नेपाल में भीषण बाढ़ का बिहार और पूर्वी यूपी पर असर, गंडक नदी का बढ़ सकता है जलस्तर

By: Mahesh Palawat | Edited By: Mohini Sharma
Aug 27, 2026, 12:30 PM
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मुख्य मौसम बिंदु

  • नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ा सकता है।
  • बिहार में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज सबसे महत्वपूर्ण निगरानी वाले क्षेत्र हैं।
  • महाराजगंज, कुशीनगर और देवरिया समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों पर भी नजर जरूरी है।
  • कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा अलग नदी तंत्र हैं; उनकी बाढ़ का आकलन अलग से किया जाएगा।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम अपडेट अगले 24–48 घंटे तक मान्य है। नई बारिश और गंडक का जलस्तर स्थिति तय करेंगे।

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नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने हिमालयी देश के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। इस घटना के बाद भारत, खासकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में नदियों के जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, यह सामान्य मानसूनी बाढ़ जैसी घटना नहीं थी, जो केवल बहुत ज्यादा बारिश के कारण आती है। शुरुआती आकलन के अनुसार, इस आपदा की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ऊपरी ल्हेंडे खोला (Lhende Khola) बेसिन में हुई। माना जा रहा है कि ऊंचाई वाले इलाके में बर्फ और चट्टानों का एवलॉन्च या उससे जुड़ा कोई बड़ा भूस्खलन/ढहाव हुआ, जिससे नदी का रास्ता कुछ समय के लिए रुक गया और पानी एक बड़े हिस्से में जमा होता गया। जब यह प्राकृतिक अवरोध अचानक टूट गया, तो बड़ी मात्रा में पानी के साथ बर्फ, चट्टानें, मिट्टी और मलबा तेजी से नीचे की ओर बह निकला।

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बहुत तेजी से बढ़ा नदी का जलस्तर

बाढ़ का यह तेज प्रवाह ल्हेंडे खोला, भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों से होकर आगे बढ़ा। इसके बाद त्रिशूली नदी देवघाट में काली गंडकी से मिलती है और दोनों मिलकर नारायणी नदी बनाती हैं। यही नारायणी भारत में बिहार के वाल्मीकिनगर के पास प्रवेश करती है और यहां इसे गंडक नदी कहा जाता है। यही नदी तंत्र नेपाल की इस आपदा को बिहार से जोड़ता है। हालांकि, नेपाल के ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में तबाही मचाने वाली बाढ़ की लहर भारत तक उसी ताकत और स्वरूप में नहीं पहुंचेगी। नीचे की ओर बढ़ते हुए बाढ़ की लहर फैलती है और उसकी तीव्रता कुछ कम होती जाती है। इसके बावजूद नेपाल से आने वाला अतिरिक्त पानी गंडक का जलस्तर काफी बढ़ा सकता है, खासकर तब जब बिहार की कई अन्य नदियां पहले से ही ऊंचे स्तर पर बह रही हैं।

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नेपाल में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र भोटे कोशी-त्रिशूली कॉरिडोर के आसपास रहे हैं। इनमें खासतौर पर रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिले प्रभावित हुए हैं, जबकि असर नीचे की ओर चितवन तक देखा गया है। कई पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी संरचनाएं क्षतिग्रस्त या बह गई हैं। नदी के जलस्तर में बेहद तेजी से हुई वृद्धि और बाढ़ के साथ बड़ी मात्रा में चट्टानों, कीचड़ और मलबे के बहने के कारण यह घटना बेहद विनाशकारी बन गई।

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बिहार में किन इलाकों पर सबसे ज्यादा खतरा?

भारत में इस स्थिति पर सबसे करीबी नजर बिहार में रखने की जरूरत है। गंडक नदी पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर क्षेत्र से बिहार में प्रवेश करती है और इसके बाद कई जिलों से होकर गुजरती है या उन्हें प्रभावित करती है। सबसे ज्यादा चिंता पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज को लेकर है। इसके बाद सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में भी नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखना जरूरी है। कुछ स्थानों पर गंडक पहले ही ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि नेपाल से कितना पानी बिहार की ओर आता है, नदी की स्थिति कैसी रहती है, तटबंध कितने सुरक्षित रहते हैं और अगले कुछ दिनों के दौरान पूरे नदी बेसिन में कितनी बारिश होती है।

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पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी निगरानी जरूरी है। खासतौर पर महाराजगंज, कुशीनगर और देवरिया गंडक नदी बेसिन से जुड़े होने के कारण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि नेपाल से आई यह विशेष बाढ़ की लहर बिहार की सभी प्रमुख नदियों में बाढ़ के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं है। कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा अलग-अलग नदी तंत्र हैं। इन नदियों की स्थिति का आकलन उनके अपने ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई बारिश और नदी के बहाव के आधार पर अलग से करना होगा।

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सिर्फ बारिश नहीं, हिमालयी भूगोल भी बना वजह; अगले 24–48 घंटे अहम

इस घटना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बाढ़ की भयावहता को केवल बारिश के आधार पर नहीं समझा जा सकता। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आपदा की शुरुआत अचानक हुए ऊंचाई वाले बर्फ-चट्टान संबंधी घटना और नदी के अस्थायी रूप से अवरुद्ध होने से जुड़ी हो सकती है। इससे हिमालयी बाढ़ पूर्वानुमान की चुनौती भी सामने आती है। किसी स्थान पर असाधारण रूप से भारी बारिश नहीं होने के बावजूद अचानक बहुत तेज बाढ़ विकसित हो सकती है। इसलिए पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान के साथ सैटेलाइट निगरानी, ग्लेशियर और बर्फ की निगरानी, नदी स्तर मापने वाले सेंसर और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

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भारत में आगे की स्थिति मुख्य रूप से अगले 24–48 घंटों में गंडक नदी की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। अगर नेपाल से आने वाला पानी लगातार कम होता है और नई भारी बारिश नहीं होती, तो बाढ़ की लहर नीचे की ओर बढ़ते हुए धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। लेकिन अगर नेपाल और उत्तर बिहार में बारिश जारी रहती है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल सबसे ज्यादा चिंता उत्तर बिहार के गंडक बेसिन को लेकर है, न कि पूरे बिहार या पूर्वी भारत के बड़े हिस्से को लेकर। आने वाले दिनों में नदी का जलस्तर, बैराज से छोड़ा जाने वाला पानी और नेपाल तथा उत्तर बिहार में होने वाली बारिश लगातार मॉनिटर करना बेहद जरूरी होगा।

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Mahesh Palawat
Vice President of Meteorology & Climate Change
Mr. Palawat, Vice President of Meteorology & Climate Change, is a former Air Force boxer and a passionate weather enthusiast. Dedicated to tracking and predicting weather for the benefit of farmers and the general public, he has been an integral part of Skymet since its inception.
FAQ

गंडक नदी के कारण पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज सबसे महत्वपूर्ण निगरानी वाले जिले हैं। इसके अलावा सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली पर भी नजर रखना जरूरी है।

नहीं, फिलहाल मुख्य चिंता गंडक बेसिन तक सीमित है। कोसी, बागमती, बूढ़ी गंडक और घाघरा अलग नदी प्रणालियां हैं और उनकी स्थिति अलग से आंकी जाएगी।

इस दौरान नेपाल से आने वाले पानी, गंडक के जलस्तर, बैराज डिस्चार्ज और नेपाल व उत्तर बिहार में होने वाली बारिश से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। बारिश कम होने पर बाढ़ की लहर धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

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