नया कम दबाव बन रहा, फिर एक्टिव होगा मानसून, कई राज्यों में बारिश के आसार

By: AVM GP Sharma | Edited By: Mohini Sharma
Sep 8, 2026, 2:45 PM
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मौसम अपडेट, सांकेतिक फोटो: AI Generated

मुख्य मौसम बिंदु

  • मध्य व पूर्वी उत्तर प्रदेश की तलहटी में मौजूद कम दबाव का अवशेष अगले 48 घंटे में कमजोर होगा
  • बंगाल की खाड़ी में कम दबाव बनने और 11–12 सितंबर को जमीन पर पहुंचने की संभावना।
  • पूर्वी भारत से एमपी, दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, सहित कई राज्यों में बारिश।
  • सिस्टम 15–16 सितंबर से कमजोर हो सकता है, जिसके बाद मानसून वापसी की संभावना।
  • पूर्वानुमान वैधता: यह मौसम पूर्वानुमान 16 सितंबर 2026 तक मान्य है।

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पिछले कम दबाव वाले क्षेत्र का बचा हुआ हिस्सा अब मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश की तलहटी में, नेपाल से सटे इलाकों में बना हुआ है। यह सिस्टम अब धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है और ऊबड़-खाबड़ भू-भाग के कारण इसके पूरी तरह खत्म होने की संभावना है। हालांकि, अगले 48 घंटों तक यह पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की तलहटी के साथ एक कमजोर पूर्व-पश्चिम ट्रफ के रूप में दिखाई दे सकता है। इसके कारण इन क्षेत्रों में मौसम गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी। इसी बीच बंगाल की खाड़ी में एक और कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, जो देश के पूर्वी हिस्सों में मानसून की गतिविधियों को आगे भी सक्रिय रखेगा।

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सैटेलाइट इमेज

सैटेलाइट इमेज, Himawari

10 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में बनेगा नया कम दबाव

उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी में मध्य क्षोभमंडल तक फैला एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके प्रभाव से 10 सितंबर 2026 को बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो सकता है। इसके बाद यह सिस्टम 11 सितंबर को आंशिक रूप से जमीन पर पहुंचना शुरू करेगा और 12 सितंबर तक पूरी तरह अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश कर सकता है। इस सिस्टम का जीवनकाल करीब पांच दिनों का रहने की संभावना है। इस दौरान यह देश के पूर्वी और मध्य हिस्सों से होकर आगे बढ़ेगा। सिस्टम के मुख्य रास्ते के दोनों ओर के आसपास के क्षेत्रों में भी इसके प्रभाव से बारिश और अन्य मौसम गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

पूर्वी भारत से मध्य भारत तक पहुंचेगी बारिश, महाराष्ट्र को भी फायदा

बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण से उत्तर की ओर एक ट्रफ भी विकसित होगी, जो ओडिशा, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार से होकर गुजरेगी। पुराने कम दबाव वाले क्षेत्र और इस उत्तर-दक्षिण ट्रफ के संयुक्त प्रभाव से 8 और 9 सितंबर को तटीय ओडिशा, तटीय गंगीय पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में छिटपुट बारिश तथा गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। इसके बाद नए कम दबाव के क्षेत्र के बनने और पश्चिम की ओर बढ़ने से बारिश की गतिविधियां देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचेंगी।

इसका प्रभाव पश्चिमी मध्य प्रदेश, भारत-गंगा के मैदानी क्षेत्रों, दिल्ली, पूर्वी राजस्थान के आसपास, विदर्भ, मराठवाड़ा, उत्तरी तेलंगाना और गुजरात के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है। मध्य प्रदेश में लगभग पूरे राज्य में अलग-अलग समय पर बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। वहीं बारिश की कमी झेल रहे आंतरिक महाराष्ट्र को इस सिस्टम से सबसे ज्यादा फायदा मिलने की संभावना है। मानसून की विदाई से पहले होने वाली बारिश पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच सकती है और वहां एक-दो दिन बारिश हो सकती है।

क्या यह मानसून का आखिरी सिस्टम होगा? 17 सितंबर से विदाई की उम्मीद

संभावना है कि यह मानसून की वापसी से पहले बनने वाला आखिरी प्रमुख मौसम सिस्टम हो। हालांकि पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, बाड़मेर, फलोदी और जोधपुर जैसे सीमावर्ती इलाकों में अगस्त के मध्य के बाद बारिश नहीं हुई है, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी राजस्थान के आसपास सक्रिय मौसम प्रणालियों से हो रही बारिश मानसून की विदाई को रोक रही है। नए कम दबाव का क्षेत्र 15–16 सितंबर के आसपास कमजोर और बिखरना शुरू कर सकता है।

इसके साथ ही बारिश की गतिविधियां भी धीरे-धीरे कम होने लगेंगी। चूंकि मानसून की वापसी की आधिकारिक घोषणा आमतौर पर वास्तविक मौसम गतिविधि के आधार पर बाद में की जाती है, इसलिए सिस्टम कमजोर होने के बाद भी औपचारिक घोषणा में कुछ और दिन लग सकते हैं। पश्चिमी राजस्थान के सबसे पश्चिमी हिस्सों से मानसून की विदाई की निर्धारित तारीख 17 सितंबर है। पिछले साल यानी 2025 में मानसून की वापसी निर्धारित समय से थोड़ी पहले 14 सितंबर को शुरू हुई थी और पूरे देश से इसकी वापसी अक्टूबर के मध्य तक पूरी हुई थी।

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AVM GP Sharma
President of Meteorology & Climate Change
AVM Sharma, President of Meteorology & Climate Change at Skymet Weather Services, is a retired Indian Air Force officer who previously led the Meteorological Branch at Air Headquarters in New Delhi. With over a decade of experience at Skymet, he brings a wealth of knowledge and expertise to the organization.
FAQ

बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव क्षेत्र 10 सितंबर 2026 को बनने की संभावना है। यह 11 सितंबर से जमीन की ओर बढ़ेगा और 12 सितंबर तक पूरी तरह अंदरूनी हिस्सों में पहुंच सकता है।

बारिश का प्रभाव पूर्वी और मध्य भारत से बढ़कर पश्चिमी मध्य प्रदेश, दिल्ली, पूर्वी राजस्थान, विदर्भ, मराठवाड़ा, उत्तरी तेलंगाना और गुजरात के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है।

नया सिस्टम 15–16 सितंबर के आसपास कमजोर पड़ सकता है। इसके बाद मानसून की वापसी का रास्ता साफ होने की संभावना है। पश्चिमी राजस्थान से मानसून की निर्धारित वापसी की तारीख 17 सितंबर है।

डिस्क्लेमर: डिस्कलेमर- यह विश्लेषण स्काइमेट के मौसम संबंधी आंकड़ों, आंतरिक पूर्वानुमान मॉडल, मौसम केंद्रों से प्राप्त जानकारी, जलवायु संबंधी डेटा और स्काइमेट की मौसम विशेषज्ञ टीम के आकलन पर आधारित है। सटीक जानकारी देने का पूरा प्रयास किया गया है, लेकिन मौसम लगातार बदलने वाली प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए परिस्थितियां समय के साथ बदल सकती हैं। यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है और इसे अंतिम या पूरी तरह निश्चित मौसम पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए।

Skymet भारत की सबसे बेहतर और सटीक निजी मौसम पूर्वानुमान और जलवायु इंटेलिजेंस कंपनी है, जो देशभर में विश्वसनीय मौसम डेटा, मानसून अपडेट और कृषि जोखिम प्रबंधन समाधान प्रदान करती है