महाराष्ट्र में मानसून सुस्त! अगस्त में कम बारिश के आसार, विदर्भ-मराठवाड़ा में बढ़ेगा जल संकट

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Aug 20, 2026, 4:00 PM
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महाराष्ट्र मौसम अपडेट

मुख्य मौसम बिंदु

  • विदर्भ और मराठवाड़ा में बारिश की कमी बढ़कर क्रमशः 22% और 21% हो गई है।
  • मध्य महाराष्ट्र का बारिश सरप्लस 35% से अधिक से घटकर अब केवल 16% रह गया है।
  • विदर्भ के नागपुर, गोंदिया, गडचिरोली, चंद्रपुर, वर्धा, अमरावती और यवतमाल में हल्की बारिश संभव है।
  • बारिश नहीं होने से विदर्भ और मराठवाड़ा में खरीफ फसलों के लिए जल संकट बढ़ सकता है।
  • मौसम पूर्वानुमान: अगस्त के बाकी दिनों में बारिश सीमित रहने की संभावना है, सितंबर की शुरुआत भी बड़े बारिश वाले सिस्टम के लिहाज से कमजोर नजर आ रही है।

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महाराष्ट्र के तीनों भूमि से घिरे उप-विभागों विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र में जून की बारिश की कमी की अच्छी रिकवरी हुई। जुलाई के अंत तक तीनों क्षेत्रों की स्थिति काफी बेहतर हो गई थी। विदर्भ और मराठवाड़ा में बारिश की कमी घटकर सामान्य के करीब यानी एक अंक तक रह गई थी, जबकि पश्चिमी घाट के वर्षाछाया क्षेत्र में स्थित उत्तर-दक्षिण दिशा वाले मध्य महाराष्ट्र में बारिश 35% से ज्यादा सरप्लस हो गई थी।

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लेकिन अगस्त में स्थिति बदल गई है। इस महीने अब तक बारिश कमजोर और छिटपुट रही है। इसके कारण मध्य महाराष्ट्र में बना बारिश का सरप्लस लगातार कम हो रहा है और अब यह केवल 16% रह गया है। वहीं, विदर्भ और मराठवाड़ा सामान्य बारिश की सीमा ±19% को पार कर अब बारिश की कमी वाले क्षेत्र में पहुंच गए हैं। विदर्भ में बारिश की कमी 22% और मराठवाड़ा में 21% हो गई है। आने वाले दिनों में स्थिति सुधरने के बजाय और खराब होने की आशंका है।

अगस्त में मौसम प्रणालियों ने बदला रास्ता, महाराष्ट्र को नहीं हुई भरपूर बारिश

जुलाई में बंगाल की खाड़ी से बनने वाली कई मौसम प्रणालियां महाराष्ट्र के ऊपर से होकर आगे बढ़ी थीं। इन सिस्टमों के कारण राज्य के बड़े हिस्से में अच्छी और व्यापक बारिश हुई थी। इसी वजह से जून की कमी की भरपाई करने में मदद मिली थी। लेकिन अगस्त में बनी पिछली दो मौसम प्रणालियों ने अपना रास्ता बदल लिया। ये सिस्टम इंडो-गंगा के मैदानी क्षेत्रों की ओर बढ़े और महाराष्ट्र मुख्य मौसम गतिविधि से दूर रहा। इसके कारण राज्य में बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी रहीं। केवल विदर्भ के सीमावर्ती हिस्सों और मध्य प्रदेश से सटे मराठवाड़ा के कुछ क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई। हालांकि, यह बारिश इस समय सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए जरूरी मात्रा से काफी कम रही।

मौजूदा निम्न दबाव से महाराष्ट्र को ज्यादा उम्मीद नहीं

फिलहाल उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक निम्न दबाव क्षेत्र बना हुआ है। यह सिस्टम विदर्भ और मराठवाड़ा से काफी दूर है और अब खुद भी कमजोर हो रहा है। इसके जल्द ही समाप्त होने की संभावना है। इसलिए इससे महाराष्ट्र में व्यापक बारिश की उम्मीद नहीं है। बंगाल की खाड़ी में एक और मौसम प्रणाली बनने की संभावना है, लेकिन अभी इसके भी महाराष्ट्र के करीब आने के संकेत नहीं हैं।

इसके बाहरी प्रभाव से विदर्भ के कुछ सीमित हिस्सों में केवल राहत देने वाली हल्की बारिश हो सकती है। ब्रह्मपुरी, गोंदिया, गडचिरोली, चंद्रपुर, नागपुर, वर्धा, अमरावती और यवतमाल में कुछ बारिश संभव है। इसके अलावा पश्चिमी घाट के वर्षाछाया क्षेत्र में स्थित मध्य महाराष्ट्र के पुणे, नासिक, सांगली, सातारा, सोलापुर और कोल्हापुर क्षेत्रों में भी छिटपुट बारिश हो सकती है। लेकिन बारिश का फैलाव और तीव्रता दोनों ही सामान्य जरूरत की तुलना में काफी कम रहने की संभावना है।

अगस्त के बाकी दिनों में बारिश की कमी बढ़ेगी, खरीफ फसलों पर दबाव

महाराष्ट्र में आने वाले दिनों में बारिश की सीमित गतिविधि के कारण मध्य महाराष्ट्र का मौजूदा 16% सरप्लस और कम हो सकता है और यह सामान्य से कम बारिश वाले क्षेत्र में भी पहुंच सकता है। वहीं, विदर्भ और मराठवाड़ा में बारिश की कमी बढ़ने से खरीफ फसलों पर पानी की कमी का दबाव बढ़ सकता है। कोंकण तट और मुंबई में भी अगस्त के बचे हुए दिनों में पर्याप्त बारिश होने की संभावना नहीं है।

फिलहाल पूरे महाराष्ट्र की मौसमी बारिश में करीब 5% की कमी है, लेकिन अगस्त के बाकी दिनों में यह कमी और बढ़ सकती है। सितंबर की शुरुआत भी राज्य के लिए बहुत अच्छी बारिश का संकेत नहीं दे रही है। ऐसे में महाराष्ट्र के मुख्य वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। खासकर वे क्षेत्र जो सिंचाई के बजाय मानसूनी बारिश पर निर्भर हैं, वहां पानी की उपलब्धता और फसल की स्थिति पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

फिलहाल विदर्भ में बारिश की कमी 22% और मराठवाड़ा में 21% है। दोनों क्षेत्र सामान्य बारिश की सीमा से नीचे चले गए हैं।

फिलहाल अच्छी बारिश के संकेत नहीं हैं। कुछ हिस्सों में हल्की और छिटपुट बारिश हो सकती है, लेकिन इसकी तीव्रता और फैलाव सामान्य जरूरत से काफी कम रहने की संभावना है।

विदर्भ और मराठवाड़ा में बारिश की कमी बढ़ने से पानी का तनाव बढ़ सकता है। इससे बारिश पर निर्भर खरीफ फसलों पर दबाव पड़ने की आशंका है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है