12,000 साल बाद क्यों फटा हैली गुब्बी ज्वालामुखी, आगे क्या मंडरा रहा खतरा?

By: Arti Kumari | Edited By: Mohini Sharma
Nov 25, 2025, 3:15 PM
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हैली गुब्बी ज्वालामुखी फटा, फोटो: X/Social Media

मुख्य मौसम बिंदु

  • 12,000 साल बाद इथियोपिया के हैली गुबी ज्वालामुखी का दुर्लभ विस्फोट
  • राख का बादल लाल सागर पार कर भारत के कई राज्यों तक पहुंचा
  • उड़ानों के रूट बदले गए, लेकिन जमीन-स्तर की हवा सुरक्षित
  • आज शाम तक राख के भारतीय वायुक्षेत्र से बाहर जाने की संभावना

इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी में करीब 12,000 साल बाद अचानक विस्फोट हुआ, जिसने भारी मात्रा में ज्वालामुखीय राख आसमान में फैला दी। यह राख लाल सागर पार करते हुए यमन, ओमान से गुजरकर अब भारतीय आसमान तक पहुंच गई है। सोमवार देर रात यह राख बहुत ऊंचाई पर भारत में दाखिल हुई। गुजरात, राजस्थान, दिल्ली–एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के ऊपर यह राख ऊंचाई पर बहती हुई देखी गई है।

अंतरिक्ष से देखा गया हैली गुब्बी ज्वालामुखी विस्फोट। (फोटो: X/@simoncarn.bsky.social)

अंतरिक्ष से देखा गया हैली गुब्बी ज्वालामुखी विस्फोट। (फोटो: X/@simoncarn.bsky.social)

फ्लाइट ऑपरेशनों पर असर-एयरलाइंस हुईं अलर्ट

इथियोपिया के अफ़ार क्षेत्र में हुए इस विस्फोट की वजह से मौसम वैज्ञानिक और एविएशन एजेंसियां लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, क्योंकि इसका असर कई देशों के वायुमंडल तक दिखाई दे रहा है। जिस कारण भारतीय एयरलाइंस ने तुरंत कदम उठाए। अकासा एयर ने जेद्दा, कुवैत और अबूधाबी की उड़ानें रद्द कीं। वहीं, KLM ने एम्स्टर्डम–दिल्ली उड़ान रोकी और इंडिगो ने रूट बदले। साथ ही DGCA ने सभी एयरलाइंस को राख वाले हवाई क्षेत्र से बचने और किसी तकनीकी समस्या की रिपोर्ट देने को कहा है। सैटेलाइट डेटा के अनुसार राख 15,000 से 25,000 फीट की ऊंचाई पर तैर रही है, जबकि कुछ हिस्से 45,000 फीट तक पहुंच गए हैं,जो जमीन पर सांस लेने वाली हवा से काफी ऊपर हैं।

हैली गुब्बी ज्वालामुखी का विस्फोट, (फोटो: X/@simoncarn.bsky.social)

हैली गुब्बी ज्वालामुखी का विस्फोट, (फोटो: X/@simoncarn.bsky.social)

12,000 साल बाद विस्फोट क्यों हुआ? वैज्ञानिक कारण

हैली गुबी ज्वालामुखी अफ़ार रिफ्ट ज़ोन में स्थित है, जहां अफ्रीकी और अरब टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे से अलग हो रही हैं। इससे धरती के अंदर जमा मैग्मा धीरे-धीरे ऊपर आता रहा और वर्षों में दबाव इतना बढ़ गया कि चट्टानें उसे रोक नहीं सकीं। विस्फोट से पहले आए छोटे भूकंप ने संकेत दिया कि मैग्मा सतह की ओर बढ़ रहा था। बता दें, इथियोपिया में जहां ज्वालामुखी फटा है वह इलाका बेहद दूर और दुर्गम है, इसलिए विशेषज्ञ ज़्यादातर सैटेलाइट डेटा और रिमोट मॉनिटरिंग के जरिए इसकी स्थिति का अध्ययन कर रहे हैं।

लाल सागर और दक्षिण-पश्चिमी अरब के ऊपर राख का गुबार उठता हुआ देखा गया, फोटो: X/ (@erikklemetti.bsky.social/bluesky)

लाल सागर और दक्षिण-पश्चिमी अरब के ऊपर राख का गुबार उठता हुआ देखा गया, फोटो: X/ (@erikklemetti.bsky.social/bluesky)

