बंगाल की खाड़ी में बन सकता है निम्न दबाव, पूर्वी भारत में फिर सक्रिय होगा मानसून, ओडिशा-बिहार-झारखंड में बढ़ेगी बारिश
मुख्य मौसम बिंदु
- मध्य प्रदेश और दक्षिणी यूपी में अगले 36 घंटे बारिश होगी।
- 23 अगस्त से ओडिशा, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड में मानसून सक्रिय होगा।
- 24-25 अगस्त को मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में बारिश बढ़ेगी।
- बूंदी, कोटा, बारां और झालावाड़ में भारी बारिश का खतरा रहेगा।
- पूर्वानुमान वैधता: 23 अगस्त से महीने के अंत तक मान्य है। 26 अगस्त के बाद बारिश पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सिमट सकती है।
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उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव क्षेत्र अब और कमजोर हो गया है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण करीब 20,000 फीट की ऊंचाई तक फैला हुआ है। यह सिस्टम अब इसी क्षेत्र में धीरे-धीरे कमजोर होकर समाप्त होगा और बाद में वहां से गुजर रही मौसमी मानसून ट्रफ में मिल जाएगा।
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पिछले 24 घंटों में बुंदेलखंड और दक्षिणी उत्तर प्रदेश के आसपास के क्षेत्रों में कई जगहों पर मध्यम बारिश और गरज के साथ बौछारें हुईं। टीकमगढ़, ग्वालियर, गुना, सतना, नौगांव, राजगढ़, झांसी, ललितपुर और बांदा में मध्यम बारिश दर्ज की गई। अगले 36 घंटों तक इन्हीं क्षेत्रों में एक बार फिर बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं, हालांकि इस बार इसकी तीव्रता थोड़ी कम रह सकती है।

बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम, पूर्वी राज्यों में फिर सक्रिय होगा मानसून
पहले सिस्टम के कमजोर पड़ने के तुरंत बाद उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे लगे ओडिशा, पश्चिम बंगाल तथा बांग्लादेश के तटीय हिस्सों में एक नया चक्रवाती परिसंचरण बन गया है। यह सिस्टम अगले कुछ समय में और मजबूत हो सकता है और इसके प्रभाव से इसी क्षेत्र में एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इस नए सिस्टम के कारण पूर्वी भारत में एक बार फिर सक्रिय मानसून की स्थिति बन सकती है। इसका असर केवल पूर्वी राज्यों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके बाहरी प्रभाव से मध्य भारत और गंगा के मैदानी इलाकों में भी बारिश की गतिविधियां पहुंच सकती हैं।

राजस्थान के कई जिलों में भारी बारिश का खतरा
इन मौसम प्रणालियों के आसपास बनने वाले हवाओं के मिलन वाले क्षेत्र बारिश के प्रमुख केंद्र बनेंगे। इन क्षेत्रों में अलग-अलग दिशाओं से आने वाली हवाएं आपस में मिलती हैं, जिससे बादल बनते हैं और बारिश की गतिविधियां बढ़ती हैं। ये सक्रिय मौसम क्षेत्र अक्सर निम्न दबाव के केंद्र से काफी आगे तक फैल जाते हैं।
23 अगस्त से उत्तर ओडिशा, उत्तर छत्तीसगढ़, दक्षिण बिहार और झारखंड में बड़े क्षेत्र में बारिश और गरज-चमक शुरू होने की संभावना है। 24 और 25 अगस्त को इसका प्रभाव मध्य प्रदेश तक बढ़ेगा और पूर्वी राजस्थान के आसपास के हिस्सों में भी बारिश पहुंच सकती है।
राजस्थान में अरब सागर से आने वाली नमी वाली हवाएं भी इस सिस्टम को सहारा देंगी। दोनों दिशाओं से आने वाली हवाओं के मिलने से कुछ जिलों में बहुत भारी बारिश और जलभराव जैसी स्थिति बन सकती है। बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, भीलवाड़ा, टोंक और सवाई माधोपुर में भारी बारिश का जोखिम अधिक रहेगा। इन क्षेत्रों और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 26 अगस्त से बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे कम होने लगेंगी।
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अगस्त के आखिर में बारिश पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत तक सिमट सकती है
26 अगस्त के बाद तेज बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे पूर्व की ओर खिसकेंगी। अगस्त के अंतिम दिनों में बारिश मुख्य रूप से पूर्वी बिहार, पूर्वी झारखंड, उत्तर ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों तक सीमित होने की संभावना है। 24 अगस्त के बाद उत्तर भारत के मैदानी इलाकों, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में मानसून की गतिविधियां काफी कम हो सकती हैं।
दक्षिण भारत में मुख्य रूप से तटीय कर्नाटक और केरल इससे अलग रहेंगे, जहां कुछ बारिश जारी रह सकती है। इस तरह अगस्त के अंतिम सप्ताह में देश के बड़े हिस्से में मानसून कमजोर पड़ सकता है, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश सक्रिय रह सकती है। इससे कई राज्यों में अगस्त का अंत अपेक्षाकृत कमजोर बारिश के साथ होने की संभावना है।



