फरवरी में देशभर में बारिश कम रहने की संभावना, उत्तर भारत सूखे की चपेट में, जानें क्यों?
मुख्य मौसम बिंदु
- फरवरी में सर्दियों की बारिश सामान्य से काफी कम रहने के आसार
- पश्चिमी विक्षोभ का असर ज्यादातर पहाड़ों तक सीमित
- पूर्वी और मध्य भारत में बड़ा वर्षा घाटा
- पूरे विंटर सीजन में 40% से ज्यादा कमी संभव
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फरवरी उत्तर भारत में सर्दियों का सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना माना जाता है। लेकिन पिछले छह वर्षों से सर्दियों की बारिश ज्यादातर कमजोर ही रही है। वर्ष 2021 और 2023 में देशभर में सर्दियों की बारिश में 67–68% तक की भारी कमी दर्ज हुई थी। पिछले साल भी फरवरी में कुल मिलाकर 30% की कमी रही। कई सालों से ऐसा नहीं हुआ कि पहाड़ों और मैदानी इलाकों में एक साथ अच्छी बारिश हुई हो। 2022 और 2024 में बारिश थोड़ी बेहतर रही, लेकिन तब भी हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में प्रदर्शन कमजोर रहा। उत्तर भारत में सामान्य फैलाव और अच्छी तीव्रता वाली सर्दियों की बारिश अभी भी “इच्छा सूची” में ही है। इस साल की फरवरी भी पुराने रिकॉर्ड जैसी कमजोर रहने की संभावना है और पिछले कुछ वर्षों में सबसे खराब महीनों में शामिल हो सकती है।
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पश्चिमी विक्षोभ आए, पर असर सिर्फ पहाड़ों तक सीमित
पिछले करीब दो हफ्तों में कई पश्चिमी विक्षोभ पहाड़ी इलाकों से गुजर चुके हैं। फिर भी मौसम गतिविधियां हल्की रहीं और सिर्फ पहाड़ों तक सीमित रहीं। 9–10 फरवरी और 16–19 फरवरी 2026 के बीच पहाड़ों में बर्फबारी और बारिश के दो दौर आ सकते हैं। मैदानी इलाकों में 10 फरवरी को हल्की और छिटपुट गतिविधि हो सकती है, इसके बाद लंबा ब्रेक रहेगा। महीने के तीसरे सप्ताह में आने वाला अगला सिस्टम भी मौसम गतिविधि को फिर से पहाड़ों तक ही सीमित रखेगा।
पूर्वी भारत में भी सूखा हाल, कई राज्य पूरी तरह शुष्क
इस सीजन में पूर्वी भारत के राज्यों में भी मौसम गतिविधियां बहुत कमजोर रही हैं। यह पूरा क्षेत्र बड़े बारिश घाटे में चल रहा है। 1 जनवरी से 5 फरवरी 2026 के बीच बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में लगभग पूरी तरह सूखा मौसम रहा है। पूर्वोत्तर भारत में भी स्थिति अलग नहीं है और वहां भी ज्यादातर समय मौसम शुष्क ही बना रहा।
मध्य भारत में 77% बारिश की कमी, आगे और बढ़ सकता है घाटा
देश के मध्य हिस्सों में भी भारी बारिश की कमी दर्ज की गई है। यह क्षेत्र पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण प्रायद्वीप से आने वाले मौसम सिस्टम की पहुंच से काफी दूर रहता है। इसी वजह से मध्य भारत में अब तक करीब 77% बारिश की कमी हो चुकी है। फरवरी में यह कमी और बढ़ने की आशंका है।
दक्षिण भारत में भी मौसम सुस्त, प्री-मानसून अभी दूर
दक्षिण भारत से पूर्वोत्तर मानसून पहले ही लौट चुका है और प्री-मानसून गतिविधियां अभी शुरू नहीं हुई हैं। इसलिए फरवरी में यहां भी मौसम गतिविधियां कमजोर ही रहेंगी। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना इस सीजन में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य हैं। उत्तर और तटीय कर्नाटक में भी हालात लगभग ऐसे ही खराब बने हुए हैं।
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फरवरी जनवरी से भी खराब रह सकती है
कुल मिलाकर देशभर में सर्दियों के महीनों में बहुत कम बारिश होने का खतरा दिख रहा है। फरवरी, जनवरी से भी ज्यादा खराब रह सकती है, जबकि जनवरी में पहले ही 31% बारिश की कमी दर्ज हो चुकी है। जितनी ज्यादा कमी होती जाती है, बाद में उसकी भरपाई करना उतना ही मुश्किल हो जाता है। पूरे सर्दी सीजन के अंत तक कुल बारिश की कमी 40% से भी ज्यादा पहुंच सकती है।
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