भारत पर कितना असर पड़ेगा? विशेषज्ञों की राय

फिलहाल इसका असर भारत की ऊपरी हवा तक सीमित है, जमीन-स्तर की हवा में बहुत कम या बिल्कुल नहीं। दिल्ली की आज की खराब वायु गुणवत्ता ज्वालामुखी राख की वजह से नहीं, बल्कि पहले से मौजूद स्थानीय प्रदूषण के कारण है। कहीं-कहीं आसमान थोड़ा धुंधला या सूरज फीका दिख सकता है। जब तक राख भारतीय वायुक्षेत्र में रहेगी, उड़ानों में बदलाव या देरी संभव है। अनुमान है कि यह राख आज शाम 7:30 बजे तक भारत से बाहर निकलकर चीन की ओर बढ़ जाएगी।

ज्वालामुखी राख से रोजमर्रा की जिंदगी पर संभावित प्रभाव

ज्वालामुखीय राख हजारों किलोमीटर दूर भी उड़ानों, उपग्रह संचार और नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। अगर राख जमीन पर गिरे, तो इमारतें, पानी के स्रोत और खेती अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकते हैं। भारत में अभी केवल वायुमंडलीय असर दिख रहा है। ज्वालामुखी राख पत्थर, खनिज, कांच और गैसों के महीन कणों से बनी होती है, जो PM2.5 की तरह फेफड़ों, आंखों और गले में जलन कर सकती है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, COPD, हार्ट पेशेंट, बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं ज्यादा संवेदनशील होती हैं।

क्या करें? सरल सुरक्षा उपाय

हालांकि राख जमीन पर आने की संभावना कम है, फिर भी दिल्ली–NCR जैसे प्रदूषणग्रस्त इलाकों में लोग सावधान रहें-

• बाहर जाएं तो N95 मास्क लगाएं

• खिड़कियां बंद रखें

• बाहर भारी एक्सरसाइज न करें

• घर की हवा साफ रखें

आगे क्या होगा? पूर्वानुमान

राख तेज़ी से आगे बढ़ रही है और आज शाम तक भारतीय इलाके से बाहर निकलने की संभावना है। हवाई सेवाओं में अस्थायी बदलाव जारी रह सकते हैं। ज्यादातर लोगों के लिए यह स्थिति चिंता का नहीं, जागरूकता का विषय है। मौसम एजेंसियां लगातार इसकी ट्रैकिंग कर रही हैं।

प्रकृति की याद — वैश्विक घटनाएँ स्थानीय असर ला सकती हैं

हैली गुब्बी ज्वालामुखी का यह दुर्लभ विस्फोट बताता है कि प्राकृतिक घटनाएँ भी हमारे मौसम, यात्रा और पर्यावरण को प्रभावित कर सकती हैं। लगातार निगरानी और सावधानी से भारत में असर सीमित रहने की उम्मीद है।

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Arti Kumari
Content Writer (English)
A Zoology graduate with a passion for science and storytelling, Arti turns complex weather and climate data into clear, engaging narratives at Skymet Weather. She drives Skymet’s digital presence across platforms, crafting research-based, data-driven stories that inform, educate, and inspire audiences across India and beyond.
FAQ

यह अफ़ार रिफ्ट ज़ोन में स्थित है, जहां अफ्रीकी और अरब टेक्टोनिक प्लेटें अलग हो रही हैं। लंबे समय से जमा मैग्मा और दबाव बढ़ने से 12,000 साल बाद विस्फोट हुआ।

नहीं, ज्वालामुखी राख 15,000–45,000 फीट की ऊंचाई पर है, इसलिए जमीन की हवा में इसका प्रभाव बेहद कम है। दिल्ली की खराब हवा स्थानीय प्रदूषण के कारण है।

हां, कुछ एयरलाइंस ने मार्ग बदले या उड़ानें रद्द की हैं। DGCA ने राख वाले क्षेत्रों से बचने के निर्देश दिए हैं, जब तक गुबार भारत से बाहर न निकल जाए।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी स्काइमेट की पूर्वानुमान टीम द्वारा किए गए मौसम और जलवायु विश्लेषण पर आधारित है। हम वैज्ञानिक रूप से सही जानकारी देने का प्रयास करते हैं, लेकिन बदलती वायुमंडलीय स्थितियों के कारण मौसम में बदलाव संभव है। यह केवल सूचना के लिए है, इसे पूरी तरह निश्चित भविष्यवाणी न मानें।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है