेशन सफदरजंग वेधशाला (Safdarjung Observatory) में 7 मार्च 2026 को अधिकतम तापमान 35.7°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 7.3°C ज्यादा है। यह तापमान पिछले 50 वर्षों में मार्च के पहले सप्ताह का सबसे अधिक तापमान बन गया है। इससे पहले मार्च के पहले सप्ताह में सबसे ज्यादा तापमान 34.8°C दर्ज किया गया था, जो 1999 में रिकॉर्ड हुआ था। पिछले तीन दिनों से दिल्ली में लगातार अधिकतम तापमान 35°C से ऊपर दर्ज हो रहा है। आज तापमान में हल्की गिरावट हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद पारा 35°C के आसपास या उससे ऊपर रहने की संभावना है।
Advertisement
सामान्य से ज्यादा गर्मी की वजह क्या है?
आमतौर पर मार्च महीने की शुरुआत में दिल्ली का अधिकतम तापमान 27 से 28°C के आसपास रहता है और महीने के अंत तक बढ़कर 33 से 34°C तक पहुंचता है। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। जो तापमान सामान्यतः मार्च के अंत में देखने को मिलता है, वह महीने की शुरुआत में ही दर्ज किया जा रहा है। इसकी मुख्य वजह सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की कमी, साफ आसमान और दिन-रात लगातार धूप रहना है, जिससे गर्मी तेजी से जमा हो रही है और तापमान बढ़ रहा है। इसके अलावा फरवरी महीने में भी बारिश लगभग नहीं हुई। आखिरी अच्छी बारिश गणतंत्र दिवस (Republic Day) के आसपास देखने को मिली थी, उसके बाद मौसम काफी हद तक शुष्क बना हुआ है।
आगे मौसम में बदलाव के संकेत
फिलहाल एक पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ी क्षेत्रों से गुजर रहा है, जिसके कारण जम्मू, पठानकोट और चंडीगढ़ जैसे इलाकों में बादल छाए हुए हैं। हालांकि दक्षिण की ओर इसका असर बहुत कम है और दिल्ली के मौसम पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। सतह और निचले स्तर की हवाएं हल्की रहेंगी। कमजोर हवाओं के कारण तापमान बढ़ने की प्रवृत्ति रहती है, लेकिन पहाड़ों और तराई क्षेत्रों में हो रही मौसम गतिविधियों के कारण तापमान में अचानक तेज उछाल की संभावना नहीं है।
मौसम मॉडल के शुरुआती संकेत बताते हैं कि 14 से 16 मार्च 2026 के बीच एक सक्रिय मौसम प्रणाली आ सकती है। पश्चिमी विक्षोभ और उससे बनने वाला प्रेरित चक्रवात मिलकर प्री-मानसून गतिविधियों की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि इस बारे में अभी पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी करना थोड़ा जल्दबाजी होगा, क्योंकि प्री-मानसून के दौरान मौसम मॉडल की विश्वसनीयता कम हो जाती है और सटीक अनुमान सामान्यतः 2-3 दिन पहले ही मिल पाता है। फिर भी संभावना है कि 14 से 20 मार्च के बीच मौसम में बदलाव दिखाई दे और प्री-मानसून की शुरुआत के संकेत मिलें।